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अल्जाइमर से बचाव में जीवनशैली की अहम भूमिका, दिमाग को स्वस्थ रखने के 5 आसान तरीके

भूलने की समस्या अधिकांश बढ़ती उम्र के लोगों में सामान्य मानी जाती है, लेकिन यदि लगातार भूलने की समस्या होना, रोजाना के कामों में परेशानी होना और निर्णय लेने की क्षमता में बदलाव जैसे लक्षण अल्जाइमर रोग की ओर संकेत कर सकते हैं. अल्जाइमर एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त

अल्जाइमर से बचाव में जीवनशैली की अहम भूमिका, दिमाग को स्वस्थ रखने के 5 आसान तरीके
स्रोत: abp news world
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भूलने की समस्या अधिकांश बढ़ती उम्र के लोगों में सामान्य मानी जाती है, लेकिन यदि लगातार भूलने की समस्या होना, रोजाना के कामों में परेशानी होना और निर्णय लेने की क्षमता में बदलाव जैसे लक्षण अल्जाइमर रोग की ओर संकेत कर सकते हैं. अल्जाइमर एक प्रगतिशील न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारी है, जिसमें धीरे-धीरे याददाश्त और सोचने-समझने की क्षमता पर प्रभाव पड़ता है. हालांकि उम्र और आनुवंशिक कारणों जैसे कुछ जोखिम कारकों को बदला नहीं जा सकता, लेकिन स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर मस्तिष्क के स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने और कुछ जोखिम कारकों को कम करने में मदद मिल सकती है. वे कौनसी आवश्यक बातें हैं जिन्हें अपने रोजमर्रा की जिंदगी में अपनाने से अल्जाइमर की समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है, उसके बारे में जानना जरूरी है.

1. नियमित शारीरिक गतिविधि अपनाएं अपनी दिनचर्या में

नियमित व्यायाम केवल शरीर को स्वस्थ रखने के लिए ही नहीं, बल्कि मस्तिष्क के लिए भी महत्वपूर्ण है. तेज चलना, साइकिल चलाना, तैरना, योग या हल्की एरोबिक एक्सरसाइज जैसी गतिविधियां शरीर में रक्त संचार बेहतर करने में मदद करती हैं. सप्ताह में अधिकांश दिनों पर नियमित शारीरिक गतिविधि करने की आदत बनाना दिमाग और हृदय दोनों के स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है. लंबे समय तक लगातार बैठे रहने से बचें और दिनभर में छोटे-छोटे एक्टिविटी ब्रेक लेते रहें.

2. संतुलित और पौष्टिक आहार आवश्यक
मस्तिष्क को स्वस्थ रखने में खान-पान की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. भोजन में हरी पत्तेदार सब्जियां, मौसमी फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स, नट्स और बीज शामिल करें. अत्यधिक नमक, चीनी, ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड का सेवन सीमित करना बेहतर है. संतुलित आहार शरीर के वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखने में मदद करता है, जो मस्तिष्क के स्वास्थ्य से भी जुड़े हैं.

3. दिमाग सक्रिय रखें
जिस तरह शरीर को व्यायाम की जरूरत होती है, उसी तरह मस्तिष्क को भी सक्रिय रखना जरूरी है. किताब पढ़ना, नई भाषा या कोई नया कौशल सीखना, संगीत सुनना या सीखना, पहेलियां हल करना, लिखना और रचनात्मक गतिविधियों में शामिल होना मानसिक सक्रियता बनाए रखने में मदद कर सकता है. परिवार और दोस्तों के साथ बातचीत करना तथा सामाजिक गतिविधियों में भाग लेना भी मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है.

4. सही नींद जरुरी
पर्याप्त और अच्छी गुणवत्ता वाली नींद मस्तिष्क के स्वास्थ्य के लिए जरूरी है. रोजाना पर्याप्त नींद लेने और सोने-जागने का नियमित समय बनाए रखने की कोशिश करें. लंबे समय तक रहने वाला तनाव भी स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है. ध्यान, योग, गहरी सांस लेने की तकनीक, संगीत या अपनी पसंद की गतिविधियों के माध्यम से तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करें.

5. ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित रखें
हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल जैसे स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कारक मस्तिष्क के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं. इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच कराना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इन स्थितियों को नियंत्रित रखना महत्वपूर्ण है. धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन न करना या सीमित करना भी समग्र स्वास्थ्य के लिए बेहतर है.

अपनाएं स्वस्थ आदतें और तनाव से बचें

अल्जाइमर से बचाव की कोई एक निश्चित गारंटी देने वाली रणनीति नहीं है. फिर भी, नियमित व्यायाम, संतुलित आहार, मानसिक सक्रियता, अच्छी नींद और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कारकों का नियंत्रण मस्तिष्क के स्वास्थ्य को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद कर सकता है. तनावमुक्त वातावरण से भी अल्जाइमर की समस्या को कम कर सकता है. स्वस्थ आदतों की शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है. याददाश्त या सोचने-समझने की क्षमता में लगातार बदलाव दिखाई दें, तो इसे केवल उम्र का असर मानने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है.

आज के समय में रक्त परीक्षण  (Blood Biomarker blood test P tau/Beta amyloid ratio test easily done and next day report come for early diagnosis of Alzheimer’s Disease, इन early stage of Mild Cognitive Impairment) उपलब्ध हैं, जिनकी मदद से अल्जाइमर डिमेंशिया का प्रारंभिक चरण में पता लगाया जा सकता है. समय पर निदान होने से रोगी को बेहतर और समग्र उपचार (Comprehensive Management) मिल पाता है, जिससे बीमारी की प्रगति को धीमा करने में सहायता मिलती है.

नई उपचार पध्दतियों को भी अपनाएं

डॉ. दिनेश चौकसे बताते हैं कि इन सबके अलावा, अब रोग-संशोधक (Disease-Modifying Therapy medicine like Injection Lacanemab) नई उपचार पद्धतियां भी उपलब्ध हैं, जो चयनित मरीजों में बीमारी की गति को कम करने और उनके जीवन की गुणवत्ता तथा स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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