16 अक्टूबर 2026, 6:28 PM
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इटावा जिला अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज:45 मिनट तक गुल रही बिजली, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी परेशान

इटावा में डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में गुरुवार रात बिजली आपूर्ति बाधित होने से इमरजेंसी वार्ड और अन्य कक्षों में अंधेरा छा गया। रात करीब 7:30 से 8:20 बजे तक बिजली गुल रहने के दौरान मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों का उपचार करते और जरूरी कागजी कार्

इटावा जिला अस्पताल में टॉर्च की रोशनी में हुआ इलाज:45 मिनट तक गुल रही बिजली, डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी परेशान
स्रोत: dainik bhasker category
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इटावा में डॉ. भीमराव अंबेडकर संयुक्त जिला चिकित्सालय में गुरुवार रात बिजली आपूर्ति बाधित होने से इमरजेंसी वार्ड और अन्य कक्षों में अंधेरा छा गया। रात करीब 7:30 से 8:20 बजे तक बिजली गुल रहने के दौरान मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। इस दौरान डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ मोबाइल की टॉर्च जलाकर मरीजों का उपचार करते और जरूरी कागजी कार्रवाई पूरी करते दिखाई दिए। अस्पताल में इन्वर्टर और जनरेटर जैसी वैकल्पिक व्यवस्थाएं होने के बावजूद मोबाइल की रोशनी के सहारे काम होने से बैकअप इंतजामों पर सवाल खड़े हो गए। मां को स्ट्रेचर पर लेकर वार्ड पहुंचे परिजन बुआपुर निवासी सूरज अपनी मां को चक्कर आने और कमजोरी की शिकायत पर अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बिजली न होने के कारण सूरज और उनके परिजन मोबाइल की टॉर्च जलाकर स्ट्रेचर को इमरजेंसी से तीसरे वार्ड की ओर ले जाते दिखाई दिए। अंधेरे में मरीज को वार्ड तक पहुंचाने के लिए उन्हें मोबाइल की रोशनी का सहारा लेना पड़ा। बच्ची को इंजेक्शन लगाने में भी हुई परेशानी शहर के कुनेरा निवासी सेजल की पांच साल की बेटी को इमरजेंसी वार्ड में इंजेक्शन लगाने के दौरान भी रोशनी की समस्या सामने आई। स्वास्थ्यकर्मी मोबाइल की टॉर्च की मदद से बच्ची की नब्ज तलाशते दिखाई दिए। इमरजेंसी में तैनात ईएमओ, डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ को नर्सिंग स्टेशन पर भर्ती मरीजों की फाइलों में उपचार संबंधी जानकारी दर्ज करने के लिए भी मोबाइल की टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा। इन तस्वीरों के सामने आने के बाद अस्पताल की वैकल्पिक बिजली व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल उठने लगे हैं। मौसम बिगड़ने से बाधित हुई बिजली आपूर्ति स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदारों के अनुसार, मौसम अचानक बिगड़ने और तेज हवाएं चलने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी। करीब 45 मिनट बाद बिजली दोबारा चालू हो गई। अधिकारियों ने बताया कि इमरजेंसी वार्ड में इन्वर्टर लगे हैं। डॉक्टरों के कक्ष और ऑपरेशन थिएटर (ओटी) जैसी महत्वपूर्ण जगहों पर भी इनका इस्तेमाल किया जा रहा था। हालांकि, बिजली गुल रहने के दौरान वार्डों में मोबाइल की टॉर्च से उपचार और दूसरे काम किए जाने की तस्वीरों ने बैकअप व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल जैसे महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केंद्र में इमरजेंसी सेवाओं के लिए निर्बाध रोशनी और बिजली की व्यवस्था जरूरी है। ऐसे में बिजली जाने के बाद वैकल्पिक व्यवस्था का पर्याप्त लाभ क्यों नहीं मिल सका, यह सवाल बना हुआ है।
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