केदारताल में बर्फ में दबी मिलीं UP की 2 बहनें:एक इन्फ्लुएंसर, दूसरी ग्राफिक्स डिजाइनर; नेपाल तक ट्रेकिंग कर चुकी थीं, वर्तिका और दीपिका की कहानी
उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन और बर्फबारी की चपेट में आने से लापता 8 लोगों में से अब तक 5 की मौत हो चुकी है। बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान तीन और शव बरामद किए गए। इनमें लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी ट्रैकर बहनें वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा भी शामिल हैं। वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा दोनों को पहाड़ों पर ट्रेकिंग का शौक

उत्तरकाशी के केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन और बर्फबारी की चपेट में आने से लापता 8 लोगों में से अब तक 5 की मौत हो चुकी है। बुधवार सुबह सर्च ऑपरेशन के दौरान तीन और शव बरामद किए गए। इनमें लखनऊ के गायत्रीपुरम निवासी ट्रैकर बहनें वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा भी शामिल हैं। वर्तिका वर्मा और दीपिका वर्मा दोनों को पहाड़ों पर ट्रेकिंग का शौक था। भारत और नेपाल के कई ट्रेक पूरे कर चुकीं बहनों के लिए इस बार केदारताल का सफर जिंदगी का सबसे मुश्किल इम्तिहान बन गया। दोनों की तलाश में उनके भाई अतुल वर्मा परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे थे। परिवार को हादसे की जानकारी ट्रेकिंग एजेंसी से नहीं, बल्कि सोशल मीडिया पर खबर देखकर मिली। पढ़िए वर्तिका और दीपिका की पूरी कहानी… पहाड़ों से था प्यार, कई ट्रेक कर चुकी थीं बहनें वर्तिका और दीपिका को ट्रेकिंग का शौक था। दोनों भारत और नेपाल में कई जगहों पर ट्रेकिंग कर चुकी थीं। करीब दो महीने पहले ही दोनों फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब की यात्रा से लौटी थीं। एक साल पहले भी दोनों बहनों ने अपने भाई अतुल और दोस्तों के साथ उत्तरकाशी के मोरी क्षेत्र में केदारकांठा की ट्रेकिंग की थी। पहाड़ों के रास्तों से परिचित होने और पहले भी कई ट्रेक पूरे करने के बावजूद केदारताल की परिस्थितियां बेहद चुनौतीपूर्ण साबित हुईं। वर्तिका फ्रीलांस इन्फ्लुएंसर हैं, जबकि दीपिका एक निजी कंपनी में ग्राफिक्स डिजाइनर के तौर पर काम करती थी। 27 अक्टूबर को शुरू किया था केदारताल का सफर 27 अक्टूबर को वर्तिका और दीपिका सात ट्रेकर्स और पांच सपोर्ट स्टाफ के साथ गंगोत्री से केदारताल के लिए रवाना हुई थीं। तीन दिन के इस ट्रेक से सभी को 29 अक्टूबर को वापस लौटना था। लेकिन मौसम बिगड़ने और भारी बर्फबारी के कारण रास्ते में हिमस्खलन हुआ। इससे वापसी का रास्ता बंद हो गया और दल के आठ सदस्य फंस गए। 30 अक्टूबर को ट्रेकिंग एजेंसी को दल के कुछ सदस्यों ने कच्ची ढांग के पास फंसे होने की जानकारी देकर मदद मांगी। इसके बाद रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हुआ। 31 अक्टूबर को सपोर्ट टीम के चार सदस्य सुरक्षित निकाल लिए गए। भाई को सोशल मीडिया से मिली हादसे की जानकारी अतुल वर्मा के मुताबिक, परिवार को ट्रेकिंग एजेंसी की ओर से हादसे की जानकारी नहीं दी गई। सोशल मीडिया पर खबर देखने के बाद वह परिजनों के साथ उत्तरकाशी पहुंचे। परिजनों ने ट्रेकिंग एजेंसी की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि खराब मौसम के बावजूद ट्रेकिंग कराई गई और हादसे के बाद भी उन्हें समय पर जानकारी नहीं मिली।
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