देवरिया में लेखपालों ने 150 अतिरिक्त हलकों का चार्ज छोड़ा:'एक वेतन, एक हल्का' सिद्धांत पर आरके कार्यालय में जमा किए बस्ते
देवरिया में लेखपालों ने बुधवार को दिन में 12 बजे तक अतिरिक्त हलकों का कार्यभार छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर जिले की पांचों तहसीलों में यह कदम उठाया गया। लेखपालों ने अतिरिक्त हलकों के बस्ते और राजस्व से जुड़े दस्तावेज रजिस्ट्रार कानूनगो (आरके) कार्यालय में जमा कर दिए। संघ ने इसे 'एक वेतन, एक हल्का' सिद्धांत के तह

देवरिया में लेखपालों ने बुधवार को दिन में 12 बजे तक अतिरिक्त हलकों का कार्यभार छोड़ दिया। उत्तर प्रदेश लेखपाल संघ के आह्वान पर जिले की पांचों तहसीलों में यह कदम उठाया गया। लेखपालों ने अतिरिक्त हलकों के बस्ते और राजस्व से जुड़े दस्तावेज रजिस्ट्रार कानूनगो (आरके) कार्यालय में जमा कर दिए। संघ ने इसे 'एक वेतन, एक हल्का' सिद्धांत के तहत उठाया गया कदम बताया है। लेखपालों का कहना है कि वे प्रदेश कार्यकारिणी के अगले फैसले तक सिर्फ अपने मूल हल्के का ही काम करेंगे। जिला मंत्री कृष्ण के मुताबिक, सदर तहसील में 44, सलेमपुर में 26, भाटपाररानी में 23, बरहज में 25 और रुद्रपुर में 32 अतिरिक्त हलकों का कार्यभार छोड़ा गया है। इस तरह जिले में कुल 150 अतिरिक्त हलकों का चार्ज कार्यालय में जमा किया गया। जिलाध्यक्ष भालेंदु कुमार सिंह ने बताया कि लेखपाल राजस्व प्रशासन की अहम कड़ी हैं। इसके बावजूद उन पर काम का बोझ बढ़ रहा है। साथ ही संसाधनों की कमी, पदोन्नति में देरी, वेतन से जुड़ी दिक्कतें और अतिरिक्त कार्यभार जैसी समस्याएं हैं। उन्होंने कहा कि लेखपाल सरकार की कई योजनाओं, राजस्व दस्तावेजों के रखरखाव, वरासत, नामांतरण, पैमाइश, ई-गवर्नेंस, आपदा प्रबंधन और कानून-व्यवस्था से जुड़े कामों में भी जिम्मेदारी निभाते हैं। संघ की मुख्य मांगों में अंतर्मंडलीय तबादले, चयन वर्ष 2025-26 की पदोन्नति सूची जारी करना और चयन वर्ष 2024 की विभागीय परीक्षा का परिणाम व प्रमाणपत्र जारी करना शामिल है। लेखपालों ने बताया कि 21 सितंबर तक मांगों पर कार्रवाई नहीं होने पर अतिरिक्त हलकों का काम छोड़ने का फैसला लिया गया था। संघ के पदाधिकारियों का आरोप है कि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई। प्रांतीय कार्यकारिणी ने राजस्व परिषद की चेयरमैन अर्चना अग्रवाल से मिलकर अपनी मांगें रखी थीं। दो अगस्त को एक कार्यवृत्त जारी कर एक महीने में सकारात्मक कार्रवाई का भरोसा दिया गया था। समय सीमा खत्म होने के बाद दोबारा बातचीत हुई, जिसमें 10 दिन का और समय मांगा गया। इसके बाद भी मांगों पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर मुख्य सचिव, उत्तर प्रदेश शासन को एक पत्र सौंपा गया।
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
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