4 नवंबर 2026, 9:26 PM
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बैडमिंटन खिलाड़ियों ने अपने खर्च पर खेले 4 टूर्नामेंट:SAI ने फंडिंग रोकी, पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने खिताब जीतकर दिया जवाब

भारत के बैडमिंटन खिलाड़ियों को अक्टूबर में यूरोप के चार टूर्नामेंट खेलने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। उन्हें टूर्नामेंट से कुछ दिन पहले पता चला कि इस दौरे के लिए सरकारी मदद नहीं मिलेगी। इसके बाद खिलाड़ियों ने यात्रा, खाने और होटल में रुकने का खर्च खुद उठाया। बजट की कमी के कारण कुछ खिलाड़ी अपने निजी कोच को भी साथ नहीं ले

बैडमिंटन खिलाड़ियों ने अपने खर्च पर खेले 4 टूर्नामेंट:SAI ने फंडिंग रोकी, पीवी सिंधु और लक्ष्य सेन ने खिताब जीतकर दिया जवाब
स्रोत: Dainik Bhaskar Uttar Pradesh
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भारत के बैडमिंटन खिलाड़ियों को अक्टूबर में यूरोप के चार टूर्नामेंट खेलने के लिए अपनी जेब से पैसे खर्च करने पड़े। उन्हें टूर्नामेंट से कुछ दिन पहले पता चला कि इस दौरे के लिए सरकारी मदद नहीं मिलेगी। इसके बाद खिलाड़ियों ने यात्रा, खाने और होटल में रुकने का खर्च खुद उठाया। बजट की कमी के कारण कुछ खिलाड़ी अपने निजी कोच को भी साथ नहीं ले जा सके। आर्थिक परेशानी के बावजूद जर्मनी में हुए हाइलो ओपन में पीवी सिंधु ने महिला सिंगल्स और लक्ष्य सेन ने पुरुष सिंगल्स का खिताब जीता। इससे पहले सिंधु फ्रेंच ओपन के फाइनल में भी पहुंची थीं। SAI ने किस वजह से रोकी फंडिंग? इस मामले में स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) और BAI के बीच जरूरी कागजी प्रक्रिया पूरी नहीं होने की बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, SAI के एक अधिकारी ने बताया कि BAI ने खिलाड़ियों के नाम सहित जरूरी प्रस्ताव तय समय पर जमा नहीं किया था। SAI के नियम के अनुसार, किसी टूर्नामेंट के लिए प्रस्ताव कम से कम 30 दिन पहले जमा करना होता है। पहले यह समयसीमा 90 दिन थी, जिसे बाद में 60 दिन किया गया। खेल महासंघों की मांग पर इसे घटाकर 30 दिन कर दिया गया था। कुछ अधिकारियों ने आशंका जताई थी कि एशियन गेम्स में भारतीय बैडमिंटन टीम के प्रदर्शन के कारण फंडिंग रोकी गई होगी। भारत 2014 के बाद पहली बार एशियन गेम्स में व्यक्तिगत बैडमिंटन मेडल नहीं जीत पाया था। फिनलैंड से शुरू हुआ यूरोप दौरा भारतीय खिलाड़ियों ने चार देशों में लगातार चार टूर्नामेंट खेले। इसकी शुरुआत 6 अक्टूबर को फिनलैंड के वांटा में आर्कटिक ओपन से हुई। इसके बाद टीम ने डेनमार्क ओपन, फ्रेंच ओपन और जर्मनी के हाइलो ओपन में हिस्सा लिया। इन टूर्नामेंटों में खेलने के लिए खिलाड़ियों को एक देश से दूसरे देश जाना था। इसके अलावा होटल में रुकने, खाने और अभ्यास का खर्च भी था। बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया (BAI) ने फिनलैंड में पहले टूर्नामेंट के दौरान खिलाड़ियों के ठहरने की व्यवस्था की थी, लेकिन बाकी खर्च उन्हें खुद उठाने पड़े। कुछ खिलाड़ी बिना कोच के खेले सिंधु ने खुद उठाया खर्च दो बार की ओलिंपिक मेडलिस्ट पीवी सिंधु ने भी फंडिंग नहीं मिलने पर हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि ऐसा उनके साथ पहले कभी नहीं हुआ था। सिंधु के मुताबिक, उस समय उनके लिए टूर्नामेंट छोड़ने के बारे में सोचना भी आसान नहीं था। उनका ध्यान खेलने और अपने प्रदर्शन में सुधार करने पर था। उन्होंने कुछ खर्च खुद उठाया, जबकि ओलिंपिक गोल्ड क्वेस्ट (OGQ) ने भी उनकी मदद की। OGQ एक गैर-लाभकारी संस्था है, जो भारतीय खिलाड़ियों को ट्रेनिंग और प्रतियोगिताओं की तैयारी में आर्थिक सहयोग देती है। एक साल बाद लक्ष्य को खिताब, सिंधु ने भी जीता दूसरा टाइटल यूरोप दौरे का आखिरी टूर्नामेंट हाइलो ओपन भारत के लिए यादगार रहा। लक्ष्य सेन ने पुरुष सिंगल्स का खिताब जीतकर करीब एक साल से चले आ रहे अपने खिताबी इंतजार को खत्म किया। सिंधु ने महिला सिंगल्स का खिताब जीता। यह इस साल उनका दूसरा खिताब था। सिंधु ने 2017 के बाद पहली बार एक साल में सुपर 500 या उससे बड़े स्तर के दो BWF वर्ल्ड टूर खिताब जीते। इस जीत से वर्ल्ड टूर फाइनल्स के लिए क्वालिफाई करने की उनकी संभावनाएं बेहतर हुईं और वे वर्ल्ड रैंकिंग में छठे स्थान पर पहुंच गईं। इससे पहले फ्रेंच ओपन के फाइनल में सिंधु को साउथ कोरिया की एन से-यंग से हार मिली थी। अस्मिता चालिहा ने उसी टूर्नामेंट में यामागुची को हराया था, जबकि अनमोल खरब हाइलो ओपन के सेमीफाइनल तक पहुंचीं। BWF टूर खिताब क्या है?
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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