5 नवंबर 2026, 11:27 PM
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बार-बार एक ही चैप्टर पढ़ती थी नीट छात्रा:सुसाइड से पहले लिखा था- मुझे लिखा OCD, डॉक्टर बोले- ये बीमारी नहीं इलाज संभव

प्रयागराज के झूंसी में सोमवार को NEET छात्रा रितु शर्मा ने गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। रितु ने अपने 8 पेज के सुसाइड नोट में लिखा था कि वह पिछले करीब चार साल से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) से परेशान थी। उसे पढ़ाई के दौरान बार-बार लगता था कि उसने कुछ ठीक से नहीं पढ़ा है। इस शक को दूर करने के लिए वह एक ही लाइन, पैराग्राफ और ले

बार-बार एक ही चैप्टर पढ़ती थी नीट छात्रा:सुसाइड से पहले लिखा था- मुझे लिखा OCD, डॉक्टर बोले- ये बीमारी नहीं इलाज संभव
स्रोत: dainik bhasker category
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प्रयागराज के झूंसी में सोमवार को NEET छात्रा रितु शर्मा ने गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। रितु ने अपने 8 पेज के सुसाइड नोट में लिखा था कि वह पिछले करीब चार साल से ऑब्सेसिव कंपल्सिव डिसऑर्डर (OCD) से परेशान थी। उसे पढ़ाई के दौरान बार-बार लगता था कि उसने कुछ ठीक से नहीं पढ़ा है। इस शक को दूर करने के लिए वह एक ही लाइन, पैराग्राफ और लेक्चर को बार-बार दोहराती थी। क्या OCD ऐसी बीमारी है, जिसमें इंसान अपनी सामान्य जिंदगी नहीं जी सकता? क्या बार-बार आने वाले विचारों और एक ही काम को दोहराने की मजबूरी से बाहर निकलना संभव नहीं है? इसे समझने के लिए दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने एक्सपर्ट से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… क्या है OCD, क्यों बार-बार आते हैं एक जैसे विचार? मनोचिकित्सक डॉ. राकेश पासवान के मुताबिक, OCD में दो तरह की समस्याएं होती हैं- ऑब्सेशन और कंपल्शन। उदाहरण के तौर पर किसी व्यक्ति को बार-बार लगता है कि उसके हाथ गंदे हैं। वह हाथ धोने के बाद भी संतुष्ट नहीं होता और दोबारा हाथ धोने लगता है। इसी तरह कुछ लोगों को दरवाजा, ताला या गैस बार-बार चेक करने, चीजें गिनने और हर काम एक खास तरीके से करने की मजबूरी महसूस होती है। कई बार व्यक्ति जानता है कि वह एक ही काम बार-बार कर रहा है और इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन मन में उठने वाले शक और बेचैनी के कारण खुद को रोक नहीं पाता। पढ़ाई में भी दिखते हैं OCD के लक्षण OCD का असर सिर्फ हाथ धोने या चीजों को बार-बार चेक करने तक सीमित नहीं रहता। पढ़ाई करने वाले बच्चों में भी इसके अलग-अलग लक्षण दिखाई दे सकते हैं। रितु ने भी अपने सुसाइड नोट में इसी तरह की परेशानी बताई थी। उसे लगता था कि अगर उसने किसी हिस्से को दोबारा नहीं पढ़ा तो वह गलत सीख जाएगी। इसी डर के कारण वह एक ही चीज को कई बार दोहराती थी। इस प्रक्रिया में उसका काफी समय निकल जाता था और पढ़ाई आगे नहीं बढ़ पाती थी। उसे लगता था कि वह दूसरे छात्रों से पीछे छूट रही है। धीरे-धीरे उसका आत्मविश्वास भी प्रभावित होने लगा। डॉक्टर बोले- एक ही काम में उलझ जाता है व्यक्ति डॉ. पासवान के मुताबिक, OCD से परेशान व्यक्ति कई बार ऐसे कामों में घंटों लगा देता है, जिनकी वास्तव में जरूरत नहीं होती। वह एक ही काम को बार-बार करता रहता है। इसका असर उसकी पढ़ाई, नौकरी और पारिवारिक जीवन पर भी पड़ सकता है। मसलन, कोई छात्र घंटों एक ही टॉपिक दोहराता रहता है। कोई व्यक्ति घर से निकलने के बाद बार-बार ताला चेक करता है। कुछ लोग चीजों को एक खास क्रम में रखने या हर काम बिल्कुल सही तरीके से करने में उलझे रहते हैं। लगातार ऐसा होने से व्यक्ति मानसिक तनाव और निराशा महसूस कर सकता है। कई मामलों में फ्रस्ट्रेशन और डिप्रेशन जैसे लक्षण भी सामने आ सकते हैं। OCD लाइलाज नहीं, सही इलाज से मिल सकती है राहत डॉ. पासवान का कहना है कि OCD का इलाज संभव है। समय पर मनोचिकित्सक से सलाह लेकर उपचार शुरू कराया जाए तो व्यक्ति की स्थिति में काफी सुधार हो सकता है। इसे ऐसी बीमारी नहीं समझना चाहिए, जिसके साथ पूरी जिंदगी परेशान रहना पड़े। इसमें मरीज की परेशानी को समझना सबसे जरूरी है। उसे यह कहकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए कि वह बेवजह सोचता है या जानबूझकर एक ही काम बार-बार करता है। कई बार मरीज खुद भी इस व्यवहार से परेशान होता है, लेकिन चाहकर भी इसे रोक नहीं पाता। परिवार को चाहिए कि उसकी बात सुने, परेशानी को समझे और विशेषज्ञ से इलाज कराने में सहयोग करे। इंटरनेट और AI की जानकारी को न मानें इलाज का विकल्प डॉ. पासवान ने मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता की कमी पर भी चिंता जताई। उनका कहना है कि कई बच्चे अपनी परेशानी के बारे में जानने के लिए इंटरनेट और AI टूल का सहारा लेते हैं। वहां मिली जानकारी को ही सही मान लेते हैं, जबकि हर व्यक्ति की समस्या और उसके लक्षण अलग हो सकते हैं। इंटरनेट पर अधूरी या गलत जानकारी मिलने से भ्रम बढ़ सकता है। कई बार बच्चे यह मानने लगते हैं कि उनकी बीमारी बहुत गंभीर है और वे कभी ठीक नहीं हो पाएंगे। ऐसी नकारात्मक सोच उनकी परेशानी बढ़ा सकती है। इसलिए इंटरनेट या AI से मिली जानकारी को बीमारी की पुष्टि या इलाज का विकल्प नहीं मानना चाहिए। मानसिक परेशानी के लक्षण दिखाई देने पर मनोचिकित्सक से सलाह लेना जरूरी है। बच्चों के व्यवहार में बदलाव दिखे तो माता-पिता रहें सतर्क डॉ. पासवान के मुताबिक, माता-पिता को बच्चों के व्यवहार पर नजर रखनी चाहिए। अगर बच्चा अचानक ज्यादा परेशान रहने लगे, किसी काम को बार-बार करने लगे या पढ़ाई में जरूरत से ज्यादा समय लगाने लगे तो इसे सामान्य आदत समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ……………………. ये खबर भी पढ़िए- NEET छात्रा का सुसाइड नोट- मेरा दिमाग मुझे डराता है:जिंदगी तबाह कर रहा; MBBS में सेलेक्शन के बाद भी गोली मारकर जान दी प्रयागराज में सुसाइड करने वाली NEET छात्रा रितु शर्मा (18) का 8 पेज का सुसाइड नोट कमरे में मिला है। रितु ने सोमवार को पिता की पिस्टल से खुद को गोली मारकर जान दे दी थी। सुसाइड नोट में उसने लिखा है- दिनभर परेशान करने वाले ख्याल मेरे दिमाग में आते हैं। मैं ढंग से पढ़ाई नहीं कर पा रही हूं। एक ही चीज को बार-बार दोहराती हूं। ऐसा नहीं करने पर मेरा दिमाग मुझे डराता है कि कुछ बुरा हो जाएगा। पढ़ें पूरी खबर
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