एक वक्त था जब त्योहारों की आहट होते ही लोग अपना पुराना फोन बदलकर नया फोन खरीदने के लिए एक्साइटेड हो जाते थे. लेकिन अब बढ़ती महंगाई और महंगे होते गैजेट्स ने लोगों का मन पूरी तरह बदल दिया है. आज के लोग बिना जरूरत पैसे खर्च नहीं करना चाहते और इसका सीधा असर देश के मोबाइल मार्केट पर देखने को मिल रहा है. मार्केट रिसर्च फर्म ओम्डिया की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक साल 2026 की तीसरी तिमाही यानी जुलाई से सितंबर के बीच भारत में स्मार्टफोन की बिक्री में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है.
हैरानी की बात यह है कि फेस्टिव सीजन की शुरुआत होने के बावजूद इस तिमाही में सिर्फ 3.58 करोड़ स्मार्टफोन ही बिके हैं. साल 2016 के बाद से यह किसी भी तीसरी तिमाही का सबसे खराब आंकड़ा है. इस भारी गिरावट में सबसे ज्यादा नुकसान पड़ोसी देश चीन की मोबाइल कंपनियों को उठाना पड़ा है, जबकि अमेरिकी कंपनी को भी तगड़ा झटका लगा है.
चीनी और अमेरिकी कंपनियों की टूटी कमर
भारतीय स्मार्टफोन बाजार में आई इस सुस्ती का सबसे बड़ा खामियाजा चीन के स्मार्टफोन ब्रांड्स को भुगतना पड़ा है, जो कभी बजट और मिड-रेंज सेगमेंट में एकछत्र राज करते थे. रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि जुलाई-सितंबर तिमाही में चीनी कंपनी Xiaomi की बिक्री 28 प्रतिशत तक लुढ़ककर महज 47 लाख यूनिट्स रह गई है. वहीं दूसरी बड़ी चीनी कंपनी Oppo को भी 24 प्रतिशत का तगड़ा नुकसान हुआ है और वह सिर्फ 49 लाख फोन ही बेच पाई.
चीन के ही ब्रांड Vivo ने जरूर थोड़ी मजबूती दिखाई और 64 लाख स्मार्टफोन बेचकर दूसरे नंबर की कुर्सी अपने नाम की. दूसरी तरफ अमेरिका की दिग्गज कंपनी Apple को भी प्रीमियम सेगमेंट में बड़ा झटका लगा है. एप्पल की बिक्री में 20 प्रतिशत की बड़ी गिरावट दर्ज की गई. हालांकि कंपनी 39 लाख आईफोन बेचकर टॉप-5 में बनी रही.
दक्षिण कोरियाई ब्रांड ने मारी बाजी
इन सबके बीच दक्षिण कोरिया की कंपनी Samsung को सबसे कम नुकसान हुआ. महज 1 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ सैमसंग ने 67 लाख स्मार्टफोन बेचे और 19 प्रतिशत मार्केट शेयर के साथ फिर से देश की नंबर वन का कंपनी का ताज पहन लिया.
फेस्टिव सीजन में क्यों ठंडा पड़ा मोबाइल बाजार?
अब सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि जिस सितंबर महीने में ऑनलाइन सेल और फेस्टिव ऑफर्स की भरमार होती है वहां अचानक इतनी बड़ी सुस्ती कैसे आ गई? ओम्डिया के प्रमुख विश्लेषक संयम चौरसिया के मुताबिक सितंबर का महीना आमतौर पर बड़ी ऑनलाइन सेल से पहले स्टॉक जमा करने के लिए बेहद अहम माना जाता है.
लेकिन इस बार बाजार की रफ्तार शुरू से ही काफी धीमी रही. इसकी सबसे बड़ी वजह यह रही कि चीनी और दूसरे विदेशी कंपनियों ने ऑनलाइन सेल को ध्यान में रखते हुए ज्यादा नए और आकर्षक मॉडल्स लॉन्च ही नहीं किए. इसके अलावा बाजार में किफायती यानी बजट फोन्स की उपलब्धता काफी सीमित रही.
आजकल कंपनियां महंगे 5G फोन्स पर ज्यादा फोकस कर रही हैं. जिससे आम आदमी के बजट वाले सस्ते फोन मार्केट से गायब होते जा रहे हैं. इसके साथ ही पूरे साल चलने वाले अलग-अलग ऑफर्स की वजह से फेस्टिव सेल का वह पुराना क्रेज और तगड़े डिस्काउंट का अंतर खत्म हो गया है जिसका लोग महीनों तक इंतजार करते थे.
यह भी पढ़ें: सर्दियों में किस तापमान पर चलाएं अपना फ्रिज? जान लें अपने काम की बात
फालतू पैसे खर्च नहीं करना चाह रहे ग्राहक
अगर ग्राउंड लेवल पर देखें तो भारतीय यूजर्स की सोच में एक बहुत बड़ा और प्रैक्टिकल बदलाव आया है. जिसने विदेशी कंपनियों का गणित बिगाड़ दिया है. पहले जहां लोग साल-डेढ़ साल में सिर्फ नया डिजाइन और थोड़ा बेहतर कैमरा देखकर फोन बदल लेते थे. वहीं अब वे एक ही फोन को तीन से चार साल तक आराम से चला रहे हैं. महंगाई के इस दौर में जब हर महीने घर का बजट संभालना एक चुनौती बन रहा हो तो लोग 20-25 हजार रुपये का नया फोन तभी खरीदना चाहते हैं जब पुराने फोन में कोई बड़ी खराबी आ जाए.
दूसरी तरफ स्मार्टफोन कंपनियों के पास भी इस वक्त दिखाने के लिए कोई बहुत बड़ा इनोवेशन नहीं है. नए लॉन्च होने वाले फोन्स में पुराने मॉडल के मुकाबले बस थोड़ा सा प्रोसेसर और डिजाइन बदलकर कीमतें बढ़ा दी जाती हैं. इसलिए ग्राहक अब फोन को लंब समय तक चलाने में ही फायदा देख रहा है.
यह भी पढ़ें: हर साल इतने मोबाइल और टैब हो रहे खराब, लगातार आ रहीं शिकायतें




