13 अक्टूबर 2026, 1:28 PM
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लखनऊ में NHM कर्मियों का बड़ा प्रदर्शन:परमानेंट करने की मांग को लेकर 75 जिलों के कर्मचारी जुटे, ईको गार्डन में धरना

लखनऊ में NHM कर्मी एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन कर रहे है। प्रदेश के सभी 75 जिलों से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर राजधानी के ईको गार्डन में जुटे हैं। कर्मचारी संविदा नौकरी को परमानेंट करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में लंबे समय से काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर फैसला नहीं हुआ है।

लखनऊ में NHM कर्मियों का बड़ा प्रदर्शन:परमानेंट करने की मांग को लेकर 75 जिलों के कर्मचारी जुटे, ईको गार्डन में धरना
स्रोत: dainik bhasker category
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लखनऊ में NHM कर्मी एक बार फिर बड़ा प्रदर्शन कर रहे है। प्रदेश के सभी 75 जिलों से कर्मचारी अपनी मांगों को लेकर राजधानी के ईको गार्डन में जुटे हैं। कर्मचारी संविदा नौकरी को परमानेंट करने की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे स्वास्थ्य सेवाओं में लंबे समय से काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी मांगों पर फैसला नहीं हुआ है। उनका कहना है कि मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रखेंगे। इस प्रदर्शन का आगाज 8 अक्टूबर को हुआ था। आज प्रदर्शन का 5वां दिन है और अब तक की सबसे ज्यादा भीड़ लखनऊ में मौजूद है। प्रदर्शन की 4 तस्वीरें देखिए… मांगों पर सुनवाई नहीं कर रही सरकार ANM नीतू पाठक ने बताया कि कर्मचारी 21 तारीख से धरना दे रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक को भी ANM के काम और उनकी भूमिका की जानकारी नहीं है। नीतू पाठक के मुताबिक, ANM जन्म से लेकर 16 साल तक के बच्चों के टीकाकरण की जिम्मेदारी संभालती हैं। इसके अलावा आभा आईडी बनाने, आयुष्मान कार्ड बनाने और ई-कवच पोर्टल पर जानकारी भरने समेत करीब 32 तरह के ऑनलाइन काम भी करती हैं। उन्होंने कहा कि ANM स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार काम कर रही हैं, लेकिन उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। कर्मचारियों की प्रमुख मांग समान काम के लिए समान वेतन देना और संविदा व्यवस्था खत्म कर कर्मचारियों को परमानेंट करना है। संविदा के पदों को खत्म कर परमानेंट करने की मांग हरदोई की ANM कुंती सिंह ने बताया समान कार्य समान वेतन हम लोगों को दिया जाए, संविदा प्रथा खत्म की जाए। जब हम लोग समान कार्य करते हैं, तो सरकार हम लोगों के साथ भेदभाव क्यों कर रही है? वही काम के लिए परमानेंट वालों को ₹60 हजार वेतन दिया जा रहा है, हम लोगों को ₹12,000 ही दिया जा रहा है। इसलिए हमारा यही स्वास्थ्य मंत्री जी से निवेदन है कि हम लोगों को समान कार्य समान वेतन दिया जाए। समान वेतन चाहिए, समान सुविधाओं की मांग कुशीनगर से आए अटल बिहारी कहते है कि हम लोगों की मांग यह है कि समान काम समान वेतन लागू हो। जब हम नियमित कर्मचारियों के सापेक्ष समान काम कर रहे हैं, तो हमें समान वेतन चाहिए, समान सुविधाएं चाहिए, यही हमारी प्रमुख मांग है। हम लोग 15 साल से हैं, यह 16वां साल हम लोगों का लगा हुआ है। पूरे पूरे उत्तर प्रदेश से लोग आए हैं, लगभग-लगभग लाखों की तादाद से ज्यादा यहां पर संख्या है। संविदा कर्मचारी बोले- परिवार चलाना मुश्किल गोरखपुर निवासी JNHM-NHM संविदा जिला महामंत्री अशोक कुमार पांडे ने कहा कि उनकी सबसे प्रमुख मांग समान काम-समान वेतन है। उन्होंने बताया कि संविदा MBBS डॉक्टरों को 40-45 हजार रुपये, जबकि स्थायी डॉक्टरों को डेढ़ से दो लाख रुपये वेतन मिलता है। इसी तरह संविदा ANM को 10 हजार, BPM को 40 हजार और HEO के बराबर काम करने वाले कर्मचारियों को 24 हजार रुपये मिलते हैं। उन्होंने कहा कि स्थायी और संविदा कर्मचारियों के वेतन में बड़ा अंतर है। महंगाई के दौर में 10 से 25 हजार रुपये में परिवार चलाना मुश्किल है। दूरदराज तैनाती के कारण कर्मचारियों को कमरे के किराये और आने-जाने पर भी खर्च करना पड़ता है। सम्मानजनक अधिकार देने की मांग मिर्जापुर के नर्सिंग ऑफिसर मोहन लाल ने कहा कि संविदा नर्सिंग ऑफिसर को समान काम के बावजूद 20 हजार रुपये वेतन मिलता है, जबकि स्थायी कर्मचारियों को करीब एक लाख रुपये मिलते हैं। OPD, IPD, इमरजेंसी, ICU और टीबी वार्ड में ड्यूटी करने के साथ संविदा कर्मचारी कोरोना काल में भी सेवाएं देते रहे, लेकिन उन्हें कोई अतिरिक्त लाभ नहीं मिला। मोहन लाल ने कहा कि समान वेतन और सम्मानजनक अधिकार देने की मांग की। आंदोलन के कारण टीबी मरीजों की भर्ती और डिलीवरी सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। इमरजेंसी सेवाएं जारी रखी गई हैं। कर्मचारी अपनी मर्जी से काम छोड़कर नहीं आए, बल्कि मांगों को लेकर मजबूरी में आंदोलन कर रहे हैं। इमरजेंसी ड्यूटी के साथ अन्य जगहों की भी जिम्मेदारी प्रदर्शन में आए डॉ. अफरोज आलम अंसारी ने कहा कि 2009 में उनकी नियुक्ति MBBS डॉक्टरों के साथ हुई थी और उस समय दोनों का ग्रेड पे 24 था। आज MBBS डॉक्टरों का वेतन करीब एक लाख रुपये हो गया है, जबकि उन्हें अब भी 51,375 रुपये मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे फील्ड वर्क, OPD और इमरजेंसी ड्यूटी के साथ खेल आयोजनों और मंत्रियों के कार्यक्रमों में भी जिम्मेदारी निभाते हैं। इसके बावजूद वेतन में बड़ा अंतर है। उनकी सरकार से मांग है कि समान काम के लिए समान वेतन दिया जाए। कोरोना काल में सेवाएं दी, कोई इंसेंटिव नहीं मिला भदोही के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात आयुष चिकित्सक डॉ. नीलेश कुमार जायसवाल ने कहा कि उनकी मांग नियमितीकरण या समान काम-समान वेतन की है। शासन की ओर से दी गई सभी जिम्मेदारियां वे MBBS डॉक्टरों की तरह पूरी तत्परता से निभाते हैं। कोरोना काल में भी सेवाएं दीं, लेकिन कोई इंसेंटिव या प्रशस्ति पत्र नहीं मिला। उन्होंने बताया कि आंदोलन में NHM के करीब 70 से 80 हजार कर्मचारी शामिल हैं। संघ के निर्देश तक कार्य बहिष्कार और धरना-प्रदर्शन जारी रहेगा।
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यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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