एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे को लेकर 10 अक्टूबर यानी शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी प्रोटेस्ट करेगी. इस प्रदर्शन देखते हुए दिल्ली पुलिस ने एक दिन पहले ही सारे बंदोबस्त कर लिए हैं. करीबन 30 हजार पुलिस और पैरामिलिट्री जवानों की तैनाती राजधानी दिल्ली में की गई है. इंटरनेट सर्विस सस्पेंड कर दी है. कई ट्रेनों को कैंसिल किया गया है. सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए दिल्ली पुलिस ने फ्लैग मार्च भी किया है. इसके अलावा 12 अक्टूबर तक अतिरिक्त बल यानी सीएपीएफ की कंपनियों की मौजूदगी दर्ज की जाएगी.
इसके अलावा दिल्ली और एनसीआर में सुरक्षा पहरा कड़ा किया गया है. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए संसद मार्ग पर बड़ी संख्या में बैरिकेड्स लगाए गए. उन्हें लोहे की जंजीरों से जोड़ा गया है. राजधानी से सटे गाजीपुर सीमा पर भारी सुरक्षाबल तैनात है. गाड़ियों की चेकिंग के बाद दिल्ली में एंट्री दी जा रही है. इधर, रात 9 बजे से अगले आदेश तक 57 मेट्रो स्टेशन को बंद रखा गया है. यह फैसला दिल्ली पुलिस के अनुरोध पर डीएमआरसी ने लिया है.
दिल्ली पुलिस ने नहीं दी है, प्रदर्शन की इजाजत
दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के प्रदर्शन को इजाजत नहीं दी है. प्रोटेस्ट साइट जंतर-मंतर पर BNS धारा 163 लागू की गई है. नियमों के उल्लंघन करने पर कार्रवाई करने की चेतावनी भी पुलिस महकमे की तरफ से जारी की गई है.
प्रदर्शन का असर रेल यात्रा तक, कई ट्रेन रद्द
सीजेपी के प्रदर्शन की वजह से रेल यात्रा पर गहरा असर पड़ा है. नई दिल्ली आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया गया है. एक तरफ विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मोर्चाबंदी कर रखी है, तो वहीं अब सीजेपी ने आंदोलन छेड़ने का ऐलान करके सरकार के लिए नई मुसीबत खड़ी कर दी गई है. होटलों में चेकिंग की जा रही है. पीजी संचालकों से सख्त तौर पर कहा गया है कि यहां रुकने वाले युवाओं को प्रदर्शन में न जाने दिया जाए.
नई दिल्ली में 4 किमी के दायरे में इंटरनेट बंद
इसके अलावा नई दिल्ली में 4 किमी के दायरे के भीतर इंटरनेट सर्विस को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. सीजेपी का कहना है कि सरकार उनके तेवर देखकर डर गई है. वहीं, पुलिस, मेट्रो, और रेलवे प्रशासन ने कहा है कि ये कदम ऐहतियात तौर पर उठाए गए हैं. वैसे इसका असर यह हुआ है कि जिसको इस प्रदर्शन के बारे में पता नहीं था, अब उसे भी पता चल गया है. जिस तरह के कदम दिल्ली पुलिस ने उठाए हैं, वो कोरोनाकाल में भी नहीं उठाए गए थे.
लाउडस्पीकर पर ऐलान, RAF की गाड़ियां मॉनिटरिंग रूम
प्रदर्शन शुरू होने से पहले जनपथ, कनॉट प्लेस, जंतर मंतर रोड सभी पर 3-4 लेयर बैरिकेड लगा दिए गए हैं. लाउडस्पीकर पर BNSS की धारा 163 का हवाला देते हुए इकट्ठा ना होने की चेतावनी दी जा रही है. साथ ही जगह जगह पर पोस्टर लगा कर लोगो को चेताया जा रहा है. दिल्ली के कनॉट प्लेस से संसद मार्ग की तरफ जाने वाली सड़क एक साइड से पूरी बंद है. पुलिस अफसरों की वर्दी पर बॉडीकैम लगे हैं. लाउडस्पीकर पर धारा 163 का ऐलान करके इकट्ठा ना होने की चेतावनी दी जा रही है.
जंतर मंतर की तरफ जाने वाली रोड बैरिकेड से बंद है. मीडिया को अंदर जाने की अनुमति है. रैपिड एक्शन फोर्स की गाड़ियां खड़ी है. प्राइवेट बस खड़ी है. RAF की गाड़ियो को मॉनिटरिंग रूम बनाया गया. इसमें सीसीटीवी की मॉनिटरिंग की जा रही है.
20 जुलाई के प्रदर्शन से सबक, सबसे बड़ी चुनौती क्या?
दिल्ली पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती इस वजह से है, क्योंकि 20 जुलाई को हुए सीजेपी के प्रदर्शन में भीड़ के हुजूम ने राजधानी में हल्लाबोल दिया था. प्रदर्शनकारियों की भीड़ संसद की तरफ कूच कर गई थी. पुलिस के लिए हालात कंट्रोल करना मुश्किल हो गया था. उस दौरान लाठीचार्ज जैसी कार्रवाई हुई. जिसके बाद हंगामा, उपद्रव और प्रदर्शन हुआ. पुलिस पर पैलेट गन तक चलाने के आरोप लगे. ऐसे में अब पुलिस नहीं चाहती कि वैसे हालात फिर से देश में बनें.
पुलिस ने अपनी दलील में क्या कहा है?
पुलिस को भान है कि जनता के गले उनकी दलीलें आसानी से नहीं उतरेगी, इस वजह से पुलिस की तरफ से सोशल मीडिया पर ओपन लेटर भी जारी किया गया है. इस लेटर की लाइन है कि फर्क सिर्फ यूनिफॉर्म का है, इंसानियत का नहीं. हालांकि, दिल्ली पुलिस सिर्फ आदेशों का पालन करती है.
पुलिस के मुताबिक, शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन नई दिल्ली में संवैधानिक संस्थानों और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों की सुरक्षा के साथ आम लोगों की सुविधा और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है. प्रशासन की तरफ से जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शनों का हवाला दिया.
पुलिस के अनुसार, एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति दी गई थी, लेकिन प्रदर्शन करीब एक महीने तक जारी रहा. पुलिस का दावा है कि इस दौरान 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और आपराधिक रिकॉर्ड वाले 2,000 से अधिक लोग प्रदर्शन में शामिल हुए. इस दौरान हिंसा की घटनाएं हुईं और झड़पों में निर्दोष छात्र भी घायल हुए.
दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के लिए पहले से अनुमति लेना लोकतांत्रिक अधिकारों के खिलाफ नहीं है. इससे प्रशासन को प्रदर्शन की जगह, अवधि और संभावित भीड़ की जानकारी मिलती है और ट्रैफिक, आपातकालीन सेवाओं तथा भीड़ प्रबंधन की तैयारी की जा सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने भी सार्वजनिक प्रदर्शनों से जुड़े कानूनी प्रावधानों का पालन करने के महत्व पर जोर दिया है.
पुलिस ने आयोजकों से अपील की कि वे प्रदर्शन में शामिल होने वाले लोगों को लागू कानूनी प्रावधानों और बिना अनुमति सभा करने पर होने वाली कानूनी कार्रवाई के बारे में जानकारी दें.
सुबह 5 बजे से शुरू होगा दिल्ली पुलिस का अरेंजमेंट
दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने जानकारी दी है कि अरेंजमेंट सुबह 5 बजे से लगना शुरू हो जाएगा. नई दिल्ली में जाने वाले सभी रास्तों पर भारी पुलिस बंदोबस्त होगा. पुलिस ने एहतियात के तौर पर संदिग्ध 200 से ज्यादा लोगों को डिटेन किया है, जिनको 10 अक्टूबर की शाम को छोड़ा जाएगा. इसमें सीजेपी और राजनीतिक लोग जुड़े हुए हैं.
पुलिस ने कहा-प्रतिबंध अस्थायी और एहतियाती
दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया कि फिलहाल लागू प्रतिबंध अस्थायी और एहतियाती हैं. इनका उद्देश्य भीड़ को नियंत्रित करना, अव्यवस्था रोकना और प्रदर्शनकारियों, स्थानीय निवासियों, दुकानदारों तथा राहगीरों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है. लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिलना चाहिए. साथ ही, यह सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है कि प्रदर्शन सुरक्षित तरीके से हो और शहर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित न हों.
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों लगाई फटकार?
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में हुई शुक्रवार को सुनवाई में कोर्ट ने कहा है कि जितनी जरूरत है, सिर्फ उतनी ही सख्ती बरती जाए. मेट्रो और ट्रेन रद्द करने पर दोबारा विचार हो. मेट्रों और सामान्य ट्रेन को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता है. कुछ पाबंदियां लगा सकते हैं, लेकिन पूरी तरह रोक नहीं. कोर्ट ने फटकार लगाने के अंदाज में कहा है कि जरूरत के मुताबिक, कदम उठाए जा सकते हैं. इसका मतलब ये नहीं की आप मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल करें.
कोर्ट की इस टिप्पणी का मतलब यही है कि सरकार या प्रशासन संतुलित कदम उठाएं. पाबंदियों से लोगों को परेशानी न हो. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले पर सरकार को दोबारा से विचार करने को कहा है. इधर, आम आदमी पार्टी भी सीजेपी के समर्थन में उतर आई है.

