8 नवंबर 2026, 1:08 AM
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Bundibugyo Virus: अफ्रीका में आया इबोला का नया वायरस, भारत पर क्या पड़ेगा असर?

Bundibugyo Virus Outbreak In Africa: अफ्रीका में बुंडीबुग्यो वायरस का इंफेक्शन लगातार बढ़ रहा है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसके अलावा केन्या और नाइजीरिया में भी दूसरे देशों

Bundibugyo Virus: अफ्रीका में आया इबोला का नया वायरस, भारत पर क्या पड़ेगा असर?
स्रोत: abp news world
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Bundibugyo Virus Outbreak In Africa: अफ्रीका में बुंडीबुग्यो वायरस का इंफेक्शन लगातार बढ़ रहा है. वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन यानी डब्ल्यूएचओ के अनुसार, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इस वायरस के मामले लगातार बढ़ रहे हैं. इसके अलावा केन्या और नाइजीरिया में भी दूसरे देशों से पहुंचे लोगों में इस बीमारी का इंफेक्शन मिला है.

20 अक्टूबर 2026 तक डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो के 8 प्रांतों में 9,704 लोगों में इस बीमारी की पुष्टि हुई थी. इनमें 4,687 लोगों की मौत हो चुकी है. यानी यहां इस बीमारी से मौत की दर 48.3 प्रतिशत रही. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कई लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो रही है. इससे पता चलता है कि मरीजों की समय पर पहचान करना और उन्हें सही ट्रीटमेंट देना बड़ी चुनौती बनी हुई है.

 भारत में अभी बुंडीबुग्यो वायरस का कोई केस मिला है?

भारत में अभी तक बुंडीबुग्यो वायरस का कोई पक्का केस नहीं मिला है. भारत में इबोला वायरस बीमारी का भी कोई पक्का केस सामने नहीं आया है. मई 2026 में बेंगलुरु में इसे लेकर चिंता जरूर हुई थी. युगांडा से भारत आई 28 साल की एक महिला को शरीर में हल्का दर्द था. उसे अस्पताल में अलग रखा गया और उसके सैंपल पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए. जांच में इबोला नहीं मिला.


 अफ्रीका में कहां फैल रहा है वायरस?

इस समय इस बीमारी का सबसे ज्यादा असर डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में है. डब्ल्यूएचओ को 5 मई 2026 को वहां के इटुरी प्रांत में इस बीमारी के बारे में जानकारी मिली थी. उस समय बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो रही थी और बीमारी का पता नहीं चल पाया था.

15 मई को 13 लोगों के खून के सैंपल की जांच की गई. इनमें 8 लोगों में बुंडीबुग्यो वायरस मिला. उसी दिन युगांडा की राजधानी कंपाला में कांगो से आए एक व्यक्ति में भी इस बीमारी का इंफेक्शन मिला. इसके बाद केन्या और नाइजीरिया में भी केस सामने आए. 6 अक्टूबर को केन्या में पहला केस मिला. यह व्यक्ति कांगो से युगांडा होते हुए केन्या पहुंचा था.


20 अक्टूबर तक केन्या में कुल 9 केस सामने आए. इनमें एक व्यक्ति की मौत हुई. बाकी 8 लोग पहले मरीज के संपर्क में आए थे. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, अभी केन्या में यह बीमारी बड़े स्तर पर लोगों के बीच फैलने के सबूत नहीं मिले हैं. 20 अक्टूबर को नाइजीरिया में भी एक केस सामने आया. यह मरीज युगांडा से नाइजीरिया पहुंचा था. उसे अलग रखा गया है और उसका ट्रीटमेंट चल रहा है. उसके इंफेक्शन की पूरी जानकारी जुटाई जा रही है.

 भारत में इबोला का कौन सा स्ट्रेन मिला है?

भारत में अभी तक इबोला वायरस बीमारी का कोई पक्का केस नहीं मिला है. इसलिए भारत में बुंडीबुग्यो समेत किसी भी इबोला स्ट्रेन के इंफेक्शन की पुष्टि नहीं हुई है. बुंडीबुग्यो इबोलावायरस इबोला वायरस की एक प्रजाति है. इसकी पहचान पहली बार 2007 में युगांडा के बुंडीबुग्यो जिले में हुई थी. यह वायरस फिलोवायरस परिवार से जुड़ा है.

 कितना खतरनाक है बुंडीबुग्यो वायरस?

बुंडीबुग्यो वायरस गंभीर बीमारी पैदा कर सकता है और इससे मौत भी हो सकती है. पहले हुए इसके प्रकोपों में 100 संक्रमित लोगों में से करीब 30 से 50 लोगों की मौत हुई थी. इस बार कांगो में 20 अक्टूबर तक मौत की दर 48.3 प्रतिशत रही है. डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, पिछले अपडेट के बाद 482 और लोगों की मौत हुई. इनमें 307 लोगों की मौत अस्पताल पहुंचने से पहले आसपास के इलाकों में हुई, जबकि 175 लोगों की मौत अस्पताल में ट्रीटमेंट के दौरान हुई.

 यह वायरस कैसे फैलता है?

यह वायरस किसी बीमार व्यक्ति के खून या शरीर से निकलने वाले दूसरे तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से फैल सकता है. किसी संक्रमित व्यक्ति की मौत के बाद उसके शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से भी इंफेक्शन हो सकता है. खून, मल और उल्टी जैसे इंफेक्शन तरल पदार्थों से गंदी हुई चीजों या जगहों को छूने से भी वायरस फैल सकता है. यह वायरस आसानी से हवा के जरिए फैलता है, ऐसा कोई सबूत नहीं है.

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 बुंडीबुग्यो वायरस के क्या संकेत हैं?

शुरुआत में बुखार, सिरदर्द और शरीर में दर्द हो सकता है. ये संकेत कई दूसरी बीमारियों जैसे भी लग सकते हैं. इसी वजह से शुरुआत में इस बीमारी को पहचानना मुश्किल हो सकता है. बीमारी बढ़ने पर उल्टी और दस्त हो सकते हैं. गंभीर मामलों में शरीर के अंदर और बाहर ब्लड फ्लो भी हो सकता है. इसी वजह से डब्ल्यूएचओ इस बीमारी पर नजर रखने, मरीजों की जल्दी पहचान करने और उन्हें समय पर ट्रीटमेंट देने पर जोर दे रहा है.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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