29 अक्टूबर 2026, 7:51 PM
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MLC रिजल्ट ने 2027 चुनाव से पहले बढ़ाई सियासी सरगर्मी:आगरा खंड में दोनों सीट पर पिछले MLC रिपीट, स्नातक पर भाजपा, शिक्षक पर सपा का कब्जा

आगरा खंड स्नातक एवं शिक्षक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने जिले की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। दोनों सीटों पर मौजूदा MLC के दोबारा जीतने से पिछले चुनाव का समीकरण कायम रहा। स्नातक सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि शिक्षक सीट सपा के खाते में गई। दोनों सीटों के नतीजे भाजपा और सपा के लिए अपने-अपने समर्थक वर्गों में पक

MLC रिजल्ट ने 2027 चुनाव से पहले बढ़ाई सियासी सरगर्मी:आगरा खंड में दोनों सीट पर पिछले MLC रिपीट, स्नातक पर भाजपा, शिक्षक पर सपा का कब्जा
स्रोत: dainik bhasker category
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आगरा खंड स्नातक एवं शिक्षक विधान परिषद चुनाव के नतीजों ने जिले की राजनीति में नई चर्चा शुरू कर दी है। दोनों सीटों पर मौजूदा MLC के दोबारा जीतने से पिछले चुनाव का समीकरण कायम रहा। स्नातक सीट पर भाजपा ने अपना कब्जा बरकरार रखा, जबकि शिक्षक सीट सपा के खाते में गई। दोनों सीटों के नतीजे भाजपा और सपा के लिए अपने-अपने समर्थक वर्गों में पकड़ का आकलन करने का आधार बनेंगे। इन नतीजों को 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव की राजनीति से जोड़कर भी देखा जा रहा है। हालांकि, MLC चुनाव का मतदाता वर्ग विधानसभा चुनाव से अलग होता है। इसलिए इन परिणामों को पूरे आगरा के जनमत का सीधा संकेत नहीं माना जा रहा। फिर भी, राजनीतिक दलों के संगठन, समर्थक वर्गों तक पहुंच और चुनावी प्रबंधन के लिहाज से नतीजे अहम हैं। आगरा की राजनीति पर क्या असर? 1. भाजपा के लिए स्नातक सीट बरकरार रखना अहम डा. मानवेंद्र प्रताप सिंह की जीत से भाजपा ने स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में अपना प्रतिनिधित्व बनाए रखा। पार्टी के लिए यह अपने समर्थक मतदाता वर्ग में पकड़ कायम रखने का संकेत है। हालांकि, शिक्षक सीट पर हार के बाद उसे इस निर्वाचन क्षेत्र में अपने प्रदर्शन की समीक्षा करनी होगी। 2. शिक्षक सीट पर सपा की जीत चर्चा में डा. आकाश अग्रवाल की जीत सपा के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने पिछली बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में यह सीट जीती थी और इस बार सपा प्रत्याशी के तौर पर जीत दर्ज की। इससे उनकी व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ के साथ शिक्षक वर्ग में सपा की भूमिका भी चर्चा में है। 3. 2027 से पहले दोनों दलों के सामने संगठन मजबूत करने की चुनौती भाजपा और सपा दोनों के लिए इन नतीजों से अपने-अपने समर्थक वर्गों तक पहुंच का आकलन करने का अवसर है। विधानसभा चुनाव में स्थानीय नेतृत्व, जातीय समीकरण, बूथ प्रबंधन और क्षेत्रीय मुद्दों की भूमिका अलग होगी। इसलिए एमएलसी चुनाव के नतीजों को विधानसभा चुनाव की जीत-हार का पूर्वानुमान नहीं माना जा सकता। 4. एक सीट भाजपा, दूसरी सपा के खाते में दोनों निर्वाचन क्षेत्रों के नतीजे आगरा खंड में अलग-अलग मतदाता समूहों की राजनीतिक पसंद को सामने लाते हैं। स्नातक सीट पर भाजपा और शिक्षक सीट पर सपा की जीत से यह स्पष्ट है कि दोनों दलों का प्रदर्शन निर्वाचन क्षेत्र के अनुसार अलग रहा। आगरा में भाजपा की स्थिति आगरा में भाजपा काफी मजबूत स्थिति में रही है। पिछले दो विधानसभा चुनाव (2022 और 2017) में भाजपा ने आगरा की सभी 9 सीटों पर जीत का परचम फहराकर विरोधियों का पसीना छुड़ा दिया। इससे पहले भी सपा के मुकाबले भाजपा आगरा में काफी मजबूत रही है। आगरा में भाजपा की स्थिति को प्वाइंटर में समझिये… अब आगरा में सपा की स्थिति जानिये हालांकि आगरा की सियासी जमीन सपा के लिए कभी मुफीद नहीं रही। पार्टी के गठन के बाद से अब तक आगरा की विधानसभा सीटों पर सपा प्रत्याशी सिर्फ 2 बार ही जीत दर्ज कर सके हैं। ज्यादातर चुनावों में पार्टी प्रत्याशी तीसरे या चौथे स्थान पर ही संघर्ष करते नजर आए हैं। पिछले दो विधानसभा चुनावों में जरूर कुछ सीटों पर सपा प्रत्याशी मुकाबले में दिखाई दिए। सिर्फ दो बार मिली जीत आगरा में कुल नौ विधानसभा सीटें हैं। इनमें से किसी भी सीट पर सपा अब तक अपने सियासी समीकरण मजबूत नहीं कर सकी है। 1993 और 2012 के विधानसभा चुनाव को छोड़ दें, तो पार्टी को किसी अन्य चुनाव में यहां जीत नहीं मिली। 1993 में एत्मादपुर से चंद्रभान मौर्य और 2012 में बाह विधानसभा सीट से अरिदमन सिंह चुनाव जीते थे। 2017 के चुनाव में आगरा में सपा+कांग्रेस की स्थिति 2022 के चुनाव में सपा+रालोद की स्थिति सपा+रालोद गठबंधन 5 सीटों पर 2022 के चुनाव में सपा+रालोद की स्थिति
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