केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में 71.13 लाख की 13 रिसर्च प्रोजेक्ट्स:DDU VC ने लिया जायजा, बोले- समाज के उपयोगी रिसर्च पर हो काम
दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज डिपार्टमेंट में शुक्रवार को कुलपति प्रो. केपी सिंह के सामने विभाग की पढ़ाई और रिसर्च गतिविधियों का पूरा ब्योरा पेश किया गया। इस दौरान वीसी ने दोनों विभागों की लैब्स का दौरा किया, वहां काम कर रहे छात्रों से बात की और आधुनिक मशीनों का जायजा लिया। प

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के केमिस्ट्री और डिफेंस एंड स्ट्रैटेजिक स्टडीज डिपार्टमेंट में शुक्रवार को कुलपति प्रो. केपी सिंह के सामने विभाग की पढ़ाई और रिसर्च गतिविधियों का पूरा ब्योरा पेश किया गया। इस दौरान वीसी ने दोनों विभागों की लैब्स का दौरा किया, वहां काम कर रहे छात्रों से बात की और आधुनिक मशीनों का जायजा लिया। प्रस्तुतीकरण के बाद वीसी ने शिक्षकों को सुझाव दिया कि रिसर्च सिर्फ कागजों तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसी रिसर्च हो जो आम जनता और समाज की समस्याओं को हल कर सके। बड़ी योजनाओं से आर्थिक मदद मिली
केमिस्ट्री डिपार्टमेंट की तरफ से विभागाध्यक्ष प्रो. निखिल कांत शुक्ला और डिफेंस डिपार्टमेंट के विभागाध्यक्ष प्रो. सतीश चंद्र पांडेय ने अपनी रिपोर्ट प्रजेंटेशन के माध्यम से वीसी के सामने रखी। उन्होंने बताया कि उसे पहले भी DST-FIST और UGC-SAP जैसी बड़ी योजनाओं से आर्थिक मदद मिल चुकी है और विभाग को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का दर्जा हासिल है। फिलहाल केमिस्ट्री डिपार्टमेंट में 71.13 लाख रुपये की बजट से 13 रिसर्च प्रोजेक्ट्स पर काम चल रहा है। लैब में छात्रों से की बात, मशीनों की जांची स्थिति
रिपोर्ट देखने के बाद कुलपति प्रो. सिंह ने दोनों विभागों की रिसर्च लैब्स का जायजा लिया। उन्होंने वहां काम कर रहे रिसर्च स्कॉलर्स से उनके विषयों और काम में हो रही प्रगति के बारे में बात की। साथ ही विभागों में मौजूद आधुनिक उपकरणों और उनके सही इस्तेमाल की स्थिति भी देखी। दूसरे संस्थानों के साथ मिलकर काम करने की सलाह
कुलपति ने कहा कि विभागों को अपनी रिसर्च का दायरा बढ़ाने के लिए देश के दूसरे बड़े शिक्षण और रिसर्च संस्थानों के साथ मिलकर काम करना चाहिए। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर के नए प्रोजेक्ट हासिल करने के लिए भी कोशिशें तेज करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में मौजूद संसाधनों का पूरा इस्तेमाल होना चाहिए ताकि संस्थान का नाम और मजबूत हो सके।
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