जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय (JMI) में छात्र संघ की बहाली के लिए छात्र पिछले कई दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं. छात्रों की मांगों को समजते हुए JMI प्रशासन ने सात सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है जो न केवल छत्रों की मांगों की समीक्षा बल्कि परिसर में सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए काम करेंगे.
इस बीच कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी विरोध कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे हैं. उन्होंने दावा किया कि जामिया प्रशासन प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बेहद क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर रहा है और छात्रों से मिलने से रोका गया. उन्होंने कमेटी के गठन को भी प्रदर्शन को टालमटोल करना बताया.
CM धामी ने पुलिस स्मृति दिवस पर शहीद जवानों को दी श्रद्धांजलि, परिजनों को किया#WATCH | दिल्ली | कांग्रेस सांसद इमरान प्रतापगढ़ी ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात पर कहा, "छात्र जामिया के अंदर बैठे हुए हैं और जिस तरह से जामिया प्रशासन आंदोलनरत छात्रों के साथ बिल्कुल बर्बरता का व्यवहार कर रहा है, गार्ड की वर्दी में गुंडे जा कर उन छात्रों को डरा रहे हैं, धमका रहे हैं। उनका आंदोलन तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। चार बच्चे पिछले 10 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे हुए हैं और उसमें से दो की तबीयत बहुत खराब है। मैं उनसे मिलने के लिए गया। मुझे न जाने देने के लिए इतनी बड़ी तादाद में उन्होंने बल बढ़ा दिया, सिपाही बढ़ा दिए, मार्ग अवरूद्ध करने का प्रयास किया... मैं बच्चों से मिला, उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली... उन बच्चों की सिर्फ एक मांग है कि छात्र यूनियन बहाल कीजिए। मुझे पता चला है कि जामिया प्रशासन ने एक चिट्ठी जारी की है जिसमें उन्होंने कहा है कि वे एक समिति गठित करने जा रहे हैं हालांकि ये केवल टाल-मटोल करने वाली बात है..."
— ANI_HindiNews (@AHindinews) October 21, 2026
'प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बेहद क्रूरतापूर्ण व्यवहार'
उन्होंने मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा, "छात्र जामिया परिसर के अंदर बैठे हैं. जामिया प्रशासन प्रदर्शनकारी छात्रों के साथ बेहद क्रूरतापूर्ण व्यवहार कर रहा है. सुरक्षा गार्ड की वर्दी पहने कुछ गुंडे अंदर जाकर छात्रों को डरा-धमका रहे हैं और उनके विरोध प्रदर्शन को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. चार बच्चे पिछले 10 दिनों से भूख हड़ताल पर हैं, और उनमें से दो की तबीयत बहुत खराब है. मैं उनसे मिलने गया था. मुझे उन तक पहुंचने से रोकने के लिए, प्रशासन ने भारी संख्या में अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी और पुलिस तैनात कर दी, और रास्ता रोकने की भी कोशिश की, लेकिन हम राहुल गांधी के सिपाही हैं हम उन तक पहुंच गए."
अलीगढ़ विश्वविद्यालय का दिया उदाहरण
उन्होंने आगे कहा, "मैंने छात्रों से मुलाकात की और उनका हाल-चाल जाना. उनकी बस एक ही मांग है: छात्र संघ को फिर से बहाल किया जाए. मुझे पता चला है कि जामिया प्रशासन ने एक पत्र जारी किया है, जिसमें कहा गया है कि वो एक समिति बनाना चाहते हैं, लेकिन यह केवल मामले को टालने की एक चाल है."
उन्होंने कहा कि जब अलीगढ़ विश्वविद्यालय में प्रदर्शन के छात्र संघ बहाल हुआ है तो आप क्यों नहीं सकते बहाल. आप छात्र राजनीति को क्यों लाठी से कूचलना चाहते हैं? आप क्यों नहीं समझते कि जब धर्मेंद्र प्रधान को छात्रों के आंदोलन के कारण इस्तीफा देना पड़ा. जामिया प्रशासन तानाशाही पर उतारूं न हो और छात्रों के आंदोलन को दबाने की कोशिश न करें. पूरी NSUI विंग छात्रों के साथ है. बर्बरता ये है कि जामिया प्रशासन ने मेडिकल टीम तक तैनात नहीं की है, बाहर से मेडिकल टीम स्थिति को देख रही है.
पूरा मामला क्या है?
बता दें कि छात्र 12 अक्टूबर 2026 से छात्र अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर विरोध में बैठे हैं. छात्रों की मुख्य मांग 'जामिया मिल्लिया इस्लामिया छात्र संघ' (JMI-SU) को बहाल करना है. इसके साथ ही लोकतांत्रिक तरीके से चुनाव की मांग भी की जा रही है. ये मांग आज की नहीं है बल्कि 20 सालों से उठ रही है. साल 2006 में छात्र संघ को भंग किया गया था क्योंकि चुनावों को लेकर अक्सर परिसर में छात्रों के बीच बार-बार हिंसक टकराव की स्थिति देखने को मिलती थी जिससे शैक्षणिक माहौल पर बुरा प्रभाव पड़ रहा था. यही नहीं तब तत्कालीन वाइस चांसलर (कुलपति) और कुछ अन्य शिक्षकों पर हमले की खबरें भी सामने आई थीं. स्थिति को बिगड़ते देख विश्वविद्यालय प्रशासन ने छात्र संघ ही भंग कर दिया. अब छात्रों की मांग को बढ़ता देख प्रशासन ने छात्र संघ के नए संविधान का मसौदा तैयार करने के लिए एक कमेटी का गठन कर दिया है. अब देखना ये होगा कि क्या इस बार छात्रों की मांग को मानी जाती है या नहीं.
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