जस्टिस वर्मा के खिलाफ याचिका खारिज, FIR नहीं होगी:कैश कांड : कोर्ट ने याचिकाकर्ता ने कहा आपके पास कुछ बेहतर करने को नहीं क्या
कैश कांड के आरोपों से घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा पर FIR दर्ज करने और CBI या SIT से जांच कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई से साफ इंकार करते हुए खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय पर ही सवाल उठा दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने याचिका पर

कैश कांड के आरोपों से घिरे जस्टिस यशवंत वर्मा पर FIR दर्ज करने और CBI या SIT से जांच कराने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी गई। दिल्ली हाईकोर्ट ने इस पर सुनवाई से साफ इंकार करते हुए खारिज कर दिया। दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय पर ही सवाल उठा दिया। हाईकोर्ट के जस्टिस अमित बंसल ने याचिका पर सुनवाई के दौरान इसे स्वीकार करने से इंकार करते हुए कहा मैं इसे एंटरटेन नहीं कर रहा हूं. यह एक तरह का वाइल्ड विच हंट है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि आपके पास करने के लिए इससे बेहतर कोई काम नहीं है क्या। कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिकार पर ही सवाल उठाया। कोर्ट ने कहा कि याचिका करने वाले के पास दूसरे बेहतर उपाय उपलब्ध थे। कोर्ट की तल्ख टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता ने याचिका वापस लेने और वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की छूट की गुजारिश की। इसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। सुप्रीम कोर्ट भी गया था मामला इससे पहले इसी मामले में सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका दाखिल हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने 7 अगस्त को याचिका खारिज कर दी थी। यह याचिका भी अधिवक्ता घनश्याम दयालु उपाध्याय ने ही दाखिल की थी। जानिये क्या है मामला यह मामला 14 मार्च 2025 का है। उस समय जस्टिस यशवंत वर्मा दिल्ली हाईकोर्ट के जज थे। उनके सरकारी आवास में आग लगने के बाद दमकलकर्मी आग बुझाने पहुंचे थे। इसी दौरान आवास के एक आउटहाउस में बड़ी मात्रा में जले हुए नोट मिलने की बात सामने आई थी। घटना के बाद तत्कालीन CJI संजीव खन्ना ने मामले की जांच के लिए तीन जजों की इन-हाउस कमेटी गठित की थी। कमेटी ने जांच के बाद मई 2025 में अपनी रिपोर्ट तत्कालीन CJI को सौंपी। रिपोर्ट में जस्टिस वर्मा की भूमिका को लेकर प्रथम दृष्टया जवाबदेही की बात कही गई थी। इसके बाद रिपोर्ट राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को भेजी गई। इसके बाद जांच के दौरान जस्टिस वर्मा को दिल्ली हाईकोर्ट से इलाहाबाद हाईकोर्ट वापस भेज दिया गया था। उनका न्यायिक काम भी वापस ले लिया गया था। बाद में मामले से जुड़े दस्तावेज, फोटो और वीडियो सुप्रीम कोर्ट की ओर से सार्वजनिक किए गए। जस्टिस वर्मा ने इन-हाउस जांच और उन्हें हटाने की सिफारिश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर थी। इसके बाद लोकसभा अध्यक्ष ने उनके खिलाफ हटाने की प्रक्रिया के तहत तीन सदस्यीय जांच कमेटी गठित की। जस्टिस वर्मा ने इस कमेटी के गठन को भी सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी लेकिन उनकी याचिका खारिज हो गई। इसके बाद लोकसभा में जस्टिस वर्मा के खिलाफ हटाने की प्रक्रिया के तहत जांच आगे बढ़ी। इसी दौरान उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
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