दिव्या मित्तल के चुनावी अभियान को अमिताभ ठाकुर का समर्थन:गठबंधन के भी संकेत दिए, कहा–जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही की राजनीति जरूरी
पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद उन्हें राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने दिव्या मित्तल की ओर से राजनीतिक दल ‘जननीति भारत’ के गठन और चुनाव लड़ने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मिर्जापुर में उनके चुनावी अभियान को समर्थन देने

पूर्व आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल के मिर्जापुर से विधानसभा चुनाव लड़ने के ऐलान के बाद उन्हें राजनीतिक समर्थन मिलने लगा है। आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने दिव्या मित्तल की ओर से राजनीतिक दल ‘जननीति भारत’ के गठन और चुनाव लड़ने के फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने मिर्जापुर में उनके चुनावी अभियान को समर्थन देने की बात कही है। अमिताभ ठाकुर ने कहा कि दिव्या मित्तल का मिर्जापुर से चुनाव लड़ने का फैसला क्षेत्र की राजनीति में नई पहल साबित हो सकता है। आजाद अधिकार सेना उनके इस राजनीतिक प्रयास का स्वागत करती है और उनके चुनावी अभियान के प्रति समर्थन व्यक्त करती है। साझा उद्देश्यों को पूरा करने साथ जरूरी उन्होंने कहा कि देश में ऐसी राजनीति की जरूरत है, जिसमें जनहित, पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक मूल्यों को प्राथमिकता मिले। अमिताभ ठाकुर ने उम्मीद जताई कि इन साझा उद्देश्यों के आधार पर आजाद अधिकार सेना और जननीति भारत के बीच भविष्य में राजनीतिक साझेदारी विकसित हो सकती है। उन्होंने कहा कि जनहित और जवाबदेह शासन के प्रति साझा प्रतिबद्धता दोनों संगठनों के बीच रचनात्मक सहयोग का आधार बनेगी। एक दिन पहले ही दिव्या मित्तल ने राजनीतिक पार्टी बनाई दिव्या मित्तल ने मिर्जापुर में 15 अक्टूबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी जननीति भारत के गठन का ऐलान किया। इसके साथ ही उन्होंने खुद मिर्जापुर सदर सीट से चुनाव लड़ने की घोषणा की। अभी इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। दिव्या मित्तल ने नए तरीके से राजनीति करने का संकेत दिया है। आजाद अधिकार सेना का मुख्य एजेंडा भ्रष्टाचार मुक्त शासन व्यवस्था बनाने का है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि दोनों दलों में रणनीतिक गठजोड़ बन सकता है। कौन हैं दिव्या मित्तल दिव्या मित्तल मूलत: हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली हैं। IIT दिल्ली से बीटेक और IIM बेंगलुरु से MBA किया। पति गगनदीप सिंह ढिल्लों 2011 बैच के अधिकारी रहे हैं। वह इंडियन ट्रेड सर्विस में काम कर चुके हैं। उन्होंने 2022 में इस्तीफा दिया था नौकरी में आने से पहले दिव्या मित्तल लंदन में जेपी मॉर्गन में और उनके पति सिटीग्रुप में काम करते थे। बाद में दोनों भारत लौट आए और सिविल सेवा में आए। उनकी दो बेटियां हैं। उनके नाम अद्विका ढिल्लों और अव्याना ढिल्लों हैं। UPSC परीक्षा पास करने के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश कैडर मिला। उन्होंने मिर्जापुर, देवरिया और संतकबीरनगर समेत कई जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं। मिर्जापुर की जिलाधिकारी रहते हुए वह खासा चर्चा में आई थीं। तब उन्होंने लहुरियादह जैसे पहाड़ी गांव में पाइप से पेयजल पहुंचाया था। दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को IAS से इस्तीफा दिया। 29 सितंबर को उन्होंने राजनीति में आने की घोषणा की थी। 15 अक्टूबर 2026 को उन्होंने अपनी पार्टी का ऐलान किया और 2027 के विधानसभा चुनाव में मिर्जापुर सदर सीट से लड़ने की घोषणा की। उनके तीन प्रमुख वादे हैं— राजनीति में एंट्री के बाद क्या–क्या चुनौती दिव्या मित्तल की पहचान मुख्य रूप से प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर रही है। मिर्जापुर में उनके कार्यकाल के कारण वहां उनकी पहचान है। अब वह इसी अनुभव को राजनीतिक मंच पर ले जाने की कोशिश कर रही हैं। सरकारी व्यवस्था के भीतर काम करने के बाद अब वह नीतियां बनाने और शासन को जवाबदेह बनाने की बात कर रही हैं। पूर्व में जिलाधिकारी रह चुकीं दिव्या मित्तल ने इसी जिले की सदर सीट से चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। ‘जननीति भारत’ को चुनाव तक संगठन, स्थानीय नेतृत्व और बूथ स्तर पर नेटवर्क खड़ा करना होगा। यह उसके लिए बड़ी चुनौती होगी।
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