पटना की रुकमणि को मिला जीविका का सहारा, पति से सीखा हुनर; बन गई मूर्तिकार
Jeevika Didis Success Story: कभी दिन घर के कामकाज में गुजरता था. झाड़ू-पोछा से लेकर गोबर-गोइठा बनाने तक, यही सब रुक्मणी की रोज की जिंदगी थी. शादी के बाद जब ससुराल आई तो पति को पत्थर पर छेनी-हथौड़ी चलाते देखा और धीरे-धीरे वही हुनर खुद भी सीख लिया. आज उन्हीं हाथों से गणेश, हनुमान, महादेव और बुद्ध की मूर्तियां आकार लेती हैं. गया के पत्थरकट्टी गांव की

Jeevika Didis Success Story: कभी दिन घर के कामकाज में गुजरता था. झाड़ू-पोछा से लेकर गोबर-गोइठा बनाने तक, यही सब रुक्मणी की रोज की जिंदगी थी. शादी के बाद जब ससुराल आई तो पति को पत्थर पर छेनी-हथौड़ी चलाते देखा और धीरे-धीरे वही हुनर खुद भी सीख लिया. आज उन्हीं हाथों से गणेश, हनुमान, महादेव और बुद्ध की मूर्तियां आकार लेती हैं. गया के पत्थरकट्टी गांव की रुक्मणी कुमारी की जिंदगी में एक और बड़ा बदलाव तब आया, जब वह जीविका से जुड़ीं और 10 हजार रुपये की शुरुआती मदद से अपने काम को आगे बढ़ाया. अपनी बदली जिंदगी को वह एक ही वाक्य में कहती हैं, ‘जीविका हम लोग के जिया दिया है भैया.’
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