प्रयागराज में अखिलेश का ‘मिशन जेन-जी’ धीमा पड़ा:युवाओं के आंदोलनों में नहीं दिख रहा सपा का स्थानीय नेतृत्व
प्रयागराज में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जून में प्रयागराज से युवाओं और पहली बार वोट देने वाले जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की मुहिम का संदेश दिया था। उनके दो दिवसीय दौरे में युवाओं से संवाद भी हुआ और पार्टी ने संगठन को इस वर्ग के बीच सक्रिय करने का संकेत दिया। लेकिन करीब तीन महीने बाद स्थानीय संगठन की भूमिक

प्रयागराज में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने जून में प्रयागराज से युवाओं और पहली बार वोट देने वाले जेन-जी को पार्टी से जोड़ने की मुहिम का संदेश दिया था। उनके दो दिवसीय दौरे में युवाओं से संवाद भी हुआ और पार्टी ने संगठन को इस वर्ग के बीच सक्रिय करने का संकेत दिया। लेकिन करीब तीन महीने बाद स्थानीय संगठन की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं। प्रयागराज में सपा का संगठन महानगर, गंगापार और यमुनापार की तीन इकाइयों में बंटा है। इस दौरान छात्रों और प्रतियोगी युवाओं से जुड़े कई मुद्दों पर आंदोलन हुए। इनमें टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों का आंदोलन भी शामिल रहा। पार्टी के कुछ जनप्रतिनिधि इन आंदोलनों में पहुंचे, लेकिन स्थानीय संगठन के प्रमुख पदाधिकारियों की मौजूदगी उतनी नजर नहीं आई। इससे पार्टी के भीतर ही संगठन की सक्रियता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। प्रयागराज में सपा का ढांचा तीन सांगठनिक इकाइयों महानगर, गंगापार और यमुनापार में बंटा हुआ है। यमुनापार के अध्यक्ष का निधन हो चुका है और वहां के लिए युवा चेहरे की तलाश है। उसी दौरान अन्य अब दोनों मोर्चों पर भी फेरबदल के आसार हैं। अखिलेश के जाते ही ठप पड़ी मुहिम 28 और 29 जून को दो दिवसीय प्रयागराज दौरे पर आए अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को युवाओं और पहली बार वोट देने वाले 'जेन-जी' के बीच पैठ बनाने का गुरुमंत्र दिया था। युवाओं के प्रति पार्टी का एजेंडा भी स्पष्ट किया था। उनके आगमन पर युवाओं में भारी उत्साह देखा गया था और उस दौरान तमाम नए चेहरे पार्टी से जुड़े। हालांकि, शीर्ष नेतृत्व की रवानगी के बाद स्थानीय संगठन ने इस पूरे अभियान को ठंडे बस्ते में डाल दिया। युवाओं के आंदोलनों से नदारद दिखा स्थानीय नेतृत्व बीते तीन महीनों में प्रयागराज में टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों से लेकर कई प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर बड़े आंदोलन हुए। राष्ट्रीय पटल पर गूंजे इन मुद्दों के दौरान सपा के शीर्ष जिला पदाधिकारी जमीन से नदारद दिखे। महानगर अध्यक्ष इफ्तिखार हुसैन और गंगापार अध्यक्ष अनिल यादव युवाओं के इन संघर्षों में कंधे से कंधा मिलाकर खड़े होना तो दूर, धरना स्थलों पर झांकने तक नहीं पहुंचे। जनप्रतिनिधियों का सहारा संगठन की इस नाकामी के बीच सपा एमएलसी डॉ. मानसिंह यादव कभी-कभार छात्रों का हौसला बढ़ाने पहुंचे। वहीं, कौशांबी से सपा सांसद पुष्पेंद्र सरोज ने जब टीजीटी-पीजीटी अभ्यर्थियों के बीच पहुंचकर सरकार को घेरा, तब शासन हरकत में आया और युवाओं की मांगें मानी गईं। यमुनापार में नए चेहरे की तलाश, बाकी पर बदलाव की तैयारी
यमुनापार इकाई के जिलाध्यक्ष पप्पू लाल निषाद के हाल ही में हुए दुखद निधन के बाद से वहां नए अध्यक्ष के नाम का ऐलान होना बाकी है। सूत्रों के मुताबिक सपा आलाकमान अब यमुनापार के नए जिलाध्यक्ष की घोषणा के साथ ही प्रयागराज के पूरे सांगठनिक ढांचे का री-स्ट्रक्चरिंग (पुनर्गठन) करने की तैयारी में है। महानगर और गंगापार अध्यक्षों को हटाकर युवाओं को साधने वाले आक्रामक चेहरों को कमान सौंपी जा सकती है। प्रयागराज संगठन पर लटकी तलवार
प्रयागराज संगठन की इस सुस्ती की विस्तृत रिपोर्ट आलाकमान और अखिलेश यादव तक पहुंच चुकी है। अखिलेश पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि संगठन में कोई भी ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। हाल ही में कम सक्रियता और उम्मीदों पर खरा न उतरने के कारण अखिलेश यादव ने अयोध्या, बलिया, उन्नाव, बांदा, पीलीभीत और नोएडा के जिलाध्यक्षों को एक झटके में बदल दिया था।
प्रयागराज में छात्रों और युवाओं की भारी तादाद को देखते हुए यह क्षेत्र सपा की भावी राजनीति के लिए बेहद अहम है। ऐसे में आलाकमान की सीधी नजर यहां के घटनाक्रम पर है। पूरी संभावना है कि यमुनापार के नए अध्यक्ष के ऐलान के साथ ही महानगर और गंगापार नेतृत्व में बदलाव किया जा सकता है, तब प्रयागराज सपा को युवा चेहरा मिल सकता है।
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