1 नवंबर 2026, 6:29 PM
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बैंकों में गड़बड़ियों पर जागी सरकार, बनाया हाई लेवल पैनल, 6 महीने में देगा रिपोर्ट

देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका काफी अहम मानी जाती है. ऐसे में सरकार अब इस क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने की दिशा में काम कर रही है. इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा

बैंकों में गड़बड़ियों पर जागी सरकार, बनाया हाई लेवल पैनल, 6 महीने में देगा रिपोर्ट
स्रोत: abp news world
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देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए बैंकिंग व्यवस्था की भूमिका काफी अहम मानी जाती है. ऐसे में सरकार अब इस क्षेत्र को भविष्य की जरूरतों के हिसाब से तैयार करने की दिशा में काम कर रही है.

इसी कड़ी में केंद्र सरकार ने बैंकिंग सेक्टर की मौजूदा व्यवस्था की समीक्षा करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया है. इस कमेटी की जिम्मेदारी भारतीय बैंकों को अधिक सक्षम बनाने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप सुधारों का सुझाव देना होगा.

बैंकिंग नियमों और कामकाज की होगी समीक्षा

समिति का एक प्रमुख काम भारत में बैंकों के मौजूदा कामकाज और वित्तीय नियमों का आकलन करना होगा. इसके तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनाई जा रही बेहतर बैंकिंग प्रक्रियाओं का अध्ययन किया जाएगा. साथ ही यह देखा जाएगा कि उनमें से किन तरीकों को भारतीय परिस्थितियों के अनुसार लागू किया जा सकता है.

पैनल कमर्शियल बैंकों के साथ क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRBs) और सहकारी बैंकों से जुड़े कानूनी और नियामकीय नियमों की भी समीक्षा करेगा. इसका उद्देश्य बैंकिंग प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना और ग्राहकों तथा कारोबारियों के लिए बैंकिंग सेवाओं को आसान करना है.

सुरेश एन. पटेल को सौंपी गई कमेटी की कमान

वित्त मंत्रालय की ओर से गठित इस समिति का नाम 'हाई लेवल कमेटी ऑन बैंकिंग फॉर विकसित भारत' रखा गया है. इसकी अध्यक्षता पूर्व केंद्रीय सतर्कता आयुक्त सुरेश एन. पटेल करेंगे. समिति में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के डिप्टी गवर्नर शिरीष चंद्र मुर्मू, इंडियन बैंक की पूर्व एमडी और सीईओ पद्मजा चुंदुरू तथा RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर एन. एस. विश्वनाथन को सदस्य बनाया गया है.

इसके अलावा वित्तीय सेवा विभाग में बैंकिंग से जुड़े संयुक्त सचिव समिति के सदस्य सचिव होंगे. इस पैनल को अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए छह महीने का समय दिया गया है. इसका गठन वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा बजट 2026-27 में की गई घोषणा के बाद किया गया है.

AI और साइबर सुरक्षा भी एजेंडे में शामिल

बदलती तकनीक को देखते हुए बैंकिंग सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डिजिटल इनोवेशन को बढ़ावा देना भी समिति के काम का हिस्सा होगा. पैनल इस बात का रोडमैप तैयार करेगा कि बैंक नई तकनीकों को किस तरह अपना सकते हैं. साथ ही डिजिटल बैंकिंग से जुड़े साइबर खतरों को रोकने के लिए सुरक्षा उपायों पर भी सुझाव दिए जाएंगे.

इसके अलावा बैंकों में कुशल कर्मचारियों की भर्ती, प्रशिक्षण और उनकी क्षमता बढ़ाने से जुड़े पहलुओं पर भी विचार किया जाएगा, ताकि तकनीकी बदलावों के साथ बैंकिंग क्षेत्र का कार्यबल भी तैयार हो सके.

प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कर्ज देने की व्यवस्था भी होगी जांच के दायरे में

समिति प्रायोरिटी सेक्टर लेंडिंग और लीड बैंक स्कीम की उपयोगिता का भी मूल्यांकन करेगी. इसके जरिए यह समझने की कोशिश होगी कि किसानों, छोटे कारोबारियों और अन्य जरूरतमंद क्षेत्रों तक कर्ज पहुंचाने की मौजूदा व्यवस्था कितनी प्रभावी है. पैनल यह भी देखेगा कि बदलती आर्थिक जरूरतों के अनुसार ऋण वितरण को अधिक पारदर्शी, संतुलित और बेहतर बनाया जा सकता है या नहीं.

कुल मिलाकर, सरकार का यह कदम भारतीय बैंकिंग सिस्टम को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है. समिति की सिफारिशों के आधार पर आने वाले समय में बैंकिंग नियमों, तकनीक, पूंजी और कर्ज वितरण से जुड़े बदलावों का रास्ता तैयार हो सकता है.

बैंकों की पूंजी और कर्ज देने की क्षमता पर रहेगा जोर

कमेटी वित्तीय क्षेत्र की भविष्य की पूंजी संबंधी जरूरतों का भी आकलन करेगी. इसमें बैंक, डेवलपमेंट फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की फंडिंग जरूरतों को शामिल किया जाएगा. समिति यह सुझाव देगी कि इन संस्थानों को लंबे समय तक पर्याप्त पूंजी उपलब्ध कराने के लिए कौन से विकल्प अपनाए जा सकते हैं.

इसके अलावा कारोबारियों को मिलने वाली पूंजी की लागत में अंतर का अध्ययन भी किया जाएगा. सरकार चाहती है कि ऐसे नीतिगत सुझाव सामने आएं, जिनसे निजी निवेश को बढ़ावा मिले और देश में आर्थिक गतिविधियों को गति मिल सके.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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