बच्चों के लिए दूध या न्यूट्रिशन प्रोडक्ट खरीदते समय माता-पिता अक्सर पैकेट पर लिखी बातों पर भरोसा करते हैं. कोई प्रोडक्ट आसानी से पचने का दावा करता है, तो कोई बच्चों की इम्यूनिटी को सपोर्ट करने की बात कहता है. लेकिन क्या पैकेट पर लिखे इन दावों के पीछे वैज्ञानिक सबूत भी हैं? इसी सवाल पर अब फूड सेफ्टी रेगुलेटर FSSAI ने नेस्ले इंडिया को नोटिस जारी किया है.
मामला कंपनी के दो प्रोडक्ट नेस्ले लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर और नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 से जुड़ा है. FSSAI ने इन प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग और एड में किए गए कुछ दावों पर सवाल उठाते हुए कंपनी से सबूत मांगे हैं. बता दें कि सिर्फ सबूत मांगने से प्रोडक्ट पर प्रतिबंध नहीं लग जाता है और ना ही उसके नुकसानदेह होने का फैसला लिया गया है.
लैक्टोजेन पर क्यों उठे सवाल?
FSSAI के मुताबिक, नेस्ले लैक्टोजेन प्रो 1 पाउडर की पैकेजिंग और एड में दावा किया गया कि इसमें व्हे प्रोटीन है, जो दूध के प्रोटीन का हिस्सा है और आसानी से पच जाता है.
रेगुलेटर ने इसी दावे को लेकर नेस्ले से वैज्ञानिक सबूत मांगे हैं. कंपनी को ये बताना होगा कि प्रोडक्ट में मौजूद व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने की बात के समर्थन में उसके पास क्या सबूत हैं. FSSAI ने व्हे प्रोटीन की मौजूदगी पर ही सवाल नहीं उठाया है, बल्कि उसे आसानी से पचने वाला बताने के दावे का आधार भी मांगा है.
नैन के किस दावे पर आपत्ति?
दूसरा मामला नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1 से जुड़ा हुआ है. इसके पैकेट और प्रचार सामग्री में दावा किया गया कि इसमें मौजूद 5 HMOs सामान्य इम्यून सिस्टम को सपोर्ट करने में मदद करते हैं. HMOs, मां के दूध में पाए जाने वाले खास प्रकार के कार्बोहाइड्रेट होते हैं. लेकिन किसी प्रोडक्ट में इनकी मौजूदगी बताना और उससे जुड़ा स्वास्थ्य लाभ होने का दावा करना अलग-अलग बातें हैं.
FSSAI का कहना है कि इम्यूनिटी से जुड़ा ये दावा बताता है कि प्रोडक्ट किसी खास शारीरिक स्थिति में मदद करता है. इस तरह के दावों की अनुमति नियमों के तहत होनी चाहिए. इसी वजह से उसने इस दावे पर आपत्ति जताई है. नैन एक्सेला पर भी व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने से जुड़ा दावा पाया गया, जिसके लिए कंपनी से वैज्ञानिक सबूत मांगे गए हैं.
नेस्ले ने क्या कहा?
नेस्ले इंडिया के प्रवक्ता ने कहा कि FSSAI की हालिया पोस्ट में उन्हीं मुद्दों का जिक्र है, जिन्हें नियामक ने 18 सितंबर को उठाया था. कंपनी के मुताबिक, वो इन मामलों पर अपना जवाब पहले ही FSSAI को सौंप चुकी है. मतलब कंपनी ने अपना पक्ष रख दिया है, जबकि नियामक ने दावों को लेकर सवाल उठाए हैं.
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