बिना जुताई आलू की खेती, धान के पुआल गोबर खाद से जीरो टिलेज मॉडल, प्रति कट्ठा 1200 रु बचत, उपज 20% ज्यादा
Zero tillage potato cultivation: बिहार में धान की हार्वेस्टिंग के बाद खेत में बचे पुआल का उपयोग करके, खेतों को बिना जुताई आलू की खेती करना किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प हो सकता है. इस तकनीक में धान की कटाई के बाद खेत की मिट्टी को बार-बार जोतने के बजाय, नमी वाली जमीन पर आलू के बीज कंद रखकर घरों से निकलने वाले गनौरा यानि गोबर खाद और धान के पुआल से

Zero tillage potato cultivation: बिहार में धान की हार्वेस्टिंग के बाद खेत में बचे पुआल का उपयोग करके, खेतों को बिना जुताई आलू की खेती करना किसानों के लिए एक उपयोगी विकल्प हो सकता है. इस तकनीक में धान की कटाई के बाद खेत की मिट्टी को बार-बार जोतने के बजाय, नमी वाली जमीन पर आलू के बीज कंद रखकर घरों से निकलने वाले गनौरा यानि गोबर खाद और धान के पुआल से ढक दिया जाता है. इस मॉडल को जीरो टिलेज श्रीविधि प्राकृतिक खेती कहा जाता है. इससे किसानों को कई तरह के फायदे मिलते हैं और कम लागत में अधिक पैदावार होता है.
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