10 अक्टूबर 2026, 4:03 PM
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मथुरा में सांझी महोत्सव:श्रीकृष्ण लीलाओं का हुआ मंचन, 40 छात्राओं ने किया परफॉर्म

मथुरा में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रसखान एवं ताज बीबी समाधि परिसर में आयोजित सांझी महोत्सव-2026 में ब्रज की प्राचीन लोककला के विविध रूप दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। पांच दिवसीय महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को सांझी के माध्यम से विभिन्न कलात्मक रूपों में प्रस्तुत

मथुरा में सांझी महोत्सव:श्रीकृष्ण लीलाओं का हुआ मंचन, 40 छात्राओं ने किया परफॉर्म
स्रोत: dainik bhasker category
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मथुरा में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद और जीएलए विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रसखान एवं ताज बीबी समाधि परिसर में आयोजित सांझी महोत्सव-2026 में ब्रज की प्राचीन लोककला के विविध रूप दर्शकों को आकर्षित कर रहे हैं। पांच दिवसीय महोत्सव में भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को सांझी के माध्यम से विभिन्न कलात्मक रूपों में प्रस्तुत किया गया है। पोर्ट्रेट पर बनी सांझी, पानी पर तैरती कलाकृतियां और गोबर से तैयार पारंपरिक सांझी विशेष आकर्षण बनी हुई हैं। महोत्सव में सांझी कला का अवलोकन करने उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र अपनी पत्नी और परिषद की मुख्य कार्यपालक अधिकारी लक्ष्मी नागप्पन के साथ पहुंचे। वृंदावन के कलाकार रसिक वल्लभ गोस्वामी ने सांझी निर्माण की परंपरा और इसकी विशेषताओं पर प्रकाश डाला। वृंदावन के चित्रकार रसिक बल्लभ गोस्वामी की पानी पर तैरती सांझी ने दर्शकों का ध्यान खींचा। चित्रकार विश्वजीत और उनके साथी कलाकारों ने भी अपनी कलाकृतियों के माध्यम से कला का प्रदर्शन किया। धौलीप्याऊ निवासी सेवानिवृत्त प्राचार्य उमा ने पोर्ट्रेट पर भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को उकेरा है। मिर्जापुर की चित्रकार खुशबू और बलदेव पब्लिक स्कूल की छात्राओं की सांझी रचनाएं भी दर्शकों को पसंद आ रही हैं। दक्ष एजुकेशन इंस्टीट्यूट की छात्राओं की सांझी, कार्ष्णि इंटर कॉलेज के विद्यार्थियों की रंगोली और आगरा की सुनीता व अनुष्का तथा गोकुल की लक्ष्मी द्वारा गोबर से बनाई गई पारंपरिक सांझी भी आकर्षण का केंद्र हैं। 40 छात्राओं ने सीखी सांझी बनाने की विधि महोत्सव के अंतर्गत आयोजित कौशल विकास कार्यशाला में करीब 40 छात्राओं ने पेपर कटिंग और स्टेंसिल के माध्यम से सांझी बनाने का प्रशिक्षण लिया। वृंदावन के सांझी कला विशेषज्ञ अमरेश चंद्र भट्ट ने छात्राओं को विभिन्न आकृतियां तैयार करने और रंगों के प्रयोग की विधि समझाई। उन्होंने बताया कि मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण के गाय चराकर लौटने पर उनके स्वागत में सांझी बनाई जाती थी। कालांतर में यह परंपरा मंदिरों में विकसित हुई।
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