4 नवंबर 2026, 6:34 PM
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मुलायम से मायावती तक बिना चुनाव लड़े CM बने:नीतीश ने MLC रहकर 10 बार गद्दी संभाली, रणनीति या टोटका; अखिलेश क्यों नहीं लड़ रहे

‘हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं…’ ऐसा कहकर अखिलेश यादव ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए हैं। जबकि, उन्होंने सीएम योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। सीएम ने चुनौती स्वीकार की थी और कहा था- ‘आइए, दो-दो हाथ हो जाएं…।’ जवाब में अखिलेश बोले थे कि वहां पवन पांडेय (स्थानीय नेता) ही काफ

मुलायम से मायावती तक बिना चुनाव लड़े CM बने:नीतीश ने MLC रहकर 10 बार गद्दी संभाली, रणनीति या टोटका; अखिलेश क्यों नहीं लड़ रहे
स्रोत: dainik bhasker category
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‘हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं जब चुनाव नहीं लड़ते हैं…’ ऐसा कहकर अखिलेश यादव ने 2027 यूपी विधानसभा चुनाव नहीं लड़ने के संकेत दिए हैं। जबकि, उन्होंने सीएम योगी को अयोध्या से चुनाव लड़ने की चुनौती दी थी। सीएम ने चुनौती स्वीकार की थी और कहा था- ‘आइए, दो-दो हाथ हो जाएं…।’ जवाब में अखिलेश बोले थे कि वहां पवन पांडेय (स्थानीय नेता) ही काफी हैं। इससे पहले मुलायम सिंह यादव और मायावती भी बिना चुनाव लड़े सीएम बने हैं। 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे नीतीश कुमार ने भी कभी सीएम रहते चुनाव नहीं लड़ा। आखिर इसके पीछे कोई रणनीति है या टोटका? अखिलेश चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहते? जानेंगे आज के यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल 1 : मुलायम और मायावती बिना चुनाव लड़े सीएम बने थे, तब क्या स्थिति थी? जवाब : जब किसी नेता के बिना चुनाव लड़े मुख्यमंत्री बनने की बात होती है, तो इसके दो मतलब होते हैं। पहला- कोई नेता उस समय राज्य के किसी भी सदन (विधानसभा या विधान परिषद) का सदस्य नहीं था और सीधे सीएम पद की शपथ ली। जैसा 2012 में अखिलेश और 2017 में योगी आदित्यनाथ के साथ हुआ। दूसरा- नेता ने जानबूझकर विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा, बल्कि पिछले दरवाजे से यानी MLC का रास्ता चुनकर सीएम बन गए। जैसा अब अखिलेश करना चाहते हैं। इन दोनों सिनैरियो को ऐसे समझ सकते हैं… मुलायम सिंह यादव: दिल्ली की राजनीति से सीधे यूपी की गद्दी (2003) मुलायम सिंह यादव अपने शुरुआती 2 कार्यकाल (दिसंबर, 1989 से जनवरी, 1991 और दिसंबर, 1993 से जून, 1995 तक) में बाकायदा विधानसभा चुनाव जीतकर सीएम बने। लेकिन, 2003 में जब वे तीसरी बार मुख्यमंत्री बने, तब स्थिति बिल्कुल अलग थी। बसपा-भाजपा गठबंधन सरकार गिर चुकी थी। मुलायम सिंह ने जोड़-तोड़ और निर्दलीयों के सहारे सरकार बनाई। मुलायम संभल से लोकसभा सांसद थे। उन्होंने 29 अगस्त, 2003 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। नियम के मुताबिक उन्हें 6 महीने में विधायक बनना था। लोकसभा से इस्तीफा देकर जनवरी, 2004 में गुन्नौर विधानसभा सीट से उपचुनाव में उतरे और रिकॉर्ड 1.83 लाख वोट से जीते। मायावती: जब दोनों सदनों से बाहर रहकर बनीं मुख्यमंत्री (1995 और 2007) साल 1995: गेस्ट हाउस कांड के बाद मायावती भाजपा के समर्थन से पहली बार मुख्यमंत्री बनीं। 3 जून, 1995 को जब उन्होंने शपथ ली, तब वे राज्यसभा सांसद थीं। इस सरकार में वे बिना विधायक बने ही सीएम रहीं, क्योंकि सरकार सिर्फ 4 महीने में ही गिर गई। इसके बाद सीएम के दूसरे (मार्च, 1997 से सितंबर, 1997 तक) और तीसरे कार्यकाल (मई, 2002 से अगस्त, 2003 तक) में वे विधानसभा चुनाव में जीतने के बाद कुर्सी संभाली। लेकिन, दोनों बार सरकार गिर गई। साल 2007: बसपा को यूपी में पूर्ण बहुमत मिला। लेकिन, मायावती ने खुद विधानसभा चुनाव नहीं लड़ा था। वे पूरे राज्य में केवल स्टार प्रचारक के रूप में रैलियां कर रही थीं। 13 मई, 2007 को जब उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, तब वे राज्यसभा सांसद थीं। मुख्यमंत्री बनने के बाद राज्यसभा से इस्तीफा दिया और विधान परिषद सदस्य (MLC) बनीं। बिहार में नीतीश का रिकॉर्ड, हमेशा बिना लड़े सीएम बने 10 बार मुख्यमंत्री रहे (कुल 19 साल 90 दिन) नीतीश कुमार का मामला बेहद अनोखा है। उन्होंने मुख्यमंत्री रहते हुए कभी भी जनता का सामना नहीं किया। 2005 से लेकर 2026 तक लगातार MLC बनकर ही मुख्यमंत्री रहे। 2000: पहली बार सिर्फ 7 दिन के लिए सीएम बने। तब बाढ़ सीट से सांसद और केंद्रीय मंत्री थे। बहुमत नहीं होने के कारण इस्तीफा दिया, इसलिए विधायक बनने की नौबत नहीं आई। 2005: भाजपा-जदयू गठबंधन जीता, नीतीश नालंदा से सांसद थे। 24 नवंबर, 2005 को मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। लोकसभा से इस्तीफा दिया और MLC बने। वे चाहते तो अगले यानी 2010, 2015 या अन्य विधानसभा चुनाव में लड़कर जीतते और सीएम बनते। लेकिन, 2005 से लेकर 2026 तक जब-जब और जितनी भी बार (गठबंधन बदल-बदल कर) सीएम बने, हमेशा MLC ही रहे। सवाल 2 : अखिलेश खुद 2027 चुनाव क्यों नहीं लड़ना चाहते? जवाब : यह अखिलेश की सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। उत्तर प्रदेश के राजनीतिक जानकारों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इन बयानों के पीछे गहरे राजनीतिक मायने हैं, जिन्हें हम बहुत ही सरल शब्दों में समझ सकते हैं… I) ‘बिना चुनाव लड़े सीएम बनना’, आजमाया हुआ तरीका अखिलेश यादव ने मीडिया बातचीत के दौरान मजाकिया अंदाज में कहा कि ‘हम मुख्यमंत्री तभी बनते हैं, जब चुनाव नहीं लड़ते हैं। इसलिए शुभ काम करेंगे।’ II) सीएम योगी पर राजनीतिक बढ़त बनाने की कोशिश III) पहले अयोध्या की चुनौती, फिर पवन पांडेय को आगे करना भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- सवाल 3 : अगर पार्टी का सबसे बड़ा नेता खुद चुनाव न लड़े, तो क्या असर होता है? जवाब : पार्टी के सबसे बड़े नेता या मुख्यमंत्री के चेहरे का खुद चुनाव न लड़ना राजनीति में कोई नई बात नहीं है। भारत की राजनीति में इसके दोनों तरह के असर देखे गए हैं। कुछ बहुत फायदेमंद होते हैं, तो कुछ नुकसान भी पहुंचा सकते हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं… सकारात्मक असर (जोश बढ़ाने वाले कारण) नकारात्मक असर (चिंता की बातें) --------------------------------- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… सपा के सोशल मीडिया फॉलोअर्स देख यूपी BJP में टेंशन, 5 गुना तेज बढ़ रहे इंस्टा फॉलोअर सोशल मीडिया पर लाइक, शेयर और कमेंट किए जाने यानी इंगेजमेंट के मामले में सपा, यूपी भाजपा से आगे है। मामले की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगता है कि संघ के सह सरकार्यवाह यानी जॉइंट सेक्रेटरी अरुण कुमार को अपने हालिया लखनऊ दौरे में 22 अक्टूबर को इस मुद्दे पर बैठक करनी पड़ी। उन्हें बताया गया कि 20 दिन में यूपी भाजपा का सोशल मीडिया इंगेजमेंट 35% घटा है।2027 विधानसभा चुनाव पर इसका क्या असर होगा…? पढ़िए यूपी एक्सप्लेन में…
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