शंकराचार्य बोले-राम मंदिर के कोष से गुरुकुल-संस्कारशालाएं बनें:नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा-धर्म की रक्षा के लिए मंदिर सरकारी नियंत्रण से मुक्त हों
वाराणसी में संस्कृति संसद का आज दूसरा दिन है। यह कार्यक्रम सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हो रहा है। संसद में सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर सनातनियों के हाथों में सौंपना जरूरी है। काशी विश्वनाथ म

वाराणसी में संस्कृति संसद का आज दूसरा दिन है। यह कार्यक्रम सिगरा स्थित रुद्राक्ष इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में हो रहा है। संसद में सुमेरु पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू संस्कृति की रक्षा के लिए मठ-मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से मुक्त कर सनातनियों के हाथों में सौंपना जरूरी है। काशी विश्वनाथ मंदिर और राम जन्मभूमि जैसे धार्मिक स्थलों के कोष से गुरुकुलों, गौशालाओं और संस्कारशालाओं के निर्माण में किया जाना चाहिए। राम जन्मभूमि के धन से कम से कम एक लाख विद्यार्थियों के लिए गुरुकुल और एक से डेढ़ लाख गायों के लिए गौशालाएं स्थापित करने का लक्ष्य रखा जाना चाहिए। मंदिरों की संपत्ति का उपयोग समाज और धर्म के उत्थान के लिए होना चाहिए। इससे पहले कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने कहा- गोवा में पुर्तगालियों ने बड़े पैमाने पर अत्याचार किए थे। इस इतिहास को जानने के लिए 'गोवा इनक्विजिशन' किताब पढ़नी चाहिए। विदेशी ताकतें युवाओं को गुमराह कर सड़क पर विरोध प्रदर्शन करा रही हैं। देश को ऐसी ताकतों से बचाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सांस्कृतिक चेतना जगाने, राष्ट्रीय एकता मजबूत करने और त्योहारों के प्रति लोगों की घटती रुचि को दूर करने में संत समाज अहम भूमिका निभा सकता है।
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