22 अक्टूबर 2026, 5:54 PM
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सहारनपुर मस्जिद विवाद:सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया, मस्जिद पक्ष को 3 सप्ताह का समय

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। इसके बाद कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को जवाब का अध्ययन कर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। मुख्य शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व

सहारनपुर मस्जिद विवाद:सरकार ने हाईकोर्ट में जवाब दाखिल किया, मस्जिद पक्ष को 3 सप्ताह का समय
स्रोत: dainik bhasker category
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सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मस्जिद के ध्वस्तीकरण के मामले में गुरुवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। उत्तर प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन की ओर से जवाबी हलफनामा दाखिल किया गया। इसके बाद कोर्ट ने मस्जिद पक्ष को जवाब का अध्ययन कर अपना प्रत्युत्तर दाखिल करने के लिए तीन सप्ताह का समय दिया। मुख्य शिकायतकर्ता और बजरंग दल के पूर्व प्रांत संयोजक विकास त्यागी के अनुसार, सरकार और प्रशासन का जवाब रिकॉर्ड पर आने के बाद अदालत ने मस्जिद पक्ष को यह समय दिया है। हालांकि, मामले में अंतिम फैसला होना अभी बाकी है। विवाद कलेक्ट्रेट परिसर में करीब 315 वर्ग मीटर सरकारी जमीन पर बने ढांचे से जुड़ा है। प्रशासन ने 5 सितंबर 2026 को पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की मौजूदगी में इसे ध्वस्त कर दिया था। जमीन के मालिकाना हक को लेकर विवाद इस मामले में नगर मजिस्ट्रेट ने 16 जुलाई 2026 को बेदखली और क्षतिपूर्ति का आदेश दिया था। मस्जिद पक्ष ने इसके खिलाफ जिला अदालत में अपील की, लेकिन 2 सितंबर को अपील खारिज हो गई। इसके तीन दिन बाद प्रशासन ने ढांचे को ध्वस्त कर दिया। सरकारी पक्ष का कहना है कि विवादित जमीन सरकारी अभिलेखों में कलेक्ट्रेट या कचहरी के नाम दर्ज है। वहीं, मस्जिद पक्ष ने याचिका में जमीन को याकूब खान और वाहिद खान की संपत्ति बताते हुए उस पर वक्फ के तहत इस्तेमाल का दावा किया है। मस्जिद पक्ष ने हाईकोर्ट में बेदखली और ध्वस्तीकरण से जुड़े आदेशों को चुनौती दी है। 11 सितंबर को हाईकोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा था और 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति की वसूली पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी थी। अब सरकार और प्रशासन का जवाब दाखिल होने के बाद मस्जिद पक्ष को अपना प्रत्युत्तर देना है। मामले में जमीन के मालिकाना हक और प्रशासन की कार्रवाई की वैधता पर अंतिम निर्णय अदालत को करना है।
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