3 अक्टूबर 2026, 1:15 PM
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ईयरबड्स का इस्तेमाल करने वालों को कम सुनाई दे रहा:कान की नसें हो रहीं कमजोर, जीएसवीएम में शुरु हुई चार दिवसीय कांफ्रेंस

लंबे समय तक तेज आवाज में ईयरबड्स और इनसर्ट इयरफोन का इस्तेमाल करने वालों में सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार ईयरबड्स इस्तेमाल करने वाले लोगों में अब इस तरह की परेशानी देखने को मिल रही है। तेज आवाज का असर सीधे कान की अंदरूनी संरचना और सुनने वाली नसों पर पड़ सकता है। इससे धीरे-धीरे नर्व डेफनेस की स

ईयरबड्स का इस्तेमाल करने वालों को कम सुनाई दे रहा:कान की नसें हो रहीं कमजोर, जीएसवीएम में शुरु हुई चार दिवसीय कांफ्रेंस
स्रोत: dainik bhasker category
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लंबे समय तक तेज आवाज में ईयरबड्स और इनसर्ट इयरफोन का इस्तेमाल करने वालों में सुनने की क्षमता प्रभावित हो रही है। पिछले 8 से 10 वर्षों से लगातार ईयरबड्स इस्तेमाल करने वाले लोगों में अब इस तरह की परेशानी देखने को मिल रही है। तेज आवाज का असर सीधे कान की अंदरूनी संरचना और सुनने वाली नसों पर पड़ सकता है। इससे धीरे-धीरे नर्व डेफनेस की समस्या विकसित हो सकती है। इससे बचने के लिए ईयरबड्स का इस्तेमाल जितना कम हो सके, उतना बेहतर है। यह बातें गुरुवार को एसजीपीजीआई के डॉ. अमित केसरी ने बताई। वह जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डिपार्टमेंट ऑफ ईएनटी और एओआई कानपुर के संयुक्त तत्वावधान में गुरुवार से आयोजित चार दिवसीय 43वें UPAOICON 2026 (कांफ्रेंस) में शामिल होने के लिए आए हैं। मोबाइल पर स्पीकर मोड में करें लंबी बात डॉ. अमित ने बताया कि खासकर कान के पर्दे के करीब लगाए जाने वाले इनसर्ट इयरफोन के लगातार और तेज आवाज में इस्तेमाल से कॉकलियर हियरिंग लॉस की समस्या हो सकती है। आवाज सुनाई देने के बावजूद उसे समझने में दिक्कत होने लगती है। मोबाइल पर लंबी बातचीत करनी हो और निजी बातचीत न हो तो स्पीकर मोड का इस्तेमाल किया जा सकता है। ईयरफोन जरूरी हो तो कान के बाहर लगाए जाने वाले हेडफोन या बोन-कंडक्शन डिवाइस का इस्तेमाल किया जा सकता है। साथ ही आवाज का स्तर कम रखना चाहिए। एलर्जी और नाक में पॉलिप की समस्या बढ़ी डॉ. अमित केसरी ने नाक में एलर्जी की बढ़ती समस्या को भी बताया। उन्होंने बताया कि कोरोना के बाद वाहनों की संख्या और निर्माण गतिविधियां बढ़ने से प्रदूषण बढ़ा है। इसका असर एलर्जी से जुड़ी समस्याओं के रूप में भी दिखाई दे रहा है। पिछले एक-दो वर्षों में एलर्जिक राइनाइटिस के साथ नाक में मस्से और नेजल पॉलिपोसिस के मामले बढ़े हैं। बाइक चलाते व खाना बनाते समय मास्क लगाएं उन्होंने बताया कि प्रदूषण और धूल-धुएं से बचाव के लिए बाहर निकलते समय मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। खासकर बाइक चलाते समय हेलमेट के साथ फेस मास्क पहनना उपयोगी है। खाना बनाते समय मसालों और फूड पार्टिकल्स से तथा झाड़ू-पोछा करते समय उड़ने वाली धूल से बचने के लिए भी सामान्य कपड़े का मास्क लगाया जा सकता है। इससे धूल, धुएं और एलर्जी पैदा करने वाले कणों का संपर्क कम किया जा सकता है। कैडेवर हुई प्रैक्टिस कांफ्रेंस के पहले दिन ईएनटी सर्जरी की नई तकनीक की कैडेवर (मृत शरीर) पर प्रैक्टिस की गई। 24 से 27 सितंबर तक चलने वाले चार दिवसीय सम्मेलन में ईएनटी एवं हेड-नेक सर्जरी की नवीनतम तकनीकों, आधुनिक उपचार पद्धतियों और शल्य-कौशल पर विशेषज्ञ मंथन करेंगे। इसमें देश के अलावा विदेशों से भी डॉक्टर शामिल हो रहे हैं।
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यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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