हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में ऐसे कई स्टार्स हैं जो अकेले ही अपनी लाइफ बिता रहे हैं. किसी ने 40 की उम्र के पार तो किसी ने 50 की उम्र के पार होने के बाद भी शादी नहीं की. कई स्टार्स 60 की उम्र में भी घर नहीं बसाया और कई स्टार्स ने हमेशा-हमेशा के लिए कुंवारे रह गए. गुजरे दौर की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख भी इसी लिस्ट में शामिल है. आज 84 साल की हो चुकीं आशा पारेख ने कभी शादी नहीं की.
आशा पारेख अपने दौर की न सिर्फ सबसे बेहतरीन और सबसे खूबसूरत अदाकारा हुआ करती थीं, बल्कि वो अपने दौर में सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस भी थीं. उन पर कई एक्टर्स फ़िदा थे, हालांकि वो खुद एक डायरेक्टर से दिल लगा बैठीं और कहा जाता है कि उन्हीं के प्यार में एक्ट्रेस ताउम्र कुंवारी रह गईं. आइए आज आशा पारेख के बर्थडे के मौके पर नजर डालते हैं उनकी लाइफ की कुछ खास बातों पर.
एक्ट्रेस नहीं बनना चाहती थीं आशा पारेख?
आशा पारेख आज अपना 84वां जन्मदिन सेलिब्रेट कर रही हैं. 60 और 70 के दशक की चर्चित बॉलीवुड अदाकारा रही आशा जी का जन्म 2 अक्टूबर 1942 को मुंबई में हुआ था. उनका जन्म मुस्लिम मां सलमा और हिंदू पिता प्राणलाल पारेख के घर हुआ था. एक्ट्रेस बचपन में डॉक्टर बनने के ख्वाब देखा करती थीं, हालांकि बाद में उन्होंने अपना मन बदल लिया.
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बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट किया एक्टिंग डेब्यू
आशा पारेख ने बॉलीवुड में अपनी शुरुआत बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट की थी. उन्हें बाल कलाकार के रूप में काम डांस के कारण मिला था. दरअसल शुरू से ही उन्हें डांस का शौक था. एक स्टेज कार्यक्रम के दौरान डायरेक्टर बिमल रॉय आशा के टैलेंट स प्रभावित नजर आए और उन्हें अपनी साल 1952 की फिल्म 'मां' में काम दे दिया था. उस वक्त उनकी उम्र सिर्फ दस साल थी.
17 साल की उम्र में बतौर लीड एक्ट्रेस डेब्यू
17 साल की उम्र में आशा पारेख ने लीड एक्ट्रेस के रूप में बॉलीवुड में आगाज किया. उनकी पहली फिल्म 'दिल देकर देखो' थी. साल 1959 में आई इस मूवी में उन्होंने शम्मी कपूर के अपोजिट काम किया था. ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट निकली थी.
अपने दौर की सबसे महंगी एक्ट्रेस रहीं
लीड एक्ट्रेस के रूप में आशा हिंदी सिनेमा में 70 के दशक के बीच तक एक्टिव थीं और उस दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली एक्ट्रेस भी रहीं. आशा पारेख ने 1959 से 1973 तक बतौर लीड एक्ट्रेस कई फिल्मों में काम किया. उनकी सबसे चर्चित फिल्में 'दिल देकर देखो' के अलावा 'उपकार', 'लव इन टोक्यो', 'आए इन बहार के', 'कटी पतंग', 'मेरा गांव', 'आन मिलो सजना', 'कारवां' और तीसरी मंजिल हैं.
पैरेंट्स की मौत के बाद सुसाइड करना चाहती थीं आशा
आशा पारेख अपनी मां सलमा और पिता प्राणलाल दोनों के ही काफी करीब थीं. पैरेंट्स की मौत ने उनको बुरी तरह तोड़कर रख दिया था और एक्ट्रेस डिप्रेशन का शिकार हो गई थीं. ये खुलासा एक्ट्रेस ने खुद साल 2017 में पीटीआई को दिए इंटरव्यू में किया था. उन्होंने इसे बुरा समय बताते हुए कहा था कि पैरेंट्स के जाने के बाद वो अकेली पड़ गई थी. इस दौरान उन्हें सुसाइड के खयाल भी आए थे.
1998 में बनी थी सेंसर बोर्ड की पहली महिला चेयर पर्सन
सेंसर बोर्ड की चेयर पर्सन का पद संभालने वाली आशा पारेख पहली महिला हैं. साल 1998 से लेकर साल 2001 तक वो सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की चेयर पर्सन रहीं.
आशा पारेख को मिले ये बड़े अवॉर्ड्स
आशा पारेख को साल 1970 की फिल्म 'कटी पतंग' के लिए फिल्मफेयर के बेस्ट एक्ट्रेस अवॉर्ड से सम्मानित किया गया था. जबकि 1992 में पद्मश्री, 2002 में फिल्मफेयर का लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड और साल 2022 में दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड दिया गया था. हालांकि उन्होंने कभी भी बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड अपने नाम नहीं किया.
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इस डायरेक्टर के प्यार में रह गईं कुंवारी!
आशा पारेख की पर्सनल लाइफ की बात करें तो एक्ट्रेस का अफेयर कभी फिल्ममेकर नासिर हुसैन से था. आशा ने इस बात को अपनी आत्मकथा में भी स्वीकार किया है. हालांकि नासिर हुसैन पहले से शादीशुदा थे और उनके दो बच्चे भी थे. इसके चलते आशा और नासिर के रिश्ते को कोई मंजिल नहीं मिल पाई. कहा जाता है कि नासिर के प्यार में आशा पारेख ने कभी शादी नहीं की.
