6 अक्टूबर 2026, 6:01 PM
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‘काला सागर हो या खाड़ी, हमें...’, नाविकों पर हमले पर जयशंकर की दो टूक

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों की वजह से समंदर में जहाजों पर हमलों और नाविकों की मौतों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि काला स

‘काला सागर हो या खाड़ी, हमें...’, नाविकों पर हमले पर जयशंकर की दो टूक
स्रोत: abp news world
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विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में जारी संघर्षों की वजह से समंदर में जहाजों पर हमलों और नाविकों की मौतों पर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि काला सागर से लेकर खाड़ी क्षेत्र तक आम नागरिकों के जहाजों पर हमला हमें पूरी तरह से अस्वीकार्य है. उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र (UN) में गतिरोध बना हुआ है. कुछ देश इसके सुधारों का विरोध कर रहे हैं.

उन्होंने कहा कि भारत रूस और यूक्रेन, दोनों के साथ बातचीत कर रहा है, ताकि काला सागर से अनाज और ईंधन की शिपमेंट्स के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित किया जा सके. यह कोशिश जुलाई महीने में नागरिक जहाजों पर हुए हमलों के बाद किया जा रहा है, जिनमें कुछ भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी.

वार्ता और कूटनीति ही रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान का रास्ता- जयशंकर

नई दिल्ली में ‘इंडिया एंड द वर्ल्डः एडैप्टिव बाई डिजाइन’ के विषय पर सोमवार (5 अक्टूबर, 2026) को आयोजित 5वें कौटिल्य इकोनॉमिक कॉन्क्लेव में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा, ‘भारत नागरिक जहाजों पर होने वाले हमलों को पूरी तरह से अस्वीकार्य मानता है, चाहे वे काला सागर में हो, लाल सागर में हो या फिर खाड़ी क्षेत्र में हों.’ उन्होंने कहा, ‘रूस-यूक्रेन संघर्ष के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति ही आगे बढ़ने का रास्ता है.’ 

News Alert! Attack on civilian shipping, from Black Sea to Gulf region, completely unacceptable: Jaishankar. News Alert! UN is gridlocked; few countries resisting its reforms: Jaishankar. https://t.co/dz4y11CZ8Z

— Press Trust of India (@PTI_News) October 5, 2026

काला सागर को लेकर क्या बोले जयशंकर?

कॉन्क्लेव में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने काला सागर के मुद्दे को लेकर कहा, ‘जुलाई में हुए हमलों के बाद भारत ने रूस और यूक्रेन, दोनों देशों के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया था. मैंने व्यक्तिगत रूप से दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के साथ इस मुद्दे को उठाया था.’

उन्होंने कहा, ‘शुरुआत में बातचीत का उद्देश्य जहाजों और नाविकों की सुरक्षा को सुनिश्चित करना था, लेकिन बाद में अनाज के निर्यात को लेकर उठी परेशानियों की वजह से इसके विषय का दायरा और ज्यादा बढ़ गया. काला सागर के रास्ते से अनाजों का निर्यात काफी हद तक रूक गया था. अनाजों को ऊर्जा से अलग करके नहीं देखा जा सकता है, इसलिए बातचीत का दायरा और ज्यादा व्यापक हो गया और इस वक्त भी बातचीत जारी है.’ 

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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