कर्नाटक में सूखे की स्थिति लगातार गंभीर होती जा रही है. फसल नुकसान, पानी की कमी और किसानों की परेशानी को देखते हुए केंद्र सरकार से तत्काल मदद की मांग की गई है. राज्य सरकार ने खरीफ 2026 के सूखे से प्रभावित इलाकों के लिए केंद्र से 3705.30 करोड़ की सहायता मांगी है. यह मांग शुरुआत में 101 सूखा प्रभावित तालुकों के लिए की गई थी.
कर्नाटक में इस साल बारिश की कमी का असर खेती और जल स्रोतों पर पड़ा है. 9 सितंबर तक राज्य में बारिश की कमी करीब 34 प्रतिशत बताई गई थी. उस समय 31 में से 30 जिलों और 240 में से 182 तालुकों में बारिश की कमी दर्ज की गई थी. राज्य के आकलन के अनुसार करीब 19.52 लाख हेक्टेयर में फसल को नुकसान हुआ और शुरुआती अनुमान में फसल नुकसान की कीमत 18,748.23 करोड़ बताई गई थी. इसके बाद में सूखे का असर और बढ़ा. वैज्ञानिक आकलन के बाद 76 और तालुकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया, जिससे यह संख्या बढ़कर 177 हो गई. 40 अन्य तालुकों में भी जमीन पर जांच चल रही है.
I am sharing my detailed letter to Hon’ble Prime Minister Shri Narendra Modi ji, seeking his personal and urgent intervention in view of the severe drought affecting Karnataka.
— Mallikarjun Kharge (@kharge) October 3, 2026
The State is facing one of its gravest drought situations in recent years, with a 58% rainfall… pic.twitter.com/F40kMswcVx
केंद्र से आर्थिक मदद की मांग
कर्नाटक की ओर से सूखे से राहत के लिए 3,705.30 करोड़ की सहायता मांगी गई है. मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इस राशि में से 50 प्रतिशत यानी करीब 1,852.65 करोड़ की अंतरिम सहायता जल्द जारी करने की मांग की थी. राज्य का कहना है कि इससे फसल नुकसान, पीने के पानी, पशुधन और दूसरे जरूरी राहत कामों को तेजी से आगे बढ़ाया जा सकेगा. केंद्र ने भी सूखे की स्थिति का आकलन शुरू कर दिया है. केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार, कर्नाटक का ज्ञापन मिलने के बाद अंतर-मंत्रालयी केंद्रीय टीम बनाई गई है. यह टीम 3 से 7 अक्टूबर के बीच राज्य के सूखा प्रभावित इलाकों का जमीन पर जाकर आकलन करेगी.
किसानों के लिए जमीन के रिकॉर्ड के आधार पर मदद की मांग
सूखे से प्रभावित छोटे और सीमांत किसानों तक राहत पहुंचाने के लिए भूमि रिकॉर्ड के सही इस्तेमाल की मांग भी की गई है. इसमें कर्नाटक के अपडेटेड 'भूमि' रिकॉर्ड के आधार पर पात्र किसानों की पहचान करने की बात कही गई है, ताकि पुराने आंकड़ों के कारण वास्तविक किसानों को राहत से बाहर न किया जाए. राज्य सरकार ने राहत नियमों में बदलाव की जरूरत भी बताई है. उसका कहना है कि मौजूदा इनपुट सब्सिडी के नियम किसानों के वास्तविक नुकसान और खेती की लागत के हिसाब से पर्याप्त नहीं हैं.
पानी और जलाशयों को लेकर भी चिंता
सूखे का असर केवल खेती तक सीमित नहीं है. कम बारिश के कारण कई जलाशयों में पानी का स्तर भी चिंता का विषय बना हुआ है. खास तौर पर कावेरी बेसिन में कम जल स्टोरेज का असर आने वाले समय में पीने के पानी की उपलब्धता पर पड़ने की आशंका जताई गई है. मुख्यमंत्री ने केंद्र से पेयजल और सूखे से जुड़े दूसरे जरूरी खर्चों में भी सहायता की मांग की है.
सूखे का दायरा और बढ़ने की आशंका
राज्य सरकार का कहना है कि सूखे की स्थिति की जांच अभी जारी है. 40 और तालुकों में ग्राउंड-ट्रूथिंग चल रही है. हालिया आकलनों में सूखे से प्रभावित इलाकों में फसल नुकसान का अनुमान भी तेजी से बढ़ा है. 1 अक्टूबर की रिपोर्ट के अनुसार 177 तालुकों में करीब 47.09 लाख हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ और आर्थिक नुकसान का अनुमान 46,324.5 करोड़ तक पहुंच गया था. 3,705.30 करोड़ की मांग और बाद के डिटेल नुकसान के आंकड़ों को अलग-अलग चरणों के आकलन के रूप में देखना जरूरी है. राहत की अंतिम राशि केंद्र के आकलन और लागू नियमों के आधार पर तय होगी.
