1 नवंबर 2026, 1:37 AM
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गैर-मुस्लिम का नाम के आगे मोहम्मद लगाना शरीयत में नाजायज:मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले- बिना इस्लाम कबूल किए मोहम्मद नाम रखना जायज नहीं, अपनी पहचान से जिएं

"शरई नुक्तेनजर और शरीयत की रोशनी में गैर-मुस्लिम के लिए अपने नाम के साथ 'मोहम्मद' लगाना जायज नहीं है। शरीयत इस बात की कतई इजाजत नहीं देती।" यह बयान ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने दिया है। वे उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी दीपक कुमार द्वारा अपने नाम के आगे 'मोहम्मद' जोड़कर 'मोहम्मद दीपक'

गैर-मुस्लिम का नाम के आगे मोहम्मद लगाना शरीयत में नाजायज:मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बोले- बिना इस्लाम कबूल किए मोहम्मद नाम रखना जायज नहीं, अपनी पहचान से जिएं
स्रोत: dainik bhasker category
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"शरई नुक्तेनजर और शरीयत की रोशनी में गैर-मुस्लिम के लिए अपने नाम के साथ 'मोहम्मद' लगाना जायज नहीं है। शरीयत इस बात की कतई इजाजत नहीं देती।" यह बयान ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने दिया है। वे उत्तराखंड के कोटद्वार निवासी दीपक कुमार द्वारा अपने नाम के आगे 'मोहम्मद' जोड़कर 'मोहम्मद दीपक' लिखने के मामले पर अपनी राय रख रहे थे। 'मोहम्मद' बरकत और एहतराम वाला मुकद्दस नाम, हर कोई नहीं रख सकता मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने शरीयत के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि 'मोहम्मद' कोई आम लफ्ज़ नहीं है, बल्कि यह पैगंबर-ए-इस्लाम हजरत मोहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का नाम है। यह नाम बेहद एहतराम, तकद्दुस, बरकत और गरिमा वाला है। इस नाम का इस्तेमाल सिर्फ मुसलमान ही कर सकता है, हर शख्स को यह नाम रखने की इजाजत नहीं है। इस्लाम और कुरान पर ईमान के बिना नाम का इस्तेमाल पूरी तरह नाजायज उन्होंने आगे कहा कि दीपक कुमार गैर-मुस्लिम हैं। उनका न तो इस्लाम धर्म के उसूलों और जज्बातो से कोई वास्ता है, न वे पैगंबर-ए-इस्लाम को मानते हैं और न ही कुरान पर ईमान रखते हैं। ऐसी स्थिति में बिना इस्लाम पर यकीन किए या बिना आस्था रखे इस मुकद्दस नाम का इस्तेमाल करना शरीयत के मुताबिक पूरी तरह से ममनू (वर्जित) है। बुजुर्ग के समर्थन में जज्बात में आकर रखा था नाम दीपक के बैकग्राउंड का जिक्र करते हुए मौलाना ने बताया कि कुछ महीने पहले पड़ोस के एक बुजुर्ग मुस्लिम व्यक्ति के साथ कुछ असामाजिक तत्वों ने बदसलूकी की थी। उस वक्त दीपक ने जज्बात में आकर बुजुर्ग के समर्थन में खुद को 'मोहम्मद दीपक' कहा था, जिसके बाद यह नाम चर्चा में आ गया। मौलाना ने कहा कि जज्बात अपनी जगह हैं, लेकिन मजहबी उसूलों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। असल पहचान से जिएं दीपक, इस्लाम कबूल करने पर ही जायज होगा यह नाम मौलाना ने साफ किया, “अगर कोई गैर-मुस्लिम अपनी मर्जी और रजामंदी से इस्लाम कबूल करता है, तब तो उसके लिए यह नाम रखना दुरुस्त होगा। लेकिन मैं किसी को भी धर्म बदलने के लिए नहीं कहूंगा। दीपक कुमार को अपनी असल पहचान और असल नाम के साथ ही समाज में रहना चाहिए।”
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