3 अक्टूबर 2026, 6:53 PM
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डीडीयू अस्पताल के सर्जन डॉ. प्रेम प्रकाश को राष्ट्रीय फेलोशिप:देशभर में 40 डॉक्टर चुने गए; 14 घंटे की कठिन परीक्षा पास कर हासिल की उपाधि

पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और सर्जन डॉ. प्रेम प्रकाश ने कोलन और रेक्टम से जुड़ी सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने एसोसिएशन ऑफ कोलोरेक्टल सर्जन्स ऑफ इंडिया की फेलोशिप परीक्षा पास की है। मार्च में हुई इस परीक्षा में थ्योरी, प्रैक्टिकल और टेबल वाइवा से गुजरने के बाद सितंबर में उन्

डीडीयू अस्पताल के सर्जन डॉ. प्रेम प्रकाश को राष्ट्रीय फेलोशिप:देशभर में 40 डॉक्टर चुने गए; 14 घंटे की कठिन परीक्षा पास कर हासिल की उपाधि
स्रोत: Dainik Bhaskar Uttar Pradesh
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और सर्जन डॉ. प्रेम प्रकाश ने कोलन और रेक्टम से जुड़ी सर्जरी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने एसोसिएशन ऑफ कोलोरेक्टल सर्जन्स ऑफ इंडिया की फेलोशिप परीक्षा पास की है। मार्च में हुई इस परीक्षा में थ्योरी, प्रैक्टिकल और टेबल वाइवा से गुजरने के बाद सितंबर में उन्हें फेलोशिप की उपाधि दी गई। डॉ. प्रेम प्रकाश ने बताया कि देशभर से 40 डॉक्टर इस फेलोशिप के लिए चयनित हुए, जिनमें बनारस से वे अकेले हैं। उन्होंने बताया कि ये सम्मेलन 18 से 20 सितंबर तक आयोजित किया गया था। कांफ्रेस से पहले 17 सितंबर को डॉक्टर्स को लेजर सर्जरी की ट्रेनिंग दी गई। उन्होंने कहा कि मेरा प्रयास है कि यह आधुनिक सुविधा सरकारी अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को भी मिल सके। मार्च में दी परीक्षा, 14 घंटे तक चली प्रक्रिया डॉ. प्रेम प्रकाश ने बताया कि फेलोशिप के लिए मार्च 2026 में पटना में परीक्षा हुई थी। इसमें दो थ्योरी पेपर, प्रैक्टिकल परीक्षा और टेबल वाइवा शामिल था। परीक्षा की पूरी प्रक्रिया करीब 14 घंटे तक चली। इसमें सफल होने के बाद सितंबर में उन्हें फेलोशिप की उपाधि मिली। 40 डॉक्टरों में बनारस से अकेले चयन डॉ. प्रेम प्रकाश के बताया कि इस फेलोशिप के लिए पूरे देश से 40 डॉक्टरों का चयन किया गया था। इनमें बनारस से वे अकेले चयनित हुए। इस इससे पहले भी डॉ. प्रेम प्रकाश के कई रीसर्च इंटरनेशल जनरल्स में प्रकाशित हो चुके है। फेलोशिप में कोलन-रेक्टम की सर्जरी पर विशेषज्ञता एसोसिएशन ऑफ कोलन एंड रेक्टल सर्जन्स ऑफ इंडिया का काम बड़ी आंत, रेक्टम और गुदा से जुड़ी बीमारियों की सर्जरी और इलाज के क्षेत्र से जुड़ा है। इसमें बवासीर, भगंदर, गुदा में दरार, पाइलोनिडल साइनस और बड़ी आंत-रेक्टम से जुड़ी कई सर्जरी शामिल होती हैं। डॉ. प्रेम प्रकाश ने बताया कि इस क्षेत्र में नई तकनीकों से इलाज को लेकर लगातार प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फेलोशिप के दौरान हुई कार्यशाला में लेजर तकनीक से कोलोरेक्टल क्षेत्र की सर्जरी का प्रशिक्षण लिया। लेजर से कम चीरा और कम खून निकलने पर जोर डॉ. प्रेम प्रकाश ने कहा कि लेजर तकनीक से ऑपरेशन में चीरा छोटा लगाने, खून कम निकलने और मरीज को जल्दी अस्पताल से छुट्टी देने में मदद मिल सकती है। मरीज के जल्दी सामान्य काम पर लौटने की संभावना भी रहती है। उनका कहना है कि अभी यह तकनीक सरकारी अस्पताल में उपलब्ध नहीं है। उनका प्रयास है कि अस्पताल में लेजर मशीन उपलब्ध हो और प्रशिक्षण में सीखी तकनीक का इस्तेमाल यहां आने वाले मरीजों के इलाज में किया जा सके। गरीब मरीजों के लिए क्यों जरूरी है यह सुविधा डॉ. प्रेम प्रकाश ने कहा कि आधुनिक इलाज सिर्फ उन लोगों तक सीमित नहीं रहना चाहिए जो निजी अस्पतालों का खर्च उठा सकते हैं। सरकारी अस्पताल में आने वाले गरीब मरीजों को भी नई तकनीक से इलाज का मौका मिलना चाहिए। 18 सितंबर को विशाखापत्तनम में मिली फेलोशिप डॉ. प्रेम प्रकाश को यह उपाधि एसोसिएशन ऑफ कोलोरेक्टल सर्जन्स ऑफ इंडिया के 49वें वार्षिक राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान दी गई। सम्मेलन 18 से 20 सितंबर तक विशाखापत्तनम में हुआ। 18 सितंबर को आयोजित दीक्षांत समारोह में उन्हें फेलोशिप का प्रमाणपत्र प्रदान किया गया। सम्मेलन में देश के अलग-अलग हिस्सों से कोलन और रेक्टम की सर्जरी से जुड़े डॉक्टर और विशेषज्ञ शामिल हुए। इसमें आधुनिक सर्जरी, लेजर तकनीक और कम चीरे वाली उपचार पद्धतियों पर प्रशिक्षण और चर्चा हुई। काशी में विशेषज्ञ इलाज को सरकारी अस्पताल से जोड़ने की कोशिश डॉ. प्रेम प्रकाश का कहना है कि काशी में सरकारी अस्पताल आने वाले मरीजों को भी इलाज की आधुनिक सुविधाएं मिलनी चाहिए। फेलोशिप से मिली विशेषज्ञता और लेजर सर्जरी की ट्रेनिंग को वह मरीजों की सेवा से जोड़ना चाहते हैं। उनका प्रयास है कि मशीन उपलब्ध होने के बाद इस तकनीक से इलाज की सुविधा सरकारी अस्पताल में शुरू हो और इसका फायदा उन मरीजों को मिले जो महंगे निजी इलाज का खर्च नहीं उठा सकते।
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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