दादा से पोते तक, 100 साल से एक ही परिवार बना रहा मां काली की प्रतिमा, दर्शन बिना अधूरी है पूजा
आज के दौर में जब कई पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं, तब सीवान का यह परिवार एक अलग मिसाल पेश कर रहा है. 100 वर्षों से अधिक समय से मां काली की प्रतिमा बनाने की परंपरा आज भी कायम है. दादा से पिता और पिता से बेटे-नाती तक पहुंची यह विरासत परिवार की मेहनत, आस्था और समर्पण की कहानी कहती है. वहीं, मोहल्ले के लोगों का सहयोग इस परंपरा को और मजबूत ब

आज के दौर में जब कई पुरानी परंपराएं धीरे-धीरे खत्म हो रही हैं, तब सीवान का यह परिवार एक अलग मिसाल पेश कर रहा है. 100 वर्षों से अधिक समय से मां काली की प्रतिमा बनाने की परंपरा आज भी कायम है. दादा से पिता और पिता से बेटे-नाती तक पहुंची यह विरासत परिवार की मेहनत, आस्था और समर्पण की कहानी कहती है. वहीं, मोहल्ले के लोगों का सहयोग इस परंपरा को और मजबूत बनाता है. हर साल मां काली की प्रतिमा तैयार होती है, श्रद्धालुओं की भीड़ जुटती है और पूरा इलाका भक्तिमय हो जाता है.
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