2 अक्टूबर 2026, 4:33 PM
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दोस्तों की संगत से शुरू हुआ नशा, छिना घर-परिवार:6 लाख रुपए तक गंवाए, वाराणसी के रिहैब सेंटर में जिंदगी वापस पाने की जंग

नशा शुरू करते समय किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यही नशा उनसे उनका घर, रिश्ते, पैसा और पहचान तक छीन लेगा। किसी ने दोस्तों के साथ पहली बार नशा किया तो किसी ने प्रेम में मिले धोखे के बाद इसे अपना सहारा बना लिया। शुरुआत में नशा शौक लगा, फिर आदत बनी और धीरे-धीरे जरूरत बन गया। घर में लड़ाई-झगड़े शुरू हुए, परिवार का भरोसा टूटा, पत्नी ने

दोस्तों की संगत से शुरू हुआ नशा, छिना घर-परिवार:6 लाख रुपए तक गंवाए, वाराणसी के रिहैब सेंटर में जिंदगी वापस पाने की जंग
स्रोत: dainik bhasker category
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नशा शुरू करते समय किसी ने नहीं सोचा था कि एक दिन यही नशा उनसे उनका घर, रिश्ते, पैसा और पहचान तक छीन लेगा। किसी ने दोस्तों के साथ पहली बार नशा किया तो किसी ने प्रेम में मिले धोखे के बाद इसे अपना सहारा बना लिया। शुरुआत में नशा शौक लगा, फिर आदत बनी और धीरे-धीरे जरूरत बन गया। घर में लड़ाई-झगड़े शुरू हुए, परिवार का भरोसा टूटा, पत्नी ने साथ छोड़ दिया और लाखों रुपए नशे में चले गए। अब ये लोग रिहैबिलिटेशन सेंटर में हैं। यहां उनकी लड़ाई सिर्फ नशा छोड़ने की नहीं, बल्कि बिखर चुकी जिंदगी को दोबारा जोड़ने की है। नशा मुक्ति दिवस पर दैनिक भास्कर ने नशा छोड़ चुके लोगों से बात की। पढ़िए रिपोर्ट… प्रेम टूटा तो नशे में डूबता चला गया 46 वर्षीय वाराणसी निवासी ‘अमित’ (बदला हुआ नाम) करीब 8 साल तक नशे की गिरफ्त में रहे। नशे से पहले वह ड्राइवर थे और परिवार की जिम्मेदारी संभालते थे। शादी नहीं हुई थी। कॉलेज के दिनों में एक लड़की से प्रेम हुआ। रिश्ता टूटने के बाद वह धीरे-धीरे नशे की तरफ बढ़े। ‘अमित’ बताते हैं कि शुरुआत में वह दर्द से बचने के लिए नशा करते थे। लेकिन धीरे-धीरे नशा ही उसकी जिंदगी बन गयी। जिस परिवार के साथ वह रहते थे, उसी से दूर होते चले गये। वह कहते हैं, नशे मेरा सिर्फ नुकसान हुआ है। लोगों ने मेरा इस्तेमाल किया। मैंने हमेशा अपने आपको नुकसान पहुंचाया। बाद में खुद पर ग्लानि होने लगी कि मैंने अपनी जिंदगी के साथ क्या कर दिया।” अब रिहैब सेंटर में वह खुद को दोबारा संभालने की कोशिश कर रहा है। उसका कहना है कि नशे से बाहर निकलना सिर्फ शरीर को नशे से दूर करना नहीं है, बल्कि खुद को फिर से पहचानना भी है। दोस्तों के साथ शुरू हुआ, पत्नी चली गई 32 वर्षीय वाराणसी निवासी ‘मोनू’ (बदला हुआ नाम) के लिए नशे की शुरुआत दोस्तों के साथ बैठने से हुई। शादी के बाद दोस्तों की संगत में पहली बार नशा किया। शुरुआत में अच्छा लगा, लेकिन धीरे-धीरे आदत बढ़ती गई। नशे से पहले वह पिता के साथ गाड़ियों के काम में हाथ बंटाते थे। घर चल रहा था। लेकिन नशे के बाद घर में लड़ाई-झगड़े और मारपीट शुरू हो गई। आखिरकार पत्नी भी छोड़कर चली गई। ‘मोनू’ बताते हैं, “एक-दो महीने नशा छूट जाता है, लेकिन फिर दोस्त लोग मिलते हैं तो दोबारा शुरू हो जाता है। बाद में बहुत बुरा लगता है कि इतने दिन मैंने वहां बिताए, इतनी चीजें कीं, लेकिन फिर वापस यहीं आ गया।” अब वह रिहैब में रहकर इस बार नशे से पूरी तरह बाहर निकलने की कोशिश कर रहे हैं। उसे सबसे ज्यादा डर इसी बात का है कि बाहर निकलने के बाद पुरानी संगत कहीं उसे फिर उसी जगह न पहुंचा दे। 27 साल की उम्र में नशे में गंवाए 6 लाख 27 वर्षीय बिहार के रोहतास जिले के ‘विवेक’ (बदला हुआ नाम) ने बताया कि करीब 3-4 साल पहले दोस्तों के साथ नशा शुरू किया था। उससे पहले बीटेक की पढ़ाई कर रहा था। परिवार आर्थिक रूप से ठीक था और पिता ठेकेदारी का काम करते हैं। लेकिन नशे की मात्रा बढ़ती गई। धीरे-धीरे पढ़ाई, परिवार और सामान्य जिंदगी पीछे छूटती गई। विवेक के मुताबिक उसने नशे में करीब 6 लाख रुपए गंवा दिए। वह बताते हैं, “सबसे पहले परिवार के साथ मेरा व्यवहार बदला। फिर समाज में मेरा व्यवहार बदल गया। उसके बाद हम अपनी रियल लाइफ से ही थोड़ा भटक गए।” विवेक के मुताबिक शुरुआत में नशा नई चीज आजमाने का शौक था। बाद में यही शौक जरूरत में बदल गया। अब वह कहता है कि पहले जैसी क्रेविंग नहीं है और वह सामान्य जिंदगी में लौटना चाहता है। पिता का कारोबार संभालता था, फिर पत्नी भी छोड़ गई 32 वर्षीय बिहार के रोहतास जिले के ‘शुभम’ (बदला हुआ नाम) करीब 8 साल से नशे की लत से जूझ रहे थे। वह बताते है कि नशे से पहले जिंदगी अच्छी थी। परिवार में सब कुछ ठीक चल रहा था। करीब 21-22 साल की उम्र में दोस्तों के साथ नशा शुरू किया। उस समय वह पिता के साथ ज्वेलरी का कारोबार करते था। शादी हुई, लेकिन नशे की वजह से वैवाहिक जिंदगी भी बिगड़ती चली गई। शादी के दो साल में ही पहले पत्नी ने तलाक ले लिया। पिता का भी निधन हो गया। ‘शुभम’ कहते है, “नशे से पहले सब कुछ अच्छा था। नशे के बाद घर-परिवार, रिश्तेदार, पड़ोसी… सब खत्म हो गए। कोई विश्वास नहीं करता।” पत्नी के जाने के बाद उसे अपनी जिंदगी में नशे से हुए नुकसान का एहसास और गहरा हुआ। अब वह रिहैब सेंटर में है और कहता है कि उसे नशे में वापस नहीं जाना। “अब नशा नहीं पकड़ना है। नशे से मुक्त होना है। काम करना है और परिवार को आगे देखना है।” वाराणसी में सैकड़ों लोगों की यही कहनी एक आकड़े के मुताबिक वाराणसी में कुल 17 नशा मुक्ति केंद्र है जिसमें 1000 से ज्यादा लोग है नशा छोड़ने के लिए आते है। या उनके परिवार वाले उन्हें वहां भेजते है। लगभग सभी की कहनी एक जैसी होती है। नशा शुरू करने का कारण चाहे अलग-अलग हो पर परीणाम एक ही होता है। WHO के मुताबिक नशे से शरीर और दिमाग दोनों प्रभावित होते हैं। नशीले पदार्थों के सेवन से याददाश्त और एकाग्रता प्रभावित हो सकती है, चिंता, अवसाद और व्यवहार में बदलाव जैसी मानसिक समस्याएं बढ़ सकती हैं। लंबे समय तक सेवन से व्यक्ति में नशे पर निर्भरता विकसित हो सकती है और वह नुकसान होने के बावजूद नशा जारी रख सकता है। इसका असर हृदय, फेफड़े, लिवर और दिमाग सहित शरीर के कई अंगों पर पड़ सकता है। इंजेक्शन से नशा लेने वालों में HIV और हेपेटाइटिस-C जैसे संक्रमण का खतरा भी बढ़ता है। WHO के अनुसार इसका असर व्यक्ति की पढ़ाई, नौकरी, परिवार और सामाजिक रिश्तों पर भी पड़ सकता है।
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यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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