6 अक्टूबर 2026, 4:08 PM
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मान गया पाकिस्तान-तुर्किए, मक्का पैक्ट के तहत सऊदी में भेजेंगे सेना

यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है. इस दौरान यमन ने हूती के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन शुरू किया गया है. सऊदी अरब ने इस अभियान में समर्थन देने की घोषणा की है. 5 अक्टूबर को गठबंधन ने कहा कि अभियान के शुरुआती चरण में 100 लड़ाकू विमान

मान गया पाकिस्तान-तुर्किए, मक्का पैक्ट के तहत सऊदी में भेजेंगे सेना
स्रोत: abp news world
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यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई एक बार फिर तेज हो गई है. इस दौरान यमन ने हूती के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए ऑपरेशन डॉन ऑफ यमन शुरू किया गया है. सऊदी अरब ने इस अभियान में समर्थन देने की घोषणा की है. 5 अक्टूबर को गठबंधन ने कहा कि अभियान के शुरुआती चरण में 100 लड़ाकू विमान शामिल हुए और 324 हाई-वैल्यू ठिकानों को निशाना बनाया गया.

इस बीच मक्का पैक्ट के तहत पाकिस्तान और तुर्किए भी सऊदी अरब को मदद पहुंचाने के लिए तैयार हो गए हैं. इसके तहत हूती के खिलाफ जारी अभियान के बीच सैन्य बलों की तैनाती पर सहमति जताई है.

यमन में क्या हो रहा है?

यमन की सरकार का नया अभियान रेड सी के किनारे और स्ट्रेट ऑफ बाब अल-मंदब के आसपास हूती के कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने पर ध्यान दे रही है. यमनी सरकारी बलों ने बाब अल-मंदब और धुबाब इलाके में बढ़त हासिल करने का दावा किया है. रॉयटर्स के मुताबिक सऊदी हवाई हमलों के समर्थन के बीच सरकारी बलों ने इस इलाके में आगे बढ़ने की कोशिश की है. बाब अल-मंदब रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है.

पाकिस्तान की भूमिका अब क्यों महत्वपूर्ण हो गई है?

पाकिस्तान-सऊदी अरब के बीच लंबे समय से रक्षा संबंध हैं. अगस्त 2026 में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किए ने मक्का संयुक्त रक्षा समझौते पर साइन किए थे. समझौते के तहत एक सदस्य पर हमला तीनों के खिलाफ हमला माना जाता है. पाकिस्तान और तुर्किए ने इसे रक्षात्मक समझौता बताया है. पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ पहले ही कह चुके हैं कि सऊदी अरब के खिलाफ किसी भी आक्रामक कार्रवाई की स्थिति में पाकिस्तान उसके साथ खड़ा रहेगा. इस बीच 5 अक्टूबर को पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर रियाद में मक्का समझौते के तहत बनी रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति की बैठक में शामिल हुए.

पाक के सामने आर्थिक दबाव भी बड़ी चुनौती

पाक के लिए किसी लंबे विदेशी सैन्य अभियान में जाना आसान नहीं होगा. देश पहले से आर्थिक दबाव और घरेलू सुरक्षा चुनौतियों से जूझ रहा है. पाक के वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में रक्षा खर्च 18 फीसदी बढ़ाकर करीब 3 ट्रिलियन पाक रुपये किया गया है, जबकि फेडरल डेवल्पमेंट खर्च को 1 ट्रिलियन रुपये रखा गया है. बजट में टैक्स कलेक्शन का लक्ष्य करीब 15.26 ट्रिलियन रुपये और फीसकल घाटे के टारगेट को GDP का 3.6 फीसदी रखा गया है. यह बजट IMF कार्यक्रम की शर्तों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. IMF प्रोग्राम भी पाकिस्तान की आर्थिक नीति पर बड़ा असर डाल रहा है. ऐसे में यमन जैसे लंबे सैन्य अभियान में सैनिकों, हथियारों, ईंधन और लॉजिस्टिक्स का खर्च पाकिस्तान के लिए अतिरिक्त बोझ बन सकता है.

सऊदी अरब-पाक के आर्थिक रिश्ते

सऊदी अरब पाकिस्तान का बड़ा आर्थिक साझेदार भी है. अप्रैल 2026 में सऊदी अरब ने पाकिस्तान के लिए 3 अरब डॉलर की मदद देने की घोषणा की थी. इसके साथ पहले से मौजूद 5 अरब डॉलर के कर्ज को भी आगे बढ़ाया गया. पाकिस्तान के वित्त मंत्रालय ने इसे देश की विदेशी मुद्रा स्थिति और बाहरी खर्चों के लिए अहम बताया था. इस आर्थिक रिश्ते के साथ दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग भी लगातार मजबूत हुआ है. यही वजह है कि यमन में बढ़ते संघर्ष के बीच पाकिस्तान पर सऊदी अरब के साथ खड़े रहने का रणनीतिक दबाव भी बढ़ा है.

पाकिस्तान-सऊदी अरब की सैन्य क्षमता में अंतर

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक 2025 में पाकिस्तान का सैन्य खर्च करीब 11.9 अरब डॉलर था. इसी अवधि में सऊदी अरब का सैन्य खर्च 83.2 अरब डॉलर रहा. पाकिस्तान का सैन्य खर्च 2025 में 11 फीसदी बढ़ा, जबकि सऊदी अरब का खर्च 1.4 फीसदी बढ़ा.

समाचार स्रोत

यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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