3 अक्टूबर 2026, 5:33 PM
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ममता बनर्जी ने भी किया CJP का समर्थन, और कौन से दल अभिजीत दीपके के साथ?

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को समर्थन दिया है. शुक्रवार को दिल्ली से लौटने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने CJP, युवाओं और छात्रों के आंदोलन

ममता बनर्जी ने भी किया CJP का समर्थन, और कौन से दल अभिजीत दीपके के साथ?
स्रोत: abp news world
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पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन को समर्थन दिया है. शुक्रवार को दिल्ली से लौटने के बाद कोलकाता एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत में ममता बनर्जी ने CJP, युवाओं और छात्रों के आंदोलन के समर्थन की बात कही. उन्होंने कहा कि वह CJP और युवा पीढ़ी के साथ पूरी तरह खड़ी हैं और ऐसी कथित ज्यादतियों को रोकने की अपील करती हैं.

ममता बनर्जी से दिल्ली और मुंबई में CJP की ओर से किए जा रहे प्रदर्शनों को लेकर सवाल पूछा गया था. इन प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है. ममता बनर्जी ने अगस्त में भी दिल्ली में NEET मेडिकल प्रवेश परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर CJP के प्रदर्शन का समर्थन किया था. अहम बात यह भी है कि ममता के साथ-साथ शिवसेना और आम आदमी पार्टी ने भी सीजेपी को सपोर्ट किया है.

10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन की तैयारी

CJP ने अब घोषणा की है कि अगर ज्ञानेश कुमार ने मुख्य चुनाव आयुक्त के पद से इस्तीफा नहीं दिया तो 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर फिर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा. CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने शुक्रवार रात मुंबई के शिवाजी पार्क में हुए प्रदर्शन के बाद यह ऐलान किया. पुलिस की ओर से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शिवाजी पार्क में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन में पहुंचे.

दिपके ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से CJP के समर्थक दिल्ली पहुंचकर 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करेंगे. उन्होंने इसे शांतिपूर्ण आंदोलन बताते हुए उन लोगों से इसमें शामिल होने की अपील की, जो स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव चाहते हैं.

दिपके ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण रहेगा और वे महात्मा गांधी के बताए रास्ते पर चलेंगे. उन्होंने कहा कि अब यह सरकार और दिल्ली पुलिस पर निर्भर है कि वे शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार का सम्मान करते हैं या 20 जुलाई को हुई कथित कार्रवाई जैसी स्थिति दोहराते हैं. उन्होंने इस आंदोलन को लोकतंत्र की रक्षा की लड़ाई बताया और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव चाहने वाले नागरिकों से इसमें शामिल होने की अपील की.

दिपके ने दिया 'चलो दिल्ली' का नारा

इससे पहले शिवाजी पार्क में प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए अभिजीत दिपके ने कहा था कि अगर ज्ञानेश कुमार पद से इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर के Gen Z युवा दिल्ली पहुंचेंगे. उन्होंने इसे 'जंतर-मंतर 2.0' बताया और 'चलो दिल्ली' का आह्वान किया.

CJP की मुख्य मांगें क्या हैं?

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे के साथ उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की है. संगठन ने 2025 की मतदाता सूचियों को फ्रीज करने और चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून को खत्म करने की भी मांग रखी है.

CJP ने चुनावी मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं. संगठन के नेताओं का दावा है कि कई राज्यों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाए गए या नए नाम जोड़े गए. हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है.

CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने दावा किया कि दो वर्षों में 13 करोड़ मतदाताओं के नाम हटाए गए. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले राज्य की मतदाता सूची में 40 लाख नए मतदाता जोड़े गए. उन्होंने दिल्ली, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीटों में भी मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का दावा किया.

दिल्ली और तमिलनाडु को लेकर भी लगाए आरोप

दिपके के मुताबिक, दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की विधानसभा सीट पर 40 हजार मतदाताओं के नाम हटाए गए और बाद में केजरीवाल करीब चार हजार वोटों से चुनाव हार गए. तमिलनाडु में उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन की विधानसभा सीट से करीब एक लाख मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा किया.

उन्होंने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की विधानसभा सीट से भी मतदाताओं के नाम हटाए जाने का आरोप लगाया. CJP ने इन कथित मतदाता नाम कटौती को चुनाव परिणामों से जोड़ते हुए आरोप लगाया है कि मतदाता सूची में बदलाव से सत्तारूढ़ बीजेपी को फायदा हुआ.

हालांकि, CJP की ओर से लगाए गए इन सभी आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है. संगठन की मांगें और आरोप चुनाव आयोग की प्रक्रिया और मतदाता सूचियों को लेकर उसके विरोध का हिस्सा हैं.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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