3 अक्टूबर 2026, 3:54 PM
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मेरठ में साइबर अपराधियों ने बदला ठगी का नेचर:अब ऑफिसों के बॉस बनकर कर्मचारियों को ठग रहे, 6 बॉस स्कैम में 3.82 करोड़ उड़ाए

साइबर ठग अब सिर्फ ओटीपी, लिंक और फर्जी कस्टमर केयर के सहारे लोगों को निशाना नहीं बना रहे है, बल्कि कंपनियों के बॉस की पहचान और जीएसटी सिस्टम तक को ठगी का हथियार बना रहे हैं। मेरठ जोन में सामने आए बॉस स्कैम और जीएसटी स्कैम ने साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों की नई तस्वीर सामने लाकर रख दी है। बॉस स्कैम में सीईओ, एमडी, डायरेक्टर या उच

मेरठ में साइबर अपराधियों ने बदला ठगी का नेचर:अब ऑफिसों के बॉस बनकर कर्मचारियों को ठग रहे, 6 बॉस स्कैम में 3.82 करोड़ उड़ाए
स्रोत: dainik bhasker category
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साइबर ठग अब सिर्फ ओटीपी, लिंक और फर्जी कस्टमर केयर के सहारे लोगों को निशाना नहीं बना रहे है, बल्कि कंपनियों के बॉस की पहचान और जीएसटी सिस्टम तक को ठगी का हथियार बना रहे हैं। मेरठ जोन में सामने आए बॉस स्कैम और जीएसटी स्कैम ने साइबर अपराध के बदलते तौर-तरीकों की नई तस्वीर सामने लाकर रख दी है। बॉस स्कैम में सीईओ, एमडी, डायरेक्टर या उच्चाधिकारी की पहचान, फोटो, मोबाइल नंबर और डिजिटल अकाउंट का इस्तेमाल कर अधीनस्थ कर्मचारियों से कंपनी के खाते से रकम ट्रांसफर कराई जा रही है। वहीं, जीएसटी स्कैम में फर्जी फर्म, बिल और इनपुट टैक्स क्रेडिट के जरिये करोड़ों रुपये की कर चोरी का खेल शुरु हुआ है। मेरठ जोन में बॉस स्कैम के छह मामले सामने आए हैं। इनमें 3.82 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की कोशिश हुई। पुलिस कार्रवाई के चलते ठगी की रकम का 73.84 प्रतिशत हिस्सा अपराधियों तक पहुंचने से पहले ही फ्रीज करा दिया गया। दूसरी तरफ, जीएसटी स्कैम के 18 अभियोग दर्ज हुए, जिनमें 16 साइबर अपराधियों की पहचान उजागर हुई। इन मामलों में 59.30 करोड़ रुपये से ज्यादा की कर चोरी से संबंधित रकम प्रकाश में आई है। हर आठवीं शिकायत वित्तीय साइबर ठगी की साइबर ठगी का दायरा लगातार बढ़ रहा है। एक जनवरी, 2026 से एक अगस्त तक मेरठ और सहारनपुर मंडल में NCRP पोर्टल पर साइबर ठगी से संबंधित 30,471 शिकायतें दर्ज हुईं। इनमें 22,766 शिकायतें वित्तीय साइबर फ्रॉड से जुड़ी थीं। इन मामलों में 86 करोड़ 83 लाख 27 हजार 577 रुपये की ठगी हुई। पुलिस ने शिकायत मिलते ही खातों को ट्रेस करने और रकम रोकने की कार्रवाई शुरू की। 32 करोड़ 60 लाख 94 हजार 178 रुपये संदिग्ध खातों में फ्रीज कराए गए। यह कुल ठगी की रकम का 37.05 प्रतिशत बताया जा रहा है। अब कोर्ट की प्रक्रिया पूरी कराकर पीड़ितों को यह रकम वापस दिलाई जा रही है। 703 साइबर अपराधी जेल भेजे एडीजी जोन भानु भास्कर के मुताबिक, एक जनवरी, 2026 से 31 अगस्त तक साइबर अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 703 आरोपियों को जेल भेजा गया। पूछताछ और जांच में इनसे जुड़े मामलों में करीब 41.51 करोड़ रुपये से ज्यादा की साइबर ठगी सामने आई। इसमें से 2.72 करोड़ रुपये अब तक पीड़ितों को वापस कराए जा चुके हैं। पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों के नेटवर्क, बैंक खातों और दूसरे सहयोगियों की कड़ियां खंगाल रही है। अब जानिए किस तरह होता है स्कैम - सबसे पहले जानिए बॉस स्कैम को इस स्कैम में ठग पहले कंपनी के सीईओ, एमडी या किसी वरिष्ठ अधिकारी की डिजिटल पहचान को निशाना बनाते हैं। इसके बाद उसी नाम, फोटो या अकाउंट से कंपनी के वित्तीय कामकाज से जुड़े कर्मचारी को संदेश भेजा जाता है। संदेश में तत्काल भुगतान, गोपनीय ट्रांजैक्शन या किसी जरूरी कारोबारी काम का हवाला दिया जाता है। नए मामलों में ठग फर्जी ईमेल, व्हाट्सऐप, माइक्रोसॉफ्ट टीम्स या सोशल मीडिया के जरिये वरिष्ठ अधिकारी बनकर संपर्क कर रहे हैं। कुछ मामलों में मालवेयर वाली फाइल के जरिये व्हाट्सऐप वेब सेशन तक कब्जे में लेने का तरीका भी सामने आया है। I4C और SEBI ने कंपनियों को ऐसे मामलों में केवल मैसेज के आधार पर भुगतान नहीं करने और दूसरे माध्यम से अधिकारी से पुष्टि करने की सलाह दी है। - अब जानते हैं जीएसटी स्कैम के बारे में : जीएसटी स्कैम में साइबर और आर्थिक अपराध का गठजोड़ दिखाई दे रहा है। फर्जी दस्तावेजों के आधार पर फर्म तैयार करना, फर्जी बिल बनाना, बिना वास्तविक माल या सेवा के लेनदेन दिखाना और इनपुट टैक्स क्रेडिट का गलत इस्तेमाल करना, इस तरह के मामलों का हिस्सा हो सकता है। मेरठ जोन में ऐसे 18 अभियोग सामने आए हैं। इनमें 16 आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई है और जांच में 59.30 करोड़ रुपये से अधिक की कर चोरी से संबंधित रकम प्रकाश में आई है। चुनौती बड़ी, समाधान का रास्ता भी साफ एक्सपर्ट बोले- भुगतान से पहले करें सत्यापन साइबर एक्सपर्ट आर्या त्यागी बताते हैं कि साइबर ठग हर दिन एक नया तरीका साइबर ठगी का निकाल रहे हैं। ऐसे में वित्तीय मामलों को लेकर गंभीरता बरतना जरूरी है। ठग अब तकनीक के साथ भरोसे को भी निशाना बना रहे हैं। अब बचाव केवल पासवर्ड या एंटीवायरस से नहीं होगा। इसके लिए भुगतान की प्रक्रिया से पहले सत्यापन की प्रक्रिया को विशेष रूप से शामिल करना होगा।
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