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वोटर लिस्ट से कटे नाम क्या दोबारा जुड़ेंगे? EC का SIR हो चुके 20 राज्यों के लिए बड़ा कदम

मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने उन लोगों को फिर से मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है, जो विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान सूची में शामिल होने से रह गए हैं.

वोटर लिस्ट से कटे नाम क्या दोबारा जुड़ेंगे? EC का SIR हो चुके 20 राज्यों के लिए बड़ा कदम
स्रोत: abp news world
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मतदाता सूचियों से बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने को लेकर उठ रहे सवालों के बीच चुनाव आयोग ने उन लोगों को फिर से मतदाता सूची में शामिल करने के लिए विशेष अभियान चलाने का फैसला किया है, जो विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान सूची में शामिल होने से रह गए हैं. 

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, यह अभियान उन 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चलाया जाएगा, जहां SIR की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है. इसके तहत पहली बार वोट देने वाले युवाओं और छूटे हुए पात्र मतदाताओं को भी सूची में शामिल किया जाएगा.

29 सितंबर को राज्यों को भेजा गया निर्देश

चुनाव आयोग ने 29 सितंबर को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को लिखित निर्देश भेजे थे. इसके बाद गुरुवार को सभी राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों के साथ हुई वीडियो कॉन्फ्रेंस में भी इस निर्देश को दोहराया गया.  आयोग ने कहा कि जिन राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा हो चुका है, वहां मुख्य निर्वाचन अधिकारी, जिला निर्वाचन अधिकारी और निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी लगातार मतदाता सूची अपडेट करने की प्रक्रिया के तहत विशेष अभियान चलाएं. इसका मकसद SIR के दौरान सूची से छूटे लोगों और नए पात्र मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल करना है.

13 करोड़ नाम हटाए जाने के बाद बढ़ी निगरानी

यह फैसला ऐसे समय आया है, जब 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के ड्राफ्ट मतदाता रिकॉर्ड से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए जाने को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं. द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, आयोग के भीतर भी इस बात को लेकर आपत्तियां दर्ज हुई थीं कि मतदाता सूची में किसका नाम शामिल हो रहा है और कौन बाहर रह जा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीने में कम से कम 14 बार आयोग के नाम पर लिए गए ऐसे फैसलों पर आपत्ति जताई थी, जिनकी जानकारी उन्हें नहीं थी. इनमें नए मतदाताओं के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव और SIR के दौरान मतदाता सूची तैयार करने वाले ECINet सिस्टम के केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़े मुद्दे शामिल थे.

अब SIR के बाद Form 6 का पुराना प्रारूप

विशेष अभियान में Form 6 का इस्तेमाल किया जाएगा. खास बात यह है कि SIR के दौरान ऑनलाइन Form 6 में जो अतिरिक्त सवाल जोड़ा गया था, वह इस अभियान में लागू नहीं होगा. SIR के दौरान ऑनलाइन फॉर्म में आवेदक से पूछा जा रहा था कि वह या उसके माता-पिता पिछली SIR के बाद मतदाता सूची में शामिल थे या नहीं. इस सवाल का जवाब देना जरूरी था. ऐसे में अगर किसी 18 साल के युवक के माता-पिता का नाम पिछली SIR में हट गया था, तो उसके लिए सही जानकारी के साथ फॉर्म जमा करना मुश्किल हो सकता था.

दोनों चुनाव आयुक्तों ने मई में इस बदलाव पर सवाल उठाए थे. अगस्त में सुखबीर सिंह संधू ने इसे ‘अनधिकृत/अवैध’ बताया था. अब 29 सितंबर के निर्देश में साफ किया गया है कि यह अतिरिक्त घोषणा केवल SIR चरण के दौरान इस्तेमाल होगी. SIR पूरा होने वाले 20 राज्यों में पहली बार वोट देने वाले और सूची से छूटे पात्र लोग सामान्य वैधानिक Form 6 के जरिए नाम जुड़वा सकेंगे.

पहले और बाद की मतदाता सूची मिलाने का निर्देश

गुरुवार की वीडियो कॉन्फ्रेंस में राज्यों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया. अधिकारियों के अनुसार, उप निर्वाचन आयुक्त ने राज्यों से कहा कि SIR से पहले की मतदाता सूची और SIR के बाद की सूची की तुलना की जाए. इसके बाद उन लोगों की सूची तैयार करने को कहा गया, जिनके नाम हटाए गए हैं. इनमें ऐसे लोगों की पहचान भी की जाएगी, जो किसी दूसरी जगह मतदाता के तौर पर दर्ज नहीं हैं, जिनका नाम डुप्लीकेट नहीं है और जिनकी मृत्यु भी नहीं हुई है. अधिकारियों को ऐसे मामलों में घर जाकर जानकारी जुटाने और पात्र लोगों से Form 6 भरवाने के लिए कहा गया है. इस प्रक्रिया में राजनीतिक दलों और उनके बूथ स्तर के एजेंटों की मदद लेने का भी निर्देश दिया गया है.

गोवा के 97 मतदाताओं का मामला भी चर्चा में

इस अभियान के सामने गोवा का मामला भी एक उदाहरण के तौर पर है. गोवा में SIR के दौरान 97 ऐसे मतदाताओं के नाम अंतिम सूची से बाहर रह गए थे, जिन्हें स्थानीय निर्वाचक पंजीकरण अधिकारियों ने पात्र माना था.इन लोगों के नाम ड्राफ्ट स्तर पर हटाए गए थे. उन्होंने जरूरी दस्तावेज जमा किए और ERO ने उन्हें पात्र भी माना, लेकिन ECINet में नाम वापस जोड़ने का विकल्प नहीं होने के कारण उनका नाम अंतिम सूची में शामिल नहीं हो सका. गोवा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय ने सात दिनों में आयोग को आठ बार पत्र भेजे थे. इन पत्रों की प्रतियां आईटी महानिदेशक सीमा खन्ना को भी भेजी गई थीं, लेकिन इनका जवाब नहीं मिला. इसके बाद 97 लोगों के नाम के बिना ही अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित हो गई.

ECINet के केंद्रीकरण पर भी उठे थे सवाल

यही मुद्दा चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू ने 14 अगस्त को दर्ज अपनी आपत्ति में उठाया था. उन्होंने कहा था कि कानून के तहत मतदाता सूची से जुड़ी जिम्मेदारी ERO, DEO और CEO की होती है, लेकिन ECINet का एक्सेस नियंत्रण केंद्रीकृत कर दिया गया है. संधू ने सवाल उठाया था कि आईटी महानिदेशक को कानून के तहत काम कर रहे इन अधिकारियों की पूरी पहुंच और स्वतंत्रता सीमित करने का अधिकार नहीं है. इससे पहले मई में चुनाव आयुक्त विवेक जोशी ने भी मतदाता सूची के डेटाबेस के धीरे-धीरे केंद्रीकरण पर चिंता जताई थी और इसके ऑडिट की मांग की थी. दोनों आपत्तियों पर 26 सितंबर को हुई आयोग की बैठक तक कोई जवाब सामने नहीं आया था.

26 सितंबर की बैठक के बाद बदली प्रक्रिया

29 सितंबर का निर्देश आयोग की 26 सितंबर की बैठक के तीन दिन बाद आया. अप्रैल के बाद यह आयोग की दूसरी पूर्ण बैठक थी. इस बैठक में कई अहम फैसले लिए गए थे. आयोग ने कहा था कि ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के कारण नोटिस पाने वाले मतदाताओं को अपनी पात्रता साबित करने के लिए व्यक्तिगत रूप से सुनवाई में उपस्थित होने की जरूरत नहीं होगी. साथ ही ECINet की समीक्षा के लिए एक समिति बनाने का फैसला हुआ, जिसमें आईआईटी या आईआईआईटी के स्वतंत्र विशेषज्ञ को शामिल किया जाना है.

आयोग ने यह भी कहा था कि फील्ड अधिकारियों को काम में जिस अतिरिक्त सुविधा की जरूरत होगी, उसे सॉफ्टवेयर में उपलब्ध कराया जाएगा. इसके बाद 29 सितंबर के पत्र में राज्यों को इन बदलावों की जानकारी दी गई और ECINet में जरूरी संशोधन करने के लिए आईटी महानिदेशक को भी पत्र की प्रति भेजी गई.

Form 6 को लेकर स्थिति साफ

29 सितंबर के निर्देश में Form 6 को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है. आयोग ने कहा है कि SIR से जुड़ी अतिरिक्त घोषणा केवल SIR चरण के दौरान ही इस्तेमाल होगी. SIR के बाहर मतदाता पंजीकरण के लिए Registration of Electors Rules, 1960 के तहत लागू सामान्य फॉर्म का इस्तेमाल किया जाएगा. इस तरह SIR पूरा होने वाले राज्यों में छूटे हुए मतदाताओं और नए पात्र युवाओं के लिए सामान्य Form 6 के जरिए नाम जोड़ने का रास्ता खुल गया है.

महाराष्ट्र में जल्दबाजी में नाम नहीं हटाने का निर्देश

दूसरी ओर, महाराष्ट्र में भी मतदाता सूची को लेकर अधिकारियों को विशेष सावधानी बरतने के निर्देश दिए गए हैं. महाराष्ट्र फिलहाल सबसे बड़ा राज्य है, जहां SIR की प्रक्रिया जारी है. गुरुवार को मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने मुंबई शहर और मुंबई उपनगर के अधिकारियों को भेजे नोट में कहा कि किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने से पहले उसे पर्याप्त मौका दिया जाए. संबंधित व्यक्ति को जरूरी दस्तावेज जमा करने का अवसर मिले, जरूरत पड़ने पर सुनवाई हो और उसके बाद ही आदेश जारी किया जाए. नोट में साफ कहा गया है कि कोई पात्र मतदाता मतदाता सूची से बाहर नहीं रहना चाहिए और उसके मतदान के अधिकार में किसी तरह की बाधा नहीं होनी चाहिए. अधिकारियों को जल्दबाजी में नकारात्मक फैसला नहीं लेने और ERO स्तर पर पूरी जांच सुनिश्चित करने को कहा गया है.

BLO घर जाकर जुटाएंगे दस्तावेज

यह प्रक्रिया 26 सितंबर को चुनाव आयोग के फैसले के तहत लागू की जा रही है. ‘अनमैप्ड’ या ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ के नोटिस पाने वाले मतदाताओं को अब हर मामले में व्यक्तिगत सुनवाई के लिए बुलाना जरूरी नहीं होगा. बूथ लेवल अधिकारी यानी BLO ऐसे मतदाताओं के घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे और उन्हें ECINet पर अपलोड करेंगे. इसके आधार पर ERO फैसला लेगा. जिन लोगों को पहले ही सुनवाई के लिए बुलाया गया है, उन्हें फोन या व्हाट्सऐप के जरिए बताया जाएगा कि उन्हें व्यक्तिगत रूप से आने की जरूरत नहीं है.

3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप

महाराष्ट्र में मतदाताओं की मदद के लिए 3, 4, 10 और 11 अक्टूबर को विशेष कैंप लगाए जाएंगे. अगर BLO के घर जाने के बाद भी किसी मामले का समाधान नहीं होता है, तो संबंधित व्यक्ति को दस्तावेज जमा करने का एक और मौका दिया जाएगा. इसके बाद जरूरत पड़ने पर सुनवाई होगी और आदेश जारी किया जाएगा. इसके बाद ही किसी मतदाता का नाम सूची से हटाने की कार्रवाई की जा सकेगी.

महाराष्ट्र में 1.22 करोड़ रिकॉर्ड जांच के दायरे में

महाराष्ट्र की ड्राफ्ट मतदाता सूची में 1.22 करोड़ रिकॉर्ड सत्यापन के लिए चिन्हित किए गए हैं. इनमें 62.48 लाख मामले रिश्तेदारों की जानकारी में अंतर से जुड़े हैं, जबकि 59.75 लाख मतदाताओं का पिछली मतदाता सूची में किसी रिश्तेदार से मिलान नहीं हो पाया है. मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के नोट के अनुसार, ECINet और BLO ऐप में जरूरी बदलाव अभी चुनाव आयोग के स्तर पर किए जा रहे हैं. इस पूरी प्रक्रिया के बीच आयोग का विशेष अभियान उन मतदाताओं को वापस सूची में लाने पर केंद्रित है, जो SIR के दौरान किसी वजह से बाहर रह गए हैं.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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