2 अक्टूबर 2026, 11:28 AM
हर खबर, हर पल
हमारे बारे मेंसंपर्क
उत्तर प्रदेश

2027 से पहले बसपा ने अयोध्या में दिखाई ताकत:प्रबुद्ध संवाद में उमड़ी भीड़, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने साधा विपक्ष पर निशाना; बोले- जल्द होगी उम्मीदवार की घोषणा

2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की सक्रियता ने सियासी समीकरणों में चर्चा बढ़ा दी है। क्योंकि रविवार को पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बबलू की ओर से आयोजित प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की मौजूदगी और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को पार्टी की क्षेत्र में संगठनात्मक सक्रियता के संकेत के तौर पर देख

2027 से पहले बसपा ने अयोध्या में दिखाई ताकत:प्रबुद्ध संवाद में उमड़ी भीड़, प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल ने साधा विपक्ष पर निशाना; बोले- जल्द होगी उम्मीदवार की घोषणा
स्रोत: Dainik Bhaskar Uttar Pradesh
शेयर करेंWhatsAppFacebook
2027 विधानसभा चुनाव से पहले बसपा की सक्रियता ने सियासी समीकरणों में चर्चा बढ़ा दी है। क्योंकि रविवार को पूर्व विधायक जितेंद्र सिंह बबलू की ओर से आयोजित प्रबुद्ध संवाद कार्यक्रम में बसपा के प्रदेश अध्यक्ष विश्वनाथ पाल की मौजूदगी और बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी को पार्टी की क्षेत्र में संगठनात्मक सक्रियता के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। बबलू की उम्मीदवारी को लेकर भी कार्यक्रम में सवाल उठे, जिस पर पाल ने जल्द घोषणा के संकेत दिए। विश्वनाथ पाल ने दावा किया कि कार्यक्रम में करीब 8 से 10 हजार लोग पहुंचे और जितेंद्र सिंह बबलू को आशीर्वाद दिया। उन्होंने कहा कि बबलू की उम्मीदवारी की घोषणा जल्द की जाएगी और उन्हें बहन जी का आशीर्वाद मिलने के भी संकेत हैं। बीकापुर में बसपा का राजनीतिक आधार नया नहीं है। 2007 के विधानसभा चुनाव में जितेंद्र सिंह बबलू ने बसपा के टिकट पर जीत दर्ज की थी। 2017 में भी बबलू बसपा प्रत्याशी के तौर पर करीब 49.7 हजार वोट हासिल कर दूसरे नहीं, बल्कि तीसरे स्थान पर रहे थे। 2022 में बसपा का वोट घटकर करीब 21.4 हजार रह गया। भाजपा के लिए क्यों अहम है बीकापुर? 2022 में बीकापुर में भाजपा के अमित सिंह चौहान को 1,07,268 और सपा के फिरोज खान को 1,01,708 वोट मिले थे। दोनों के बीच अंतर करीब 5,560 वोट रहा, जबकि बसपा को 21,385 वोट मिले थे। ऐसे में 2027 में बसपा का अपना पारंपरिक वोट आधार कितना सक्रिय होता है और उसका असर मुकाबले पर किस तरह पड़ता है, यह बीकापुर के चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण विषय रहेगा। कार्यक्रम में पाल ने चंद्रशेखर आजाद की राजनीतिक सक्रियता पर भी सवाल उठाए और मिल्कीपुर उपचुनाव का जिक्र किया। वहीं पीडीए के मुद्दे पर उन्होंने बैकलॉग भर्ती, एससी आरक्षण और पदोन्नति में आरक्षण जैसे विषयों को उठाया। पाल ने संविधान को लेकर कहा कि बसपा बाबा साहब के संविधान को ईमानदारी से लागू करने की बात करती है। उन्होंने 2027 में बड़ी संख्या में सीटें जीतने और 2007 की तर्ज पर सरकार बनाने का दावा भी किया। इस तरह बीकापुर में बबलू की सक्रियता के साथ बसपा ने अपने पुराने राजनीतिक आधार को फिर से संगठित करने का संदेश दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि कार्यक्रम में दिखाई गई भीड़ और संगठनात्मक सक्रियता आने वाले महीनों में वोटों के स्तर पर कितनी तब्दील होती है।
समाचार स्रोत

यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

मूल स्रोत देखें ↗