2 अक्टूबर 2026, 9:23 AM
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Organ Donation: बेटे की मौत का दर्द भूल मां ने पेश की मिसाल, 7 लोगों को दे दी नई जिंदगी

Mumbai Organ Donation 18 Year Old Boy: मुंबई में एक मां ने अपने 18 साल के बेटे को खोने के दर्द के बीच ऐसा फैसला लिया, जिससे सात लोगों को नई जिंदगी मिल सकी. KEM Hospital की प्रोफेसर डॉ. करुणा नाडकर्णी ने ब्रेन डेड के बाद अपने बेटे सौमिल के हार्ट, लिवर, किडनी और कॉर्निया डोन

Organ Donation: बेटे की मौत का दर्द भूल मां ने पेश की मिसाल, 7 लोगों को दे दी नई जिंदगी
स्रोत: abp news world
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Mumbai Organ Donation 18 Year Old Boy: मुंबई में एक मां ने अपने 18 साल के बेटे को खोने के दर्द के बीच ऐसा फैसला लिया, जिससे सात लोगों को नई जिंदगी मिल सकी. KEM Hospital की प्रोफेसर डॉ. करुणा नाडकर्णी ने ब्रेन डेड के बाद अपने बेटे सौमिल के हार्ट, लिवर, किडनी और कॉर्निया डोनेट कर दिए. सौमिल की तीन साल तक जिंदगी बचाने की कोशिश चली, लेकिन शनिवार को ब्रेन डेथ के बाद उसके ऑर्गन्स डोनेट किए गए. उसके ऑर्गन्स से सात लोगों का इलाज संभव हुआ. यह मुंबई में इस साल का 47वां कैडेवरिक ऑर्गन डोनेशन रहा.

डॉ. करुणा नाडकर्णी ऑक्यूपेशनल थेरेपी की प्रोफेसर हैं. उन्होंने बताया कि सौमिल एक सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल हो गया था. यह हादसा गोरेगांव-मुलुंड लिंक रोड पर हुआ था. हादसे के समय सौमिल एक टू-व्हीलर पर पीछे बैठा था, तभी एक ऑटो रिक्शा की टक्कर हो गई. इस हादसे में उसके दिमाग में गंभीर चोट आई थी.

हादसे के बाद शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी

डॉ. नाडकर्णी ने बताया कि हादसे के बाद सौमिल के शरीर के दाहिने हिस्से में कमजोरी आ गई थी और उसकी मूवमेंट भी प्रभावित हुई थी. हादसे के समय वह 11वीं क्लास में पढ़ रहा था और इंजीनियर बनने का सपना देखता था. गंभीर चोट के बावजूद उसने जिंदगी के लिए अपनी लड़ाई जारी रखी. सौमिल थोड़ा-बहुत चल पाने लगा था और उसका इलाज मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में चल रहा था. डॉ. नाडकर्णी ने बताया कि उनका बेटा एक फाइटर था और कई सर्जरी के बाद भी मुस्कुराता रहता था. परिवार ने भी उसके ठीक होने की उम्मीद नहीं छोड़ी थी.


खोपड़ी की सर्जरी के बाद हुआ ब्रेन इंफेक्शन

सौमिल के शुरुआती इलाज के दौरान खोपड़ी के क्षतिग्रस्त हिस्से को दोबारा बनाने के लिए क्रैनियोप्लास्टी प्लेट लगाई गई थी. हालांकि, इस साल की शुरुआत में उसके दिमाग में इंफेक्शन हो गया. इसके बाद डॉक्टरों को यह प्लेट निकालनी पड़ी. प्लेट हटाए जाने के बाद करीब तीन महीने तक सौमिल का एंटीबायोटिक्स से इलाज चला. इसके बाद पिछले हफ्ते उसकी रिविजन सर्जरी की गई. परिवार को उम्मीद थी कि इस प्रक्रिया के बाद उसकी हालत में सुधार होगा, लेकिन सर्जरी के बाद गंभीर जटिलताएं सामने आईं.

सर्जरी के बाद ब्रेनस्टेम को हुआ नुकसान

डॉ. नाडकर्णी के मुताबिक, सर्जरी के बाद सौमिल के ब्रेनस्टेम को नुकसान पहुंचा और इसके चलते उसकी ब्रेन डेथ हो गई. उन्होंने बताया कि प्रक्रिया के दौरान दिमाग में दबाव में बदलाव आया, जिसे उसका दिमाग संभाल नहीं सका. बेटे की मौत के बाद परिवार के लिए यह बेहद मुश्किल समय था. इसके बावजूद डॉ. नाडकर्णी ने उसके ऑर्गन्स डोनेट करने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि उनका बेटा उनके लिए बेहद अनमोल था और वह उसे यूं ही जाने नहीं देना चाहती थीं. उनके ऑर्गन्स अब सात लोगों के काम आ रहे हैं.


सात लोगों को मिले सौमिल के ऑर्गन्स

ब्रेन डेथ के बाद सौमिल का हार्ट, लिवर, किडनी और कॉर्निया डोनेट किया गया. इन ऑर्गन्स को सात लोगों में ट्रांसप्लांट किया गया. इस तरह सौमिल की जिंदगी खत्म होने के बाद भी उसके ऑर्गन्स दूसरे लोगों के लिए जिंदगी की उम्मीद बन गए. डॉ. नाडकर्णी ने कहा कि ऑर्गन डोनेट करने वाले परिवारों के लिए यह बात एक तरह का सहारा बनती है कि उनके अपने की जिंदगी का एक हिस्सा दूसरे लोगों के शरीर में जिंदा रहता है. सौमिल के मामले में भी परिवार ने इसी सोच के साथ यह फैसला लिया.

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इस साल 18 साल के युवक का दूसरा ऑर्गन डोनेशन

यह इस साल 18 साल की उम्र में ऑर्गन डोनेशन का दूसरा मामला है. इससे पहले इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे. मेहरकृष्णा के परिवार ने भी उसके ऑर्गन्स डोनेट किए थे. मेहरकृष्णा के पिता कोलेपारा चंद्रशेखर ने बताया कि उनका बेटा पुणे में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था. उसे अचानक दौरे पड़ने लगे और करीब एक महीने पहले मुलुंड के फोर्टिस अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई. बेटे की मौत के बाद परिवार ने उसका लिवर, स्मॉल बॉवेल, कॉर्निया और स्किन डोनेट करने का फैसला किया. चंद्रशेखर ने कहा कि उन्होंने अपने करीबी को जिंदगी के लिए संघर्ष करते हुए देखा था और वे नहीं चाहते थे कि किसी दूसरे परिवार को भी उसी दर्द से गुजरना पड़े.

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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