3 अक्टूबर 2026, 4:44 PM
हर खबर, हर पल
हमारे बारे मेंसंपर्क
राष्ट्रीय

UP में विधानसभा चुनाव से पहले UCC लागू नहीं होगा:BJP रिस्क नहीं लेगी; मुस्लिम वोटर पूरी तरह सपा में जा सकते

2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू नहीं होगी। भाजपा नहीं चाहती है कि UCC लागू होने के बाद एकमुश्त मुस्लिम वोट सपा की तरफ शिफ्ट हो जाए। पार्टी के नेता भी मान रहे हैं कि चुनाव से पहले UCC लागू करना भाजपा के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वह मान रहे हैं कि UCC का दांव 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले चलना चा

UP में विधानसभा चुनाव से पहले UCC लागू नहीं होगा:BJP रिस्क नहीं लेगी; मुस्लिम वोटर पूरी तरह सपा में जा सकते
स्रोत: dainik bhasker category
शेयर करेंWhatsAppFacebook
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू नहीं होगी। भाजपा नहीं चाहती है कि UCC लागू होने के बाद एकमुश्त मुस्लिम वोट सपा की तरफ शिफ्ट हो जाए। पार्टी के नेता भी मान रहे हैं कि चुनाव से पहले UCC लागू करना भाजपा के लिए जोखिम भरा हो सकता है। वह मान रहे हैं कि UCC का दांव 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले चलना चाहिए। संघ, सरकार और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच सहमति बन चुकी है। यूपी के चुनाव में बड़े मुद्दे हिंदुत्व, सुशासन और राष्ट्रवाद ही रहेंगे और चेहरा मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ होंगे। यूपी में UCC अभी क्यों लागू नहीं हो सकेगा, ये 8 पॉइंट में समझिए… 1. लंबी प्रक्रिया और चुनाव में समय कम बचा: UCC लागू करने के लिए पहले एक ड्राफ्टिंग कमेटी बनानी होगी। फिर लोगों के सुझाव लिए जाएंगे। रिपोर्ट तैयार करने में 2 से 3 महीने का समय लगेगा। इसके बाद बिल को राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अनुमति मिलने में भी लंबा समय लगता है। यूपी विधानसभा चुनाव में 6 महीने से भी कम समय बचा है। चुनाव फरवरी-मार्च 2027 में हो सकते हैं। इतने कम समय में यह पूरी विधिक प्रक्रिया हो पाना मुमकिन नहीं है। 2. नफा-नुकसान का सटीक आकलन नहीं हो सका: संघ, सरकार और भाजपा ने अभी ऐसा कोई सर्वे नहीं किया है कि चुनाव से ठीक पहले UCC लागू करने से सियासी फायदा होगा या नुकसान उठाना पड़ सकता है। 3. मुस्लिम वोटर के एकजुट होने का जोखिम: अगर अभी UCC लाया जाता है, तो राज्य का मुस्लिम वोटबैंक पूरी तरह सपा के पाले में चला जाएगा। इससे मुस्लिम वोट में सेंधमारी की कोशिश कर रही बसपा-एआईएमआईएम को झटका लगेगा। इसका भाजपा को नुकसान और विपक्ष को सीधा फायदा होने के आसार हैं। 4. अगड़ी-पिछड़ी जातियां भाजपा अपने साथ मान रही: प्रदेश में भाजपा के साथ रालोद, सुभासपा, निषाद पार्टी और अपना दल (एस) जैसे मजबूत पिछड़ी और अति-पिछड़ी जातियों के प्रभाव वाले दल मौजूद हैं। सपा के साथ सिर्फ कांग्रेस है। ऐसे में अगड़ी और पिछड़ी जातियों का बड़ा वर्ग पहले से ही भाजपा के साथ है, इसलिए फिलहाल UCC जैसे आक्रामक मुद्दे की जरूरत महसूस नहीं हो रही है। 5. दूसरे राज्यों के असर देखेंगे: सरकार चाहती है कि उत्तराखंड के अलावा कुछ और बड़े राज्य UCC को जमीन पर पूरी तरह लागू करें। वहां इसके असर, सामाजिक प्रतिक्रिया और कानूनी अड़चनों का आकलन किया जाए। इसके बाद ही यूपी जैसे बड़े राज्य में इसे लागू करने का जोखिम लिया जाए। 6. 2029 के लिए बड़ा मुद्दा बचाकर रखना: रणनीतिकारों का मानना है कि 2029 के आम चुनाव के लिए भाजपा यूपी के हाथ में एक ऐसा बड़ा राष्ट्रीय मुद्दा रखना चाहती है, जिससे माहौल बनाया जा सके। 7. केंद्र के कदम के बाद ही राज्य की पहल: सूत्रों का कहना है कि सरकार का स्पष्ट मत है कि पहले केंद्र सरकार संसद में राष्ट्रीय स्तर पर UCC बिल पेश करे, उसके बाद ही उसकी तर्ज पर उत्तर प्रदेश विधानसभा में राज्य स्तरीय UCC बिल लाया जाए। 8. योगी के चेहरे पर ही चुनाव लड़ने की तैयारी: भाजपा नेतृत्व का मानना है कि यूपी में सीएम योगी आदित्यनाथ का चेहरा खुद में ही हिंदू वोट बैंक को एकजुट करने की बड़ी ताकत रखता है। चुनाव में सरकार के काम जैसे कानून-व्यवस्था, युवाओं को रोजगार, औद्योगिक निवेश, धार्मिक स्थलों का संरक्षण, विरासत का सम्मान और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को मुख्य मुद्दा बनाना ज्यादा सुरक्षित है। पार्टी मूल मुद्दों से भटकना नहीं चाहती। दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- सरकारी विभागों में अभी कोई तैयारी नहीं उत्तर प्रदेश में कोई भी नया या बड़ा कानून लागू करने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ विधि एवं न्याय विभाग, संसदीय कार्य विभाग और राज्य विधि आयोग के साथ विचार-विमर्श करते हैं। तीनों ही प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने अभी तक UCC को लेकर कोई चर्चा नहीं की है। लिहाजा, शासन के स्तर पर UCC लागू करने को लेकर किसी भी तरह की कानूनी ड्राफ्टिंग शुरू नहीं की गई है। क्या चुनाव से पहले बन सकती है ड्राफ्टिंग कमेटी? भाजपा सूत्रों का कहना है कि अगर चुनाव प्रचार के दौरान संघ, सरकार और भाजपा संगठन को ये आभास होता है कि लोकसभा चुनाव की तर्ज पर विधानसभा चुनाव में भी धर्म के बजाय 'जाति' ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बन रही है, तो अंतिम क्षणों में सरकार केवल एक ड्राफ्टिंग कमेटी के गठन की घोषणा कर सकती है, ताकि सांस्कृतिक राष्ट्रवाद के मुद्दे को गर्माया जा सके। एक्सपर्ट बोले- UCC का सबसे ज्यादा असर यूपी पर ही पड़ेगा राजनीतिक विश्लेषक वीरेंद्रनाथ भट्ट के मुताबिक, UCC का सबसे बड़ा असर मुस्लिम समुदाय से जुड़े विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों पर पड़ेगा। इसलिए इसका राजनीतिक असर भी सबसे ज्यादा यूपी में देखने को मिल सकता है। अमित शाह के ऐलान के बाद UCC लागू होना तय माना जा रहा है, लेकिन इसे कब लागू किया जाता है, ये अहम होगा। 'UCC आया तो धर्म बनाम जाति होगा चुनाव' वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक योगेश मिश्र कहते हैं- गृह मंत्री अमित शाह ने जब सार्वजनिक घोषणा की है, तो 2029 से पहले यूपी में UCC लागू होना तय है। अगर 2027 से पहले UCC लाया जाता है तो विधानसभा चुनाव में भाजपा को बड़ा सियासी लाभ मिल सकता है। यूपी में UCC लागू होने का नंबर गेम समझिए उत्तर प्रदेश में 2017 से भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार है। इसके साथ ही विधानमंडल के दोनों सदनों-विधानसभा और विधान परिषद में पार्टी के पास UCC विधेयक को आसानी से पारित कराने के लिए पर्याप्त संख्या बल मौजूद है। 13 सितंबर को अमित शाह के UCC वाले बयान के बाद अटकलें तेज हुई कि भाजपा 2027 के विधानसभा चुनाव में हिंदू वोट बैंक को साधने के लिए UCC लागू कर सकती है। माना जा रहा था कि इससे सपा के 'पीडीए' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वाले दांव की हवा निकाली जा सकेगी। चुनाव एक बार फिर जाति के बजाय धर्म और राष्ट्रवाद के इर्द-गिर्द सिमट जाएगा। लेकिन, संघ, भाजपा और सरकार के निर्णायक मंडल की सोच इससे पूरी तरह अलग है। --------------------- ये भी पढ़ें- क्या चुनाव से पहले यूपी में लागू होगा UCC:भाजपा को फायदा या नुकसान; इससे क्या बदलेगा, क्या लिव-इन को भी कानूनी दर्जा मिलेगा गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने की अटकलें तेज हैं। इससे पहले उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है। मध्यप्रदेश, असम और गुजरात में बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी के इंतजार में है। यूपी में अभी लिव-इन (बिना शादी किए साथ रहना) को लेकर कोई कानून नहीं है। यहां UCC कब तक लागू हो सकता है? सरकार में इसे लेकर क्या चल रहा है? यूपी एक्सप्लेनर में पढ़िए
समाचार स्रोत

यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

मूल स्रोत देखें ↗