13 अक्टूबर 2026, 11:26 AM
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UPI MDR फ्रेमवर्क में संशोधन जरूरी, रिपोर्ट में IIT बॉम्बे

अगर आप भी UPI के जरिए दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पेमेंट करते हैं, तो इससे जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है. IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नियमों में बदलाव करने की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने क

UPI MDR फ्रेमवर्क में संशोधन जरूरी, रिपोर्ट में IIT बॉम्बे
स्रोत: abp news world
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अगर आप भी UPI के जरिए दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर पेमेंट करते हैं, तो इससे जुड़ी यह खबर आपके लिए अहम है. IIT बॉम्बे की एक रिपोर्ट में UPI पेमेंट पर प्रस्तावित मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) के नियमों में बदलाव करने की सिफारिश की गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, डिजिटल पेमेंट को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए ऐसा चार्ज तय करना जरूरी है, जिससे कारोबारियों पर ज्यादा बोझ न पड़े और लोगों का UPI पर भरोसा भी बना रहे.

दरअसल, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने कुछ UPI लेनदेन पर MDR लागू करने का प्रस्ताव दिया है. हालांकि, IIT बॉम्बे की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस व्यवस्था को लागू करने से पहले इसमें सुधार किया जाना चाहिए. इस रिपोर्ट में खासतौर पर बड़े कारोबारियों से शुल्क लेने, जरूरी सेवाओं और लोन की EMI के पेमेंट को राहत देने की सुझाव दी गई है.

किन कारोबारियों से MDR वसूलने का सुझाव?

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि सालाना 50 करोड़ रुपये या उससे ज्यादा कारोबार करने वाले व्यापारियों पर MDR लगाने पर विचार किया जाए. खासतौर पर इससे छोटे कारोबारियों को एक्स्ट्रा चार्ज के बोझ से बचाने में मदद मिल सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक, इस तरीके से NPCI के प्रस्तावित MDR से मिलने वाली करीब 90% रकम हासिल की जा सकती है.

हालांकि, ई-कॉमर्स कंपनियों से भी UPI पेमेंट पर उचित शुल्क लेने का सुझाव दिया गया है, क्योंकि ऑनलाइन खरीदारी में नकद पेमेंट की सुविधा लिमिट में होती है और डिजिटल पेमेंट का इस्तेमाल काफी ज्यादा होता है.

किन UPI भुगतानों पर शुल्क से राहत देने की सिफारिश?

रिपोर्ट में UPI के जरिए लोन की EMI चुकाने और कर्ज की वसूली से जुड़े भुगतानों को MDR से बाहर रखने की सिफारिश की गई है, ताकि लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ न पड़े. डिजिटल माध्यम से कर्ज चुकाना नकद या चेक के मुकाबले ज्यादा आसान और कम खर्चीला हो सकता है.

 UPI शुल्क पर फैसला कौन करेगा?

रिपोर्ट में सुझाव दिया गया है कि UPI पर MDR से जुड़े फैसले भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम 2007 के तहत लेने चाहिए. इसका मकसद शुल्क व्यवस्था को साफ और संतुलित बनाना है, ताकि आम लोगों और व्यापारियों के बीच UPI की लोकप्रियता बनी रहे. 

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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