अखिलेश के लिए आजम क्यों जरूरी:क्या 2027 चुनाव से पहले जेल से बाहर आएंगे; पश्चिम की 30 सीटों पर असर
जेल में बंद सपा के कद्दावर नेता आजम खान से अखिलेश यादव ने 45 मिनट तक सियासी बातें की। आजम भले ही सलाखों के पीछे हैं, लेकिन वह अखिलेश के लिए 2 वजह से बेहद जरूरी हो जाते हैं। पहली- वो पश्चिम यूपी की 25 से 30 सीटों पर असर रखते हैं। दूसरी- ओवैसी मुस्लिमों के बीच एक्टिव हैं। उन्हें एकजुट रखने के लिए आजम बड़ा चेहरा हैं। सबसे बड़ा सवाल यही

जेल में बंद सपा के कद्दावर नेता आजम खान से अखिलेश यादव ने 45 मिनट तक सियासी बातें की। आजम भले ही सलाखों के पीछे हैं, लेकिन वह अखिलेश के लिए 2 वजह से बेहद जरूरी हो जाते हैं। पहली- वो पश्चिम यूपी की 25 से 30 सीटों पर असर रखते हैं। दूसरी- ओवैसी मुस्लिमों के बीच एक्टिव हैं। उन्हें एकजुट रखने के लिए आजम बड़ा चेहरा हैं। सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 2027 के चुनाव से पहले आजम खान जेल से बाहर आ सकते हैं? जानकार मानते हैं कि अगर आजम जेल से बाहर आए, तो चुनावी परिदृश्य बदल सकता है। लेकिन, ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) की ओर से दर्ज कराए गए ताजा केस आजम के जेल से बाहर आने में रुकावट बन सकते हैं। फिलहाल वह हज समिति की जमीन को बेचने में 2.08 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान कराने के आरोप में घिरे हैं। इस मामले में विजिलेंस ने उनके खिलाफ लखनऊ में FIR दर्ज कराई है। वहीं, 2 पैन कार्ड के मामले में बेटे अब्दुल्ला की 7 साल की सजा MP-MLA सेशन कोर्ट से निरस्त होने से लोगों की उम्मीदें बढ़ गई हैं। इसी आधार पर वह पैन कार्ड मामले में हाईकोर्ट गए हैं। आजम इस केस में 17 नवंबर, 2025 से बेटे अब्दुल्ला के साथ रामपुर जेल में कैद काट रहे हैं। पढ़िए रिपोर्ट… आजम को 23 सितंबर, 2025 को सीतापुर जेल से रिहा कर दिया गया था। उनके ऊपर चल रहे मामलों में जमानत मिल गई थी। हालांकि, 55 दिन बाद ही 17 नवंबर को दो पैन कार्ड मामले में 7 साल की सजा सुना दी गई। आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को फिर जेल भेज दिया गया था। सजा बढ़ाकर 10 साल कर दी गई। अब इस मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला रिजर्व है। अगर जमानत मिलती है, तो क्या आजम खान बाहर आ पाएंगे? सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील शारिक अब्बासी कहते हैं- इलाहाबाद हाईकोर्ट में फैसला रिजर्व हो चुका है। अगर चुनाव से पहले आजम के पक्ष में फैसला आता है और कोर्ट उन्हें जमानत देती है। तो पुलिस के पास लखनऊ और रामपुर में पीसी एक्ट (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988) के तहत दर्ज मामलों में बी-वारंट हासिल करने का ऑप्शन रहेगा। अगर पुलिस वारंट नहीं ले पाती, तब आजम और अब्दुल्ला दोनों जेल से बाहर आ सकेंगे। 2 महीने में 2 नए मुकदमे 17 नवंबर, 2025 को रामपुर जिला जेल जाने के बाद से आजम के खिलाफ 2 और मामले दर्ज किए गए हैं। आजम ‘वजनदार’, इसलिए अखिलेश पहुंच रहे बार-बार जेल से बाहर आए, तब भी आजम-अब्दुल्ला का चुनाव लड़ना मुश्किल अब 22 अक्टूबर को अखिलेश रामपुर पहुंचे। रामपुर जिला जेल में आजम से मिलने के बाद वह उनके घर पर परिवार से भी मिले। इस दौरान चर्चा हो सकती है कि सपा किन सीट पर किसे चेहरा बनाए। क्योंकि, आजम और उनके बेटे अब्दुल्ला अगर जेल से बाहर आ भी जाते हैं, तो भी वे 2027 का चुनाव नहीं लड़ सकते। इसको कानूनी कारणों से समझते हैं- ओवैसी से गठबंधन नहीं, इसलिए आजम ज्यादा अहम हुए जेल में होने के बावजूद सपा के लिए आजम महत्वपूर्ण हैं। खासकर ओवैसी के चुनावी मैदान में सक्रिय होने के बाद मुस्लिम वोटर को जोड़े रखने के लिए आजम ज्यादा अहम हो जाते हैं। ओवैसी सपा से गठबंधन चाहते थे, लेकिन अब वो सपा से अलग चुनाव लड़ने जा रहे हैं। आजम का मुरादाबाद और बरेली जिले में ज्यादा प्रभाव है। इन दोनों जिलों के बाहर भी सपा आजम खान की सलाह पर उम्मीदवार तय करती रही है। इसमें सुल्तानपुर की इसौली सीट और कासगंज की पटियाली विधानसभा सीट पर आजम की पैरवी से टिकट मिलते रहे हैं। अब चर्चा है कि चुनाव से ठीक पहले दोनों नेता 25 से 30 सीटों के कैंडिडेट को लेकर चर्चा कर सकते हैं। इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- ---------------------------- यह खबर भी पढ़ें- भाजपा को राजा भैया की जरूरत क्यों पड़ी, कुंडा में क्षत्रिय 6%, दलित 26% फिर भी 33 साल से विधायक राजा भैया और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी की मुलाकात की खूब चर्चा हो रही है। इसे हालिया MLC चुनाव में समर्थन जुटाने से जोड़ा जा रहा है। राज्यसभा चुनाव या MLC चुनाव हो, राजा भैया बिना शर्त भाजपा को समर्थन देते रहे हैं। तो अचानक भाजपा को ऐसी क्या जरूरत आ पड़ी कि खुद प्रदेश अध्यक्ष को राजा भैया से मिलने उनके घर जाना पड़ा? इस मुलाकात के मायने क्या हैं? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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