3 अक्टूबर 2026, 6:55 PM
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अखिलेश भाजपा को उसके ही फॉर्मूले से हराना चाह रहे:‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल अपनाया; 2022 के मुकाबले दोगुना वोट पाने का टारगेट

2027 विधानसभा चुनाव में सीएम योगी को हराने के लिए अखिलेश भाजपा का ही फॉर्मूला अपना रहे हैं। उन्होंने अपने सभी बूथ लेवल एजेंटों (BLA) से ऐसे परिवारों की मजबूत घेराबंदी करने को कहा है, जिनके आधे या कुछ सदस्यों ने 2022 विधानसभा चुनाव में सपा को वोट दिया था। जबकि, बाकी सदस्य वोट डालने ही नहीं गए थे। BLA की जिम्मेदारी होगी कि इन परिवार

अखिलेश भाजपा को उसके ही फॉर्मूले से हराना चाह रहे:‘पन्ना प्रमुख’ मॉडल अपनाया; 2022 के मुकाबले दोगुना वोट पाने का टारगेट
स्रोत: dainik bhasker category
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2027 विधानसभा चुनाव में सीएम योगी को हराने के लिए अखिलेश भाजपा का ही फॉर्मूला अपना रहे हैं। उन्होंने अपने सभी बूथ लेवल एजेंटों (BLA) से ऐसे परिवारों की मजबूत घेराबंदी करने को कहा है, जिनके आधे या कुछ सदस्यों ने 2022 विधानसभा चुनाव में सपा को वोट दिया था। जबकि, बाकी सदस्य वोट डालने ही नहीं गए थे। BLA की जिम्मेदारी होगी कि इन परिवारों के बाकी सदस्य भी 2027 चुनाव में सपा को वोट करने जाएं। इस पर ठीक से काम करने के लिए गाइडलाइन भी तय कर दी गई हैं। कुछ इसी तरह की जिम्मेदारी भाजपा में ‘पन्ना प्रमुख’ की होती है। इसके अलावा पार्टी ने हर बूथ पर 400 नए सदस्य बनाने का लक्ष्य रखा है। यूपी में कुल 1.77 लाख बूथ हैं। इस लिहाज से सपा का टारगेट 7 करोड़ नए वोटर बनाने का है। अगर 2022 के चुनाव नतीजों पर पर नजर डालें, तो सपा को 2.95 करोड़ (32.06%) वोट मिले थे। यानी इस बार करीब ढाई गुना वोट बढ़ाने का लक्ष्य है। ‘भाजपा के 27 हजार घटाओ, सपा के 27 हजार बढ़ाओ’ अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को हर विधानसभा सीट पर भाजपा के 27 हजार वोट कम करने और सपा के 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य दिया है। उन्होंने कहा कि अगर पार्टी यह लक्ष्य हासिल कर लेती है तो 2027 में सपा की सरकार बनने से कोई नहीं रोक सकता। टारगेट पूरा करने के लिए प्रदेश स्तर के नेताओं को हफ्ते में 4 दिन संगठन के लिए देने को कहा गया है। ब्लॉक और बूथ स्तर के पदाधिकारियों की जिम्मेदारियां भी तय की गई हैं। इसके अलावा 1 जुलाई से सपा का हाईटेक ‘डिजिटल सदस्यता अभियान’ चल रहा है। पार्टी कागजी फॉर्म की जगह मोबाइल एप, डिजिटल डेटाबेस और वोटर लिस्ट के मिलान के जरिए बूथ स्तर पर संगठन मजबूत करने पर फोकस कर रही है। 'PDA स्वाभिमान एप' से सदस्यता और वेरिफिकेशन सदस्यता अभियान के लिए पार्टी की तकनीकी टीम ने एक खास एप तैयार किया है। ये गूगल एप प्ले स्टोर पर उपलब्ध नहीं है। इसे पार्टी मुख्यालय में केवल पदाधिकारियों के मोबाइल में इंस्टॉल किया जा रहा है। एप इस तरह से काम करता है- सपा की काट के लिए भाजपा के ‘पन्ना प्रमुख’ एक्टिव सपा की नए वोटर जोड़ने की स्ट्रैटजी के खिलाफ भाजपा के पन्ना प्रमुख एक्टिव हो चुके हैं। इन्हें मतदाता सूची के एक पन्ने की जिम्मेदारी दी जाती है। वे पन्ने पर मतदाताओं से व्यक्तिगत संपर्क रखते हैं, उनकी जानकारी जुटाते हैं और चुनाव के दिन उन्हें मतदान केंद्र तक लाने की कोशिश करते हैं। यानी सपा जहां एप, डिजिटल डेटाबेस और वोटर मैपिंग पर जोर दे रही है, वहीं भाजपा का मॉडल जमीनी संपर्क, व्यक्तिगत रिश्ते और लगातार फॉलोअप पर टिका है। भाजपा की बूथ मैनेजमेंट रणनीति में ‘पन्ना प्रमुख’ अहम कड़ी हैं। PDA फैक्टर का डिजिटल गठजोड़ इस अभियान का मुख्य आधार PDA (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) सामाजिक समीकरण है। पार्टी युवाओं, महिलाओं, किसानों, मजदूरों और व्यापारियों को साथ लेकर अपने कोर वोट बैंक का विस्तार करने की रणनीति पर काम कर रही है। डिजिटल डेटा और बूथ स्तर की जमीनी मेहनत से सपा 2027 में सत्ता वापसी की मजबूत नीव रखने की कोशिश कर रही है। ----------------------------------------- ये खबर भी पढ़ें… सपा-कांग्रेस में पेंच कहां फंस रहा: गठबंधन फाइनल तो सीट बंटवारा क्यों नहीं; ‘सब ठीक है’ कहकर अखिलेश क्या छुपा रहे करीब एक हफ्ते तक सपा और कांग्रेस नेताओं में गठबंधन को लेकर तीखी बयानबाजी होती रही। कयास लगाए जाने लगे कि गठबंधन टूटने वाला है। फिर रविवार (27 सितंबर) को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बयान आया। बोले- हम ऊपर-ऊपर से लड़ रहे हैं, अंदर से एक हैं। ये हमारी रणनीति का हिस्सा है। अब सवाल ये है कि इस बयानबाजी से हासिल क्या होगा? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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