ओला-उबर से 11% सस्ती पड़ रही 'भारत टैक्सी':यात्री खुश, ड्राइवर नाराज; बोले- 1 किमी पर सिर्फ 4-5 रुपए बच रहे, कैसे चलेगा घर
यूपी में सरकारी कैब सर्विस ‘भारत टैक्सी’ की शुरुआत हो चुकी है। ये 5 शहरों- लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर और वाराणसी में चल रही है। आने वाले दिनों में इसे प्रदेश के बाकी 70 जिलों में भी लॉन्च किया जाएगा। ‘भारत टैक्सी’ यात्रियों के लिए ओला-उबर के मुकाबले काफी सस्ती है। दावा है कि भारत टैक्सी एप ड्राइवरों की कमाई भी बढ़ाएगी। कंपनी

यूपी में सरकारी कैब सर्विस ‘भारत टैक्सी’ की शुरुआत हो चुकी है। ये 5 शहरों- लखनऊ, प्रयागराज, गोरखपुर, कानपुर और वाराणसी में चल रही है। आने वाले दिनों में इसे प्रदेश के बाकी 70 जिलों में भी लॉन्च किया जाएगा। ‘भारत टैक्सी’ यात्रियों के लिए ओला-उबर के मुकाबले काफी सस्ती है। दावा है कि भारत टैक्सी एप ड्राइवरों की कमाई भी बढ़ाएगी। कंपनी कोई कमीशन नहीं काटेगी। इससे जुड़ने वाले ड्राइवरों को ₹5 लाख का बीमा भी दिया जाएगा। हालांकि, इन सुविधाओं के बावजूद कैब ड्राइवर खुश नहीं हैं। उनका कहना है कि ‘भारत टैक्सी’ सब्सक्रिप्शन के लिए हर दिन 50 रुपए लेता है। गाड़ी का फ्यूल खर्च साढ़े 5 रुपए प्रति किमी है। 10-11 रुपए प्रति किमी के हिसाब से पैसे दे रहा है। ऐसे में एक किलोमीटर पर सिर्फ 4 से 5 रुपए बच रहे हैं। इससे घर खर्च कैसे चलेगा? दैनिक भास्कर ने लखनऊ के कैब ड्राइवरों से बात की। उन्होंने भारत टैक्सी से जुड़ने के अपने अनुभव और उम्मीदों के बारे में क्या-कुछ बताया, आइए समझते हैं… पहले जानिए ओला-उबर से कैसे अलग है भारत टैक्सी देश में ओला, उबर और रैपिडो जैसी कैब सेवाएं प्राइवेट कंपनियां चलाती हैं। जबकि ‘भारत टैक्सी’ को एक सहकारी (कोऑपरिटिव) कंपनी, सहकारी टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड चला रही है। दिल्ली, गुजरात, मुंबई और पुणे में ट्रायल के बाद अब यूपी में भी भारत टैक्सी शुरू की गई है। अब तक देशभर में करीब 8.5 लाख और यूपी में करीब 40 हजार कैब ड्राइवर इसमें रजिस्टर हो चुके हैं। ओला, उबर, रैपिडो जैसी प्राइवेट कैब कंपनियां बारिश, त्योहार या ऑफिस टाइम जैसे पीक आवर्स में किराया बढ़ा देती हैं। लेकिन, भारत टैक्सी में किराया स्थिर रखने का मॉडल बनाया गया है। मतलब, पीक आवर्स में भी सामान्य किराया ही लगेगा। प्राइवेट कंपनियां हर राइड पर कैब ड्राइवर से करीब 25 से 30% तक कमीशन लेती हैं। यानी कैब ड्राइवर को 100 रुपए की राइड मिली तो 25 से 30 रुपए कंपनी ले लेगी।। ड्राइवर के हिस्से 70-75 रुपए ही आएंगे। ड्राइवर बोले- यात्रियों को फायदा, हमारा नुकसान हो रहा हमने ग्राउंड पर ड्राइवरों से बात की, तो उन्होंने भारत टैक्सी एप की 10 शिकायतें गिना दीं। लखनऊ के लालबाग में 8 साल से कैब चला रहे रामरूप वर्मा कहते हैं- भारत टैक्सी एकदम बेकार है। ये 10 रुपए प्रति किलोमीटर का भाड़ा दे रहा है। लखनऊ में 105 रुपए किलो सीएनजी है। हमारी गाड़ी का सिर्फ फ्यूल खर्च ही साढ़े 5 रुपए प्रति किलोमीटर बैठता है। बाकी बचे 4.5 से 5 रुपए में गाड़ी की किश्त, मेंटेनेंस, टायर का खर्च। फिर हमारा घर कैसे चलेगा? रामरूप आगे कहते हैं- 5 साल पहले 10 किमी का भाड़ा 200 रुपए मिलता था, आज 100 रुपए मिल रहा है। ओला, उबर, रैपिडो सब एक जैसे हैं। उबर 8-9 रुपए प्रति किलोमीटर की राइड देता है, ऊपर से रोज का 164 रुपए (जीएसटी मिलाकर) का रिचार्ज अलग से करवाओ। 24 घंटे बाद रिचार्ज खत्म। आमतौर पर ओला और उबर में भी ड्राइवरों की स्थिति कुछ ऐसी ही है। ये कैब सर्विस प्रोवाइडर कंपनियां शहर के अंदर करीब 9 से 12 रुपए प्रति किलोमीटर के बेस फेयर पर राइड कराती हैं। इसके अलावा ड्राइवरों से 25-30% तक कमीशन या रोजाना 150-160 रुपए का फिक्स सब्सक्रिप्शन चार्ज लिया जाता है। यानी कमाई और खर्च के इस पूरे गणित के बीच आखिर में ड्राइवर ही दबता है। ‘राइड मिल नहीं रही, ₹20 हजार ‘पैनिक बटन’ पर खर्च हो रहे’ हजरतगंज में मिले अमेठी के कैब ड्राइवर दुर्गेश कुमार कहते हैं- मैं 2023 से कैब चला रहा हूं। भारत टैक्सी एप भी डाउनलोड किया है। सुना था कि पूरा पैसा मिलेगा। लेकिन, सच्चाई ये है कि अभी इस एप पर राइड ही नहीं मिल रही हैं। एप पर 10 किमी की राइड का 140-145 रुपए दिखाता है। ट्रैफिक इतना रहता है कि 50-60 रुपए ही बचते हैं। जबकि 57 हजार रुपए तो मैंने हाल ही में रोड टैक्स भरा है। दुर्गेश ने एक और बड़ी समस्या बताई। कहा- सरकार ने अब सभी कैब में 'पैनिक बटन' अनिवार्य कर दिया है, जिसकी कीमत 18 से 20 हजार रुपए आ रही है। जिनकी गाड़ियों में यह लगा है, वे बता रहे हैं कि इसका कोई उपयोग नहीं हो रहा। जब उपयोग ही नहीं है, तो गरीब ड्राइवरों पर 20 हजार का बोझ क्यों डाला जा रहा है? एप डाउनलोड किया, लेकिन अभी राइड नहीं मिल रही पॉलिटेक्निक चौराहे पर हमें सुरेंद्र मिले। वह अपनी ऑटो अलग-अलग एप के जरिए चलाते हैं। सुरेंद्र कहते हैं- रैपिडो ठीक चलता है, बाकी एप उससे पीछे हैं। भारत टैक्सी हमने डाउनलोड कर लिया है, लेकिन अभी इस पर राइड नहीं मिल रही। जैसा इसके बारे में सुना है, अगर यह उसी तरह चलता है तो अच्छा रहेगा। किसका किराया कितना? जानिए रेट लिस्ट दैनिक भास्कर की टीम ने शाम 6 बजे कमता से लखनऊ एयरपोर्ट और कमता से लुलू मॉल तक का किराया अलग-अलग एप पर एक साथ चेक किया। भारत टैक्सी का सब्सक्रिप्शन अभी सबसे सस्ता कैब ड्राइवर अलग-अलग कंपनियों का सब्सक्रिप्शन लेते हैं, जिसके बाद उन्हें तेजी से राइड मिलती हैं। उदाहरण के लिए, उबर का 24 घंटे का पास ₹139 + 18% GST है। यानी कुल ₹164। ओला का पास भी करीब इसी रेट पर है। रैपिडो का मॉडल थोड़ा अलग है। यहां ₹590 के पास पर ड्राइवर को ₹10 हजार तक की कमाई करने की सुविधा मिलती है। वहीं, भारत टैक्सी पर अभी एक दिन का पास करीब ₹50 है। शुरुआत में एप से जुड़ने वाले ड्राइवरों को स्पेशल ऑफर के तहत एक्स्ट्रा छूट भी दी जा रही है। इसलिए अलग-अलग ड्राइवरों के लिए सब्सक्रिप्शन का चार्ज भी अलग हो सकता है। भारत टैक्सी को बनाने में 8 बड़ी कंपनियों ने ₹80 करोड़ लगाया भारत टैक्सी को चलाने वाली संस्था का नाम ‘सहकार टैक्सी कोऑपरेटिव लिमिटेड’ है। इसे देश की 8 बड़ी सहकारी और वित्तीय संस्थाओं ने मिलकर शुरू किया है। इनमें NCDC, IFFCO, NAFED, अमूल, KRIBHCO, NDDB, NCEL और NABARD शामिल हैं। शुरुआत में इन सभी 8 संस्थाओं ने 10-10 करोड़ रुपए लगाए थे। यानी कंपनी को शुरू करने के लिए कुल 80 करोड़ रुपए की शुरुआती पूंजी जुटाई गई। अब भारत टैक्सी को ओला-उबर जैसी बड़ी कैब कंपनियों से मुकाबला करना है। इसके लिए कंपनी के पास करीब 300 करोड़ रुपए का फंड जुटाने की तैयारी है। इस पैसे का इस्तेमाल यात्रियों को बेहतर ऑफर देने और बाजार में अपनी जगह मजबूत करने में किया जा सकता है। ड्राइवर को ₹5 लाख की बीमा मिलेगा भारत टैक्सी से जुड़ने वाले कैब और बाइक ड्राइवर्स के लिए सहकारी कंपनी बीमा भी देती है। ----------------------------- यह खबर भी पढ़ें- एयरपोर्ट जैसा लखनऊ का गोमतीनगर रेलवे स्टेशन, AC में बैठकर ट्रेन का इंतजार ग्लास और स्टील की भव्य इमारत, प्रवेश द्वार पर चमकती विशाल LED स्क्रीनें और एयरपोर्ट जैसी चाक-चौबंद सुरक्षा…। यह लखनऊ का गोमतीनगर रेलवे स्टेशन है। स्टेशन परिसर में कदम रखते ही आपको भारतीय रेल स्टेशनों पर दिखने वाली अफरा-तफरी नहीं मिलेगी। आने और जाने के लिए अलग-अलग एलिवेटेड रैंप बने हैं। लखनऊ का ये रेलवे स्टेशन कितना खास है, ये जानिए…
समाचार स्रोत
यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।
मूल स्रोत देखें ↗