कानपुर कारोबारी हत्याकांड- जेल से बाहर आई बहू शालू:कोर्ट ने कहा था- तुरंत रिहा करो, बेटे ने पिता की हत्या कराकर फंसाया
कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल भेजी गई बहू शालू सोमवार देर शाम बाहर आ गई। आज दोपहर में कोर्ट ने उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने माना कि शालू का ससुर की हत्या में कोई हाथ नहीं था। रिहाई का आदेश देते हुए कहा- कोर्ट या विवेचक के बुलाने पर शालू को हाजिर होना पड़ेगा। शालू के बड़े भाई धीरज अरोड़ा और

कानपुर में दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में जेल भेजी गई बहू शालू सोमवार देर शाम बाहर आ गई। आज दोपहर में कोर्ट ने उसे तुरंत रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने माना कि शालू का ससुर की हत्या में कोई हाथ नहीं था। रिहाई का आदेश देते हुए कहा- कोर्ट या विवेचक के बुलाने पर शालू को हाजिर होना पड़ेगा। शालू के बड़े भाई धीरज अरोड़ा और बहन सोनिया उसे लेने शाम करीब 6:30 बजे कानपुर जेल पहुंचे। बड़ी बहन सोनिया शालू को लेने जेल के अंदर गईं। जेल अधिकारियों ने शालू की सुपुर्दगी देने से पहले सोनिया से दस्तावेज पर साइन कराए। इसके बाद शालू मास्क लगाकर बहन के साथ जेल से बाहर निकली। जेल में 21 दिन रही शालू, मीडिया को देखते ही रो पड़ी 7 सितंबर को ससुर की हत्या के आरोप में जेल गई शालू 21 दिन जेल में रही। मीडियाकर्मियों को देखते ही शालू फफक पड़ी। भाई धीरज अरोड़ा ने तुरंत उसे सीने से लगा लिया। इसके बाद शालू और सोनिया को गाड़ी में बैठाकर ले गए। शालू के वकील शिवाकांत दीक्षित ने कहा- ये खुशी का पल है। एक निष्पक्ष रिहाई हुई है। इससे पहले बहन की रिहाई को लेकर भाई धीरज अरोड़ा ने बताया कि शालू को जेल भेजने वाली पुलिस ने उसे ससुर की हत्या में निर्दोष माना। धीरज ने बताया कि शालू का बेटा श्रीजय फिलहाल लखनऊ में उनके पास रह रहा है। अब शालू कानपुर में ससुराल के रतन आर्बिट वाले फ्लैट पर न जाकर सीधे लखनऊ यानी मायके आएगी। शालू की रिहाई की 3 तस्वीरें… 5 सितंबर को कारोबारी विनीत मिनोचा की हत्या हुई थी इंदिरा नगर में रतन ऑर्बिट के फ्लैट C-104 निवासी विनीत मिनोचा की 5 सितंबर को हत्या हुई थी। दवा कारोबारी को 17 चाकू मारे गए थे। 24 सिंतबर को पुलिस ने बेटे सुब्रत को पिता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। सुब्रत ने मीडिया के सामने कहा था- पिता के कई महिलाओं से संबंध थे, इसी वजह से मां पुनीता उनके साथ नहीं रहती थीं। सुब्रत के मुताबिक, उसे डर था कि कोई महिला उसके घर आकर ये दावा न कर दे कि वह विनीत के बच्चे की मां बनने वाली है। इसलिए उसने खुद अपने पुराने नौकर विशाल गौतम और उसके साथी राजकिशोर के जरिए पिता विनीत मिनोचा की हत्या कराई थी। कारोबारी की हत्या की शुरुआती जांच में पुलिस ने शालू को हत्यारोपी मानते हुए जेल भेजा था। लेकिन पुलिस की जांच में शालू निर्दोष साबित हुई थी। जिसके बाद शुक्रवार को पुलिस ने शालू के पक्ष में क्लोजर रिपोर्ट कोर्ट में पेश की थी। इस पर कोर्ट ने आज सोमवार को सुनवाई की। सिलसिलेवार पढ़िए, सुब्रत ने पत्नी को पिता की हत्या में कैसे फंसाया? विनीत ने विशाल को चोर समझा, फिर बदलना पड़ा प्लान 5 सितंबर की रात, सुब्रत ने कारोबारी पिता विनीत मिनोचा के कत्ल से पहले शाम 6 से लेकर 8 बजे के बीच विशाल को 4 बार फोन किया। विशाल जानता था कि वो ये काम अकेला नहीं कर सकता था। इसलिए उसने अपने दोस्त राज किशोर को भी हत्या में शामिल किया। जैसा कि पहले से तय था, सुब्रत रात 9:30 बजे अपनी पत्नी शालू को लेकर पार्टी के लिए घर से निकल गया। जाने से पहले उसने अपार्टमेंट के CCTV बंद कर दिए। रात 9:45 बजे विशाल और राजकिशोर असली चाबी से फ्लैट के अंदर दाखिल हुए, जो सुब्रत पहले ही विशाल को दे चुका था। प्लान था कि हर रोज करीब 10 बजे तक कारोबारी विनीत सो जाते थे। सुब्रत ने विशाल और राजकिशोर से कहा था कि विनीत का मुंह तकिए से दबाकर दम घोंट देना। कमरे में कोई उथल-पुथल नहीं होनी चाहिए। जिससे सुबह सबको लगे कि उनकी मौत हार्ट अटैक से हो गई है। मर्डर का तरीका बदला, यहीं चूक हो गई राजकिशोर और विशाल कारोबारी के कमरे में पहुंचकर छिप गए। रात 11:30 बजे तक इंतजार किया। कारोबारी को नींद नहीं आ रही थी। वह देर से कमरे में आए। जैसे ही लाइट जलाई, उनकी नजर विशाल पर पड़ी। वह चोर समझकर चिल्लाए- बचाओ चोर… बचाओ। इससे विशाल घबरा गया। वह अपने साथ चाकू लेकर आया था। उसी से उसने विनीत पर हमला कर दिया। एक-एक करके 17 वार किए। फिर तेजी से राजकिशोर के साथ फ्लैट से निकल गया। यहीं वो बड़ी चूक हो गई, जिससे पुलिस विशाल तक सिर्फ 14 घंटे में पहुंच गई। दरअसल, अपार्टमेंट के बाहर लगे CCTV में दोनों नजर आ गए। इस सिचुएशन के लिए सुब्रत पहले से तैयार था। उसके प्लान के तहत ही विशाल ने पुलिस के सामने शालू का नाम लिया। सुब्रत ने चालाकी से शालू के मोबाइल से विशाल को फोन करवाए थे। कानपुर पुलिस ने भी बिना गहराई से जांच किए 24 घंटे के अंदर शालू को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। सुब्रत बोला- गिरफ्तार न होता तो आत्महत्या कर लेता सुब्रत ने गिरफ्तारी के बाद मीडिया के सामने कहा कहा- मुझे पिता की हत्या कराने का कोई अफसोस नहीं, वो अय्याश थे। बस मैं उनकी ऐसी हत्या नहीं कराना चाहता था। शालू जेल गई तो मुझे गिल्ट हुआ। मैं नींद की गोलियां खाने लगा था। अगर पुलिस मुझे न पकड़ती तो मैं आत्महत्या कर लेता। सुब्रत के मुताबिक, पापा के कई महिलाओं से अफेयर थे। अगर वे किसी को शादी करके घर ले आते तो वह संपत्ति में हिस्सेदार बन जाती। मैं एक-एक रुपए का मोहताज था, जबकि पापा गोवा में लड़कियों के साथ पार्टी की तस्वीरें दिखाते थे। मुझ पर करीब 40 लाख रुपए का कर्ज था। पापा मुझे सिर्फ 40 हजार रुपए पॉकेट मनी देते थे। मेरे साथ नौकरों जैसा व्यवहार करते थे। ---------------------------- ये खबर भी पढ़िए कानपुर में शव देख पत्नी बेसुध हुई, बेटी लिपटकर रोई: अपार्टमेंट में चाचा-भतीजे की मौत हुई थी, 5 घंटे हंगामे के बाद मालिक ने शर्तें मानीं कानपुर में शनिवार को बालाजी अपार्टमेंट में हाईटेंशन लाइन की चपेट में आने से चाचा-भतीजे की मौत हो गई थी। रविवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद सुबह लगभग 7 बजे शव घर पहुंचा तो उनके परिवार वालों और रिश्तेदारों का आक्रोश फूट पड़ा। पढ़ें पूरी खबर…
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