30 अक्टूबर 2026, 7:55 PM
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किसान खाद के लिए केंद्रों के चक्कर लगा रहे:जालौन में सात दिन बाद भी नहीं मिली डीएपी

जालौन जिले में रबी की फसलों की बुवाई के बीच खाद की किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकारी स्तर पर खाद की पर्याप्त उपलब्धता और आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। जालौन की उरई स्थित सहकारी खाद केंद्रों पर कहीं ताले लटके हैं तो कहीं खाद के लिए किसानों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी

किसान खाद के लिए केंद्रों के चक्कर लगा रहे:जालौन में सात दिन बाद भी नहीं मिली डीएपी
स्रोत: dainik bhasker category
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जालौन जिले में रबी की फसलों की बुवाई के बीच खाद की किल्लत ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। सरकारी स्तर पर खाद की पर्याप्त उपलब्धता और आपूर्ति के दावे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग नजर आ रही है। जालौन की उरई स्थित सहकारी खाद केंद्रों पर कहीं ताले लटके हैं तो कहीं खाद के लिए किसानों को घंटों लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। किसानों ने खाद वितरण में मनमानी और कालाबाजारी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि सरकारी दर पर 1350 रुपये में मिलने वाली डीएपी की बोरी खुले बाजार में 1500 से 1800 रुपये तक में खरीदनी पड़ रही है। सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे खाद केंद्र पर अपनी परेशानी बताते हुए अटरिया गांव निवासी किसान लल्लन सिंह ने बताया कि वह लगातार सात दिनों से खाद के लिए उरई की सहकारी समिति के चक्कर लगा रहे हैं, लेकिन अब तक एक बोरी भी नहीं मिल सकी। उन्होंने बताया कि दो बोरी खाद मजबूरी में बाहर से 1750 रुपये प्रति बोरी के हिसाब से खरीदनी पड़ी। उनका आरोप है कि केंद्र पर समय से पहुंचने के बावजूद टोकन नहीं दिया जाता, जबकि कुछ लोगों को रुपये देकर खाद उपलब्ध करा दी जाती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पल्लेदारों के माध्यम से भुगतान करने वालों को प्राथमिकता मिल रही है। वहीं इटौआ गांव निवासी चंद्रभान ने बताया कि वह छह से आठ दिनों से खाद के लिए केंद्र के चक्कर काट रहे हैं। 15 टोकन बांटे जाने की जानकारी कभी सुबह सात बजे तो कभी आठ बजे पहुंचने के बावजूद खाद नहीं मिल रही। उनके मुताबिक केंद्र पर करीब 150 से 200 किसान मौजूद थे, जबकि सुबह महज 15 टोकन बांटे जाने की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से जुड़े कुछ खास लोगों को प्राथमिकता देकर खाद उपलब्ध कराई जा रही है। बाहर डीएपी की बोरी 1650 से 1800 रुपये तक में मिलने की बात भी उन्होंने कही। फसलों की बुवाई प्रभावित किसानों ने जिला कृषि अधिकारी गगनदीप सिंह और ARCS शिव कुमार की भूमिका पर भी सवाल उठाये है। किसानों का कहना है कि समय पर खाद नहीं मिलने से फसलों की बुवाई प्रभावित हो रही है। वही सरकारी रिकॉर्ड में खाद की पर्याप्त उपलब्धता दिखाई जा रही है तो किसानों को केंद्रों पर खाद क्यों नहीं मिल रही इस मामले में दैनिक भास्कर द्वारा ARCS शिव कुमार से खाद न मिलने और किसानों द्वारा गंभीर आरोप लगाए जाने पर पक्ष जानना चाहा, लेकिन उनके द्वारा न तो फोन उठाया गया, न ही व्हाटसअप पर भेजे गए मेसेज का जवाब दिया गया।
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यह खबर dainik bhasker category से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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