गंगा का जलस्तर 23 सेंटीमीटर घटा:अभी भी चेतावनी बिंदु से 46 सेंटीमीटर ऊपर, लोगों की मुश्किलें बरकरार
गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार रात खतरे के निशान को पार करने के बाद शनिवार को जलस्तर 113.08 मीटर तक पहुंच गया था। रविवार शाम छह बजे जलस्तर तीन सेंटीमीटर घटकर 112.97 मीटर पर पहुंचा। इसके बाद सोमवार सुबह आठ बजे केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार जलस्तर 112.79 मीटर दर्ज किया गया। मंगलवार सुबह जल

गंगा के जलस्तर में लगातार दूसरे दिन गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार रात खतरे के निशान को पार करने के बाद शनिवार को जलस्तर 113.08 मीटर तक पहुंच गया था। रविवार शाम छह बजे जलस्तर तीन सेंटीमीटर घटकर 112.97 मीटर पर पहुंचा। इसके बाद सोमवार सुबह आठ बजे केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार जलस्तर 112.79 मीटर दर्ज किया गया। मंगलवार सुबह जलस्तर 112.56 मीटर रहा। पिछले 24 घंटे में गंगा के जलस्तर में 23 सेंटीमीटर की कमी आई है। हालांकि पानी अभी भी चेतावनी बिंदु 112 मीटर से 46 सेंटीमीटर ऊपर है। ऐसे में जलस्तर घटने के बावजूद तटीय और बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की मुश्किलें पूरी तरह कम नहीं हुई हैं। गंगा के खतरे के निशान को पार करने के बाद शुक्लागंज और आसपास के तटीय इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर हो गई थी। गोताखोर, कर्बला, हुसैन नगर, तेजीपुरवा और सैय्यद कंपाउंड समेत आसपास के क्षेत्रों में पानी पहुंच गया था। कई जगह घरों और रास्तों के आसपास पानी भरने से लोगों को आवागमन में परेशानी हुई। जलस्तर घटने लगा है, लेकिन निचले इलाकों में पानी पूरी तरह नहीं निकलने से स्थिति सामान्य नहीं हुई है। शहर के रविदास नगर, मालवीय नगर, श्रीनगर और इंद्रानगर में भी बाढ़ का पानी पहुंचने से लोगों को दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई संपर्क मार्गों पर अब भी पानी भरा होने के कारण लोगों को दूसरे रास्तों से आवागमन करना पड़ रहा है। जलस्तर में लगातार हो रही गिरावट से लोगों को राहत की उम्मीद जगी है। हालांकि निचले इलाकों से पानी निकलने में अभी समय लगने की संभावना है। गंगा के खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने का असर ग्रामीण क्षेत्रों में भी देखने को मिला। गगनीखेड़ा और फत्तेखेड़ा समेत कई गांवों में बाढ़ का पानी दोबारा पहुंच गया। गांवों को जोड़ने वाले संपर्क मार्गों पर पानी भरने से ग्रामीणों के आवागमन में परेशानी हुई। नेतुआ स्थित कान्हा गौशाला में भी बाढ़ का पानी दोबारा प्रवेश कर गया। त्रिभुवनखेड़ा पावर हाउस के पास भी पानी पहुंचने से स्थिति पर नजर रखी जा रही है। जलस्तर में कमी के बावजूद प्रशासन और ग्रामीणों की निगाह गंगा के जलस्तर पर बनी हुई है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को फिलहाल सतर्क रहने की जरूरत है, क्योंकि जलभराव वाले क्षेत्रों में आवागमन अभी भी चुनौती बना हुआ है।
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