जन्म प्रमाण पत्रों की जांच में दस्तावेजों की गड़बड़ी:संभल में दस्तावेजों की काट-छांट पकड़ी, अप्रैल को मई किया; FIR के आदेश
संभल नगर पालिका में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार की जांच में एक अस्पताल के रिकॉर्ड में काट-छांट कर जन्म की तारीख बदलने का मामला पकड़ा गया। अस्पताल से सत्यापन में मूल तारीख अलग मिली। मामले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को एफआईआर

संभल नगर पालिका में जन्म प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया की जांच में दस्तावेजों में गड़बड़ी के कई मामले सामने आए हैं। सिटी मजिस्ट्रेट सुधीर कुमार की जांच में एक अस्पताल के रिकॉर्ड में काट-छांट कर जन्म की तारीख बदलने का मामला पकड़ा गया। अस्पताल से सत्यापन में मूल तारीख अलग मिली। मामले में नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी को एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। जन्म-मृत्यु पंजीकरण अधिनियम की धारा 13(3) के तहत एक साल से अधिक पुराने मामलों में मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद प्रमाण पत्र जारी होता है। इसी प्रक्रिया के तहत जांच में कई फाइलों में अलग-अलग जन्मतिथियां मिलीं। सिटी मजिस्ट्रेट ने संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई के निर्देश भी दिए हैं। अस्पताल के रिकॉर्ड में अप्रैल को मई किया एक मामले में एसएस हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी होम से जारी दस्तावेज में जन्मतिथि में काट-छांट मिली। नगर पालिका की रिपोर्ट में 12 मई 2025 जन्मतिथि दर्ज थी, जबकि अस्पताल से सत्यापन कराने पर मूल रिकॉर्ड में तारीख 12 अप्रैल 2025 मिली। सिटी मजिस्ट्रेट ने इसे गंभीर मामला मानते हुए एफआईआर के लिए अधिशासी अधिकारी को निर्देशित किया है।
एक फाइल में तीन अलग-अलग जन्मतिथियां एक अन्य मामले में बच्चे के जन्म प्रमाण पत्र से जुड़ी फाइल में नगर पालिका, सभासद और गवाहों के शपथ पत्र में अलग-अलग जन्मतिथियां मिलीं। एक प्रकरण में कार्यालय की रिपोर्ट में 1 जनवरी 1999, पिता के शपथ पत्र में 2 जुलाई 1999 और गवाह के शपथ पत्र में 20 जुलाई 1999 दर्ज मिला। इससे दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं। तारीख और साल में भी मिली काट-छांट एक अन्य आवेदन में जन्मतिथि 30 जनवरी 2015 को काटकर 30 जनवरी 2016 किए जाने के निशान मिले। इसके बावजूद नगर पालिका की ओर से 30 जनवरी 2016 की रिपोर्ट भेजी गई। इसी तरह एक अन्य फाइल में अलग-अलग दस्तावेजों में वर्ष 2014, 2017, 2019 और 2021 दर्ज मिला, जबकि गवाहों के शपथ पत्र में 17 अगस्त 2019 लिखा था। पहले बन चुका प्रमाण पत्र, फिर भेजी गई जांच एक मामले में आवेदक के बेटे का जन्म प्रमाण पत्र 5 मार्च 2025 को पहले ही बन चुका था। इसके बावजूद नगर पालिका ने 2026 में दोबारा जांच के लिए प्रकरण भेज दिया। सिटी मजिस्ट्रेट ने ईओ को संबंधित कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई और रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। जांच में यह भी सामने आया कि संस्थानों में अधिकांश जन्म होने के बावजूद कई प्रमाण पत्रों में जन्म घर पर होना दर्ज किया जा रहा है।
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