31 अक्टूबर 2026, 5:40 PM
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टूट रहा सोना, जुलाई के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम; क्या जिम्मेदार है चीन?

सोना फिर से दबाव में है. ये जुलाई के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं. शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1% गिरकर 3,980.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. इससे पहले, दिन के कारोबार के दौरान यह 17 जुलाई के बाद के अपने सबसे निचले स्तर को छू चुका था.

टूट रहा सोना, जुलाई के बाद सबसे निचले स्तर पर पहुंचे दाम; क्या जिम्मेदार है चीन?
स्रोत: abp news world
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सोना फिर से दबाव में है. ये जुलाई के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर आ गई हैं. शुक्रवार को स्पॉट गोल्ड (हाजिर सोना) 1% गिरकर 3,980.40 डॉलर प्रति औंस पर आ गया. इससे पहले, दिन के कारोबार के दौरान यह 17 जुलाई के बाद के अपने सबसे निचले स्तर को छू चुका था.

बता दें कि 17 जुलाई को सोने का भाव गिरकर 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया था. इसके बाद अगस्त और सितंबर में कीमतों में थोड़ा सुधार हुआ, जिससे रेट 1,48,000 रुपये तक पहुंच गए. अब फिर जाकर सोना 1,42,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर कारोबार कर रहा है. 

इस दौरान दिसंबर डिलीवरी के लिए अमेरिकी गोल्ड फ्यूचर्स भी 1% गिरकर 3,991.10 डॉलर प्रति औंस पर आ गए. रॉयटर्स के अनुसार, अक्टूबर में अब तक सोने की कीमतों में 4.3% की गिरावट आई है, जिसका मतलब है कि लगातार दूसरे महीने सोने की कीमतों में कमी देखने को रही है. इससे पहले सितंबर में भी सोने की कीमतों में गिरावट देखने को मिली थी. 

क्या चीन है जिम्मेदार?

चीनी सरकार ने विदेशी निवेश पर नियमों को कड़ा कर दिया है. पहले ये नियम केवल बड़ी कंपनियों या संगठनों पर लागू होते थे, लेकिन अब आम आदमी को भी इसके दायरे में लाया गया है. 1 जुलाई 2026 से लागू हुए कानून में सरकार ने ऑफशोर ट्रस्ट्स पर 20% का टैक्स लगा दिया है.

साथ ही सरकार ने क्रॉस-बॉर्डर स्टॉक ट्रेडिंग पर भी पाबंदी लगा दी है. ऐसा करने के पीछे सरकार का मकसद अरबों डॉलर की घरेलू पूंजी को देश से बाहर जाने से रोकना है और घरेलू निवेश को बढ़ावा देना है. सरकार चाहती है कि चीन में लोग अपने ही सरकारी बॉन्ड्स और घरेलू बाजार में निवेश करें. 

स्विस वेल्थ मैनेजमेंट फर्म जूलियस बेयर ने अपनी हालिया मार्केट कमेंट्री में कहा है कि सोने में हाल-फिलहाल में आई गिरावट की एक वजह यह भी हो सकती है कि निवेशक - खासकर चीन में - देश में ऑफशोर पूंजी (पर की जा रही सख्ती के बीच नकदी जुटाने के लिए अपना सोना बेच रहे हैं.

दरअसल, चीन में सरकार के नए नियमों से बड़े निवेशकों पर टैक्स बिल या कानूनी देनदारियों को चुकाने का दबाव अचानक से बढ़ गया है. ऐसे में ये अपने मौजूदा सोने के होल्डिंग्स को बेचकर कैश जुटा रहे हैं.

चूंकि चीन ग्लोबल मार्केट में सोने का बड़ा खरीदार है इसलिए वहां के निवेशकों द्वारा नई खरीदारी रोकने और मौजूदा होल्डिंग्स को बड़े पैमाने पर भुनाने से अंतर्राष्ट्रीय बुलियन मार्केट पर नीचे की तरफ भारी दबाव देखा जा रहा है. हालांकि, सिर्फ अकेले चीन को इसके लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता. 

ये भी हैं जिम्मेदार...

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और लगातार बनी हुई महंगाई को लेकर चिंताएं भी बुलियन पर दबाव डाल रही हैं. रॉयटर्स के अनुसार, उम्मीद से बेहतर अमेरिकी GDP ग्रोथ और सितंबर में बढ़ती महंगाई ने इस संभावना को और मजबूत कर दिया है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व फिर से ब्याज दरें बढ़ा सकता है.

पिछली तिमाही में अमेरिकी GDP में उम्मीद से ज्यादा बढ़ोतरी हुई, जबकि गैसोलीन और अन्य वस्तुओं की कीमतों में उछाल के कारण महंगाई बढ़ गई. इससे दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना और मजबूत हो गई है।

आमतौर पर, ब्याज दरें बढ़ने से सोना कम आकर्षक हो जाता है क्योंकि सोने से कोई ब्याज नहीं मिलती है. जबकि, बॉन्ड और ब्याज देने वाली अन्य संपत्तियों से बेहतर रिटर्न मिलता है, तो निवेशक अपना पैसा सोने जैसी ऐसी संपत्तियों से निकाल लेते हैं. 

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यह खबर abp news world से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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