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डॉ. निशंक की जयंती पर दो साहित्यकार सम्मानित:डॉ. जीवन शुक्ल को साहित्य, शीला शर्मा को लोक संस्कृति सम्मान, प्रशस्ति पत्र मिला

लखनऊ के हजरतगंज स्थित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक की 108वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर साहित्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दो विभूतियों को सम्मानित किया गया। ‘डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक साहित्य सम्मान-2026’ कन्नौज के साहित्यकार डॉ. जीवन शुक्ल को दिया गया। व

डॉ. निशंक की जयंती पर दो साहित्यकार सम्मानित:डॉ. जीवन शुक्ल को साहित्य, शीला शर्मा को लोक संस्कृति सम्मान, प्रशस्ति पत्र मिला
स्रोत: Dainik Bhaskar Uttar Pradesh
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लखनऊ के हजरतगंज स्थित उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के निराला सभागार में डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक की 108वीं जयंती मनाई गई। इस मौके पर साहित्य और लोक संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए दो विभूतियों को सम्मानित किया गया। ‘डॉ. लक्ष्मीशंकर मिश्र निशंक साहित्य सम्मान-2026’ कन्नौज के साहित्यकार डॉ. जीवन शुक्ल को दिया गया। वहीं ‘विद्या मिश्र लोक संस्कृति सम्मान-2026’ से लखनऊ की शीला शर्मा को नवाजा गया। दोनों को 11-11 हजार रुपए, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न और प्रशस्ति पत्र भेंट किया गया। साहित्य समाज के दर्द की आवाज बने सम्मानित डॉ. जीवन शुक्ल ने कहा कि साहित्यकार को सत्ता के साथ खड़े होने के बजाय समाज के दुख-दर्द को ईमानदारी से सामने रखना चाहिए। रचनाओं के जरिए समाज को जागरूक और प्रेरित करना ही साहित्य साधना है। उन्होंने अपनी कविता के माध्यम से रोटी, संघर्ष और बदलाव के सवाल भी उठाए। पैर से पेंटिंग बनाना सीखा शीला शर्मा ने कहा कि उन्हें बचपन से कला का शौक था। उन्होंने पैर से पेंटिंग बनाना सीखा। कई प्रदर्शनियां लगाईं। जीवन में उतार-चढ़ाव आए, लेकिन लोगों का सहयोग मिलता रहा। उन्नाव में प्रशिक्षण केंद्र चलाकर बच्चों को कला सिखा रही हैं। उन्होंने सम्मान के लिए संस्थान का आभार जताया। छंद और कविता को जीवित रखा मुख्य अतिथि प्रो. सूर्य प्रसाद दीक्षित ने कहा कि निशंक ने मंच की पवित्रता को जीवंत रखा। उन्होंने आधुनिक दौर में कवित्त और सवैया छंद को जीवित रखने का काम किया। उनकी कविताओं में यति, गति, स्वर और ताल का सुंदर समन्वय मिलता है। उन्होंने युवा रचनाकारों को भी आगे बढ़ने के अवसर दिए। व्यवस्था पर कविता से प्रहार अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि उदय प्रताप सिंह ने कहा कि जीवन शुक्ल ने पूरी जिंदगी व्यवस्था के खिलाफ कविताएं लिखीं। श्रोताओं के अनुरोध पर उन्होंने ‘सांस खींचने से पूर्व ठीक से विचार लो’ छंद का पाठ किया। सभागार तालियों से गूंज उठा। अशोक बनर्जी और डॉ. सुधा मिश्रा ने सम्मानित विभूतियों के व्यक्तित्व और कृतित्व पर विचार रखे। मीनाक्षी शुक्ला ने लालता प्रसाद मिश्र ‘पीयूष’ की कविताओं का पाठ किया।
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यह खबर Dainik Bhaskar Uttar Pradesh से प्राप्त जानकारी पर आधारित है।

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