6 अक्टूबर 2026, 3:04 PM
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तीखी धूप में बाढ़, कहां से आया इतना पानी:ऊपरी इलाके से 3 दिन में बारिश का पानी लखनऊ पहुंचा; 1 हफ्ते तक ऐसे ही रहेंगे हाल

लखनऊ में करीब 7 दिन से बारिश नहीं हुई है। पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई हो चुकी है। हर दिन तीखी धूप में लोगों का पसीना छूट रहा है। लेकिन, लखनऊ के एक हिस्से में बाढ़ के गंभीर हालात हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार घर बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों के जेहन में सवाल है कि बिना बारिश आखिर गोमती में उफान क्यों? नदी में लगातार इतना

तीखी धूप में बाढ़, कहां से आया इतना पानी:ऊपरी इलाके से 3 दिन में बारिश का पानी लखनऊ पहुंचा; 1 हफ्ते तक ऐसे ही रहेंगे हाल
स्रोत: dainik bhasker category
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लखनऊ में करीब 7 दिन से बारिश नहीं हुई है। पूरे प्रदेश से मानसून की विदाई हो चुकी है। हर दिन तीखी धूप में लोगों का पसीना छूट रहा है। लेकिन, लखनऊ के एक हिस्से में बाढ़ के गंभीर हालात हैं। फैजुल्लागंज इलाके में करीब 40 हजार घर बाढ़ की चपेट में हैं। लोगों के जेहन में सवाल है कि बिना बारिश आखिर गोमती में उफान क्यों? नदी में लगातार इतना पानी कहां से आ रहा? पढ़िए रिपोर्ट… गोमती, गंगा-यमुना की तरह हिमालय से निकलने वाली पहाड़ी नदी नहीं है। यह यूपी के पीलीभीत जिले में गोमत ताल या फुलहर झील से निकलती है। मानसूनी बारिश का पानी ही इस नदी को बहाव देता है। यह शाहजहांपुर, हरदोई, सीतापुर, लखनऊ होते हुए करीब 960 किमी का सफर तय करके गाजीपुर-वाराणसी बॉर्डर पर कैथी गांव के पास गंगा में मिल जाती है। गोमती की 6 सहायक नदियां भी हैं। कठीना, सुखेता, छोहा, सरायन जैसी छोटी नदियां और जलधाराएं मैदानी इलाकों में बहते हुए गोमती के प्रवाह को बढ़ाती हैं। हालांकि, मैदान से निकलने वाली नदी होने से गोमती की गति काफी धीमी है। इसी वजह से इस पर कोई बड़ा बांध नहीं बना है। सिर्फ लखनऊ में नदी का जलस्तर कंट्रोल करने और शहर में पीने का पानी सप्लाई करने के लिए एक बैराज (गोमती बैराज) बनाया गया है। नदी कहां से शुरू, कहां खत्म, इसमें कौन सी बरसाती नदियां मिलती हैं, मैप से समझिए- गर्म-नम हवाओं ने पीलीभीत, लखीमपुर, सीतापुर में बारिश कराई बंगाल की खाड़ी से उठे एक डीप डिप्रेशन (गर्म और बेहद नम हवाएं) की वजह से 26 और 27 सितंबर को पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, हरदोई में ज्यादा बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, शाहजहांपुर में 26 सितंबर को 162.1 mm बारिश हुई। यह उस दिन की औसत बारिश से 100 गुना ज्यादा है। इसी तरह पीलीभीत में 27 सितंबर को 56.1 mm बारिश हुई, जबकि सामान्य तौर पर इस दिन सिर्फ 2.2 mm बारिश होती है। इस तरह करीब 25 गुना ज्यादा रही। इन जिलों की लखनऊ से दूरी और भौगोलिक स्थिति के कारण गोमती का पानी धीरे-धीरे लखनऊ पहुंचने लगा। सिंचाई विभाग (लखनऊ डिवीजन) के एग्जिक्यूटिव इंजीनियर मुकेश वैश बताते हैं- गोमती की ढलान भी बहुत कम है। इससे सामान्य दिनों में इसकी गति करीब 1 किमी प्रति घंटा रहती है। इसके अलावा गोमती बहुत ज्यादा घुमावदार रास्तों से होकर गुजरती है। नक्शे पर जो दूरी 250 किलोमीटर दिखती है, उसे नदी के घुमाव की वजह से 350 किमी से ज्यादा का सफर तय करना पड़ता है। बाढ़ में पानी का दबाव बढ़ने पर भी नदी की रफ्तार 2 से 3 किमी प्रति घंटा ही हो पाती है। यही वजह है कि बाढ़ का पानी लखनऊ पहुंचने में 3 दिन का समय लग गया। इसका असर 30 सितंबर और 1 अक्टूबर तक दिखने लगा। अब समझिए दूसरे जिलों का पानी लखनऊ कैसे पहुंचा… 1. सीतापुर और हरदोई (दूरी- 80 से 130 किमी): इन इलाकों में बरसा पानी सबसे तेजी से 36 से 48 घंटे यानी 1.5 से 2 दिन के भीतर लखनऊ की सीमा (बख्शी का तालाब और इटौंज) में घुसा। 2. शाहजहांपुर (दूरी- 180 से 220 किमी): यहां से पानी को लखनऊ पहुंचने में 3 से 4 दिन का समय लगा। 3. पीलीभीत (दूरी- 350+ किमी): यहां के मैदानी भागों और फुलहर झील से पानी को गोमती नदी के घुमावदार रास्तों से बहकर लखनऊ आने में 5 से 6 दिन का समय लगता है। नदी का पानी नालों के जरिए शहर में घुसा लखनऊ के गोमती बैराज में 'कुड़िया घाट पंपिंग स्टेशन' पर गोमती का जलस्तर करीब 105.7 मीटर रखा जाता है। इसी पानी को साफ करके पूरी राजधानी को पीने के पानी के रूप में सप्लाई किया जाता है। इसके साथ ही यह बारिश के मौसम में अचानक बढ़े जलप्रवाह को 10 गेटों के जरिए नियंत्रित कर शहर को बाढ़ से बचाता है। लेकिन, गोमती का जलस्तर करीब 108.14 मीटर पर बना हुआ है। सामान्य परिस्थितियों में शहर का पानी नालों के जरिए नदी में गिरता है। लेकिन जब नदी का जलस्तर नालों से ऊपर पहुंच जाता है, तो यह सिस्टम उल्टी दिशा में काम करने लगता है। इस वजह से नदी का पानी नालों के जरिए बैक-फ्लो होकर रिहायशी इलाकों में घुस रहा है। शारदा नहर परियोजना के चीफ इंजीनियर प्रभाकर प्रसाद बताते हैं- नदी के डूब क्षेत्र और वेटलैंड पर हुए अवैध निर्माण और अतिक्रमण ने नदी की पानी सोखने की प्राकृतिक क्षमता को कम कर दिया है। पानी निकलने के गोमती बैराज के सभी 10 गेट पूरी तरह खोल दिए गए हैं। वहीं, गोमती में गिरने वाले 48 नाले सील कर दिए गए हैं, जिससे नदी का पानी बैक फ्लो न हो। 4 से 5 दिन में बाढ़ का पानी उतर जाएगा। ---------------------------- ये खबर भी पढ़ें… भारी बारिश के बाद क्या ठंड भी कड़ाके की होगी, गीजर, ब्लोअर का मार्केट कैसा रहेगा; अलनीनो के बावजूद यूपी के 32 जिलों में बाढ़ मौसम विभाग का अनुमान था कि इस साल यूपी में कम बारिश होगी। लेकिन, 26 सितंबर को मौसम विभाग ने बताया कि यूपी में तय कोटे से 2% ज्यादा बारिश हुई है। इतना ही नहीं, वाराणसी, प्रयागराज, बहराइच, उन्नाव, बाराबंकी जैसे 32 जिलों में बाढ़ के हालात हैं। अब आम आदमी अनुमान लगा रहा है कि लगातार बारिश की वजह से इस साल सर्दियां जल्दी आ जाएंगी। तो क्या अलनीनो का असर खत्म हो गया है? वाकई सर्दियां जल्दी शुरू हो जाएंगी? इस साल हाड़ कंपा देने वाली सर्दी पड़ेगी या सामान्य रहेगी? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
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